अब विशेषज्ञों ने कहा, एशिया में India कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित

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पांच जून को एक दिन में 9,472 नए केस मिले थे, इसकी तुलना में 23 अगस्त को 61,749 मामले सामने आए। कोरोना महामारी के चलते दूसरी बीमारियों की भी अनदेखी हो रही है। पूरा स्वास्थ्य महकमा कोरोना संक्रमितों के उपचार में भी लगा है। इसके चलते अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है। टास्क फोर्स ने अपने बयान में कहा है कि दूसरे देशों के मामलों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि टेस्टिंग बढ़ाकर कोरोना से होने वाली मौतों को नहीं रोका जा सकता।भारत कोरोना के घातक संक्रमण की चपेट में बुरी तरह से आ चुका है। पूरे एशिया में भारत ऐसा देश है जहां कोरोना का सबसे अधिक असर देखा गया है। यह कहना है जानकारों का जिन्‍होंने लॉकडाउन और अनलॉक के दिनों की तुलना के बाद यह बात कही है। अनलॉक के बाद के दो महीनों में देश में प्रतिदिन मिलने वाले नए मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आइपीएचए) के विशेषज्ञों के मुताबिक दुनियाभर में प्रतिदिन मिल रहे नए मामलों में 30 फीसद और मौतों में 20 फीसद अकेले भारत में ही हो रही हैं। हालांकि, इनका यह भी कहना है कि देश में अभी कोरोना का चरम आना बाकी है। भारत में कोरोना महामारी पर तीसरे संयुक्त बयान में जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के टास्क फोर्स ने कहा है कि भारत में कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर प्रभावशाली है और मृत्युदर में भी लगातार गिरावट आ रही है। आइपीएचए और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आइएपीएसएम) ने इस साल अप्रैल में सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों को मिलाकर इस टास्क फोर्स का गठन किया था। टास्क फोर्स का काम देश में कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार को उपाय सुझाना है।

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