नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी तेल के नल धड़ल्ले से चलने लगे। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने तेल की बिक्री से बंपर कमाई की है। होर्मुज पर कंट्रोल के कारण वह अपने तेल को एक्सपोर्ट कर पा रहा था। वहीं, खाड़ी के कई दूसरे देश सिर्फ उसे ऐसा करते देख रहे थे। लेकिन, दोबारा सीन चेंज हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित नौसैनिक नाकेबंदी का संकेत दिया है। यह हिंट इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म होने के बाद आया है। भारत के लिए भी इस घटनाक्रम के काफी मायने हैं।
21 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के नाकाम होने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने एक न्यूज आर्टिकल शेयर किया। इसका टाइटल था, ‘ट्रंप का वो ‘ट्रंप कार्ड’ जो राष्ट्रपति के पास है, अगर ईरान झुकता नहीं है: एक नौसैनिक नाकेबंदी।’
इसमें वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की पिछली रणनीति का जिक्र है, जहां तेल से होने वाली कमाई को रोककर अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी का इस्तेमाल किया गया था।
ईरान को करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त कमाई
ब्लूमबर्ग ने पहले एक रिपोर्ट में कहा था कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने तेल की बिक्री से करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त कमाई की है। यह फायदा इसलिए हुआ क्योंकि ईरान उन कुछ बड़े निर्यातकों में से एक बना हुआ है जो होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल जारी रख पा रहे हैं। वहीं, खाड़ी के दूसरे उत्पादकों से होने वाली खेप में काफी रुकावट आई है।










































