अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी हुए लगभग एक साल का समय बीत चुका है। अफगानिस्तान में सैन्य वापसी के एक साल बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक बैठक की है। बैठक में सीआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि सीआईए के लिए अब भी अल-कायदा और अन्य कट्टरपंथी आतंकी समूह प्राथमिकता में हैं, लेकिन अब एजेंसी के धन और संसाधनों का अधिकांश प्रयोग चीन से निपटने में किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि अल कायदा प्रमुख अल-जवाहिरी की मौत के बाद भी सीआईए के लिए आतंकवाद प्राथिमिकता में रहेगी। सीआईए ने आतंकवाद से निपटने में अपने विचार नहीं बदले हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन पिछले एक साल के दौरान चीन और रूस द्वारा उत्पन्न राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य खतरों से निपटने पर अधिक जोर दिया है। इस दौरान वह आतंकवाद पर बहुत कम बोले हैं। सीआईए में आतंकवाद पर काम कर रहे कई वरिष्ठ अधिकारियों को अब चीन से निपटने के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी जा रही है। सीआईए अधिकारियों ने जिस तरह बैठक कर नए सिरे से अपनी प्राथमिकताएं तय की हैं, उससे साफ हो जाता है कि वह अगले दिनों में एक साथ दो मोर्चों आतंकवाद और चीन और रूस द्वारा निर्मित चुनौतियों से मुकाबले के लिए अपनी किलेबंदी शुरू कर दी है।
हाल ही में नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ गया है। चीन ने अमेरिका से सभी संबंधों को खत्म करने की धमकी दी है। चीन की बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं से अमेरिका लंबे समय से चिंतित है। चीन ने कथित तौर पर दूसरे देशों के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है। साइबर और कॉर्पोरेट क्षेत्र में जासूसी अभियान चलाए और लाखों अल्पसंख्यक उइगरों को हिरासत में लिया है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले वर्षों में चीन, ताइवान के स्व-शासित लोकतांत्रिक द्वीप पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश करेगा।










































