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रायपुर। विधानसभा के पटल पर गुरुवार को राज्य के कंप्ट्रोलर ऑडिटर जनरल ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में आर्थिक अनियमितता से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक ट्राइबल विभाग द्वारा स्कूलों में आदिवासी छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में भारी अनियमितता पाई गई है। इस मामले में सरकारी स्कूलों के 6, निजी स्कूलों के 12 प्राचार्यों सहित जांजगीर के आदिवासी विकास विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कैग ने की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह छात्रवृत्ति की राशि छात्रों को नहीं मिली और किस तरह इसमें अनियमितता बरती गई। इसके साथ ही कैग की रिपोर्ट में ई-टेंडरिंग में भी भारी गड़बड़ी की बात सामने आई है।

कैग की रिपोर्ट पटल पर रखते हुए राज्य के मुख्य आडिटर जनरल विजय कुमार मोहंती ने बताया कि पिछले वर्ष ई-टेंडरिंग पोर्टल के माध्यम से 4601 करोड़ के कुल 1921 टेंडर्स की ऑनलाइन बीडिंग 74 कॉमन कंप्यूटर्स के माध्यम से की गई।

इससे टेंडरिंग की प्रक्रिया में गड़बड़ी खुले तौर पर सामने आ रही है। इसके अलावा राज्य के सबसे पुराने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के वाहन भत्ते के नाम पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संचालन में भी राज्य सरकार की ओर से कई कमियां सामने आई हैं। इस मिशन में राज्य में स्पेसलिस्ट डॉक्टर्स के 89 फीसद पद भरे ही नहीं गए हैं।


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