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कोलंबो : वर्ष 2018 श्रीलंका के इतिहास में सबसे भीषण राजनीतिक संकट के लिए जाना जाएगा, जिसके चलते भारत सहित पूरी दुनिया में चिंता उत्पन्न हो गई थी। घोर आर्थिक संकट का सामना कर रहे इस देश को लगभग दो महीने तक तब कार्यशील सरकार के बिना रहना पड़ा, क्योंकि राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने नीतिगत मुद्दों पर मतभेदों के चलते एक नाटकीय कदम के तहत प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उनकी जगह पूर्व राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।

राजपक्षे की सत्ता में वापसी से भारत की यह चिंता बढ़ गई कि चीन अब श्रीलंका पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा। लिट्टे के खात्मे के लिए जाने जाने वाले राजपक्षे की दशक-भर लंबे तानाशाही वाले शासन के चलते व्यापक निन्दा होती है। श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने हालांकि राष्ट्रपति सिरिसेना को 16 दिसंबर को यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद पर बहाल करने को विवश कर दिया।


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