Israel US Iran War : ईरान-अमेरिका, इजराइल युद्ध नए स्तर पर पहुंच गया या कहिए कि यह एक अलग रूप ले चुका है। यह युद्ध सैन्य कम, आर्थिक ज्यादा हो गया है। इस युद्ध में अब एक-दूसरे के गैस एवं तेल संयंत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। बीते बुधवार रात को इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स को निशाना बनाकर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल को निशाना न बनाकर सउदी अरब, कतर और यूएई के गैस संयंत्रों एवं तेल रिफाइनरियों पर हमला कर दिया। चूंकि, ईरान के गैस फील्ड पर हमला इजराइल ने किया तो तेहरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई भी बेंजामिन नेतन्याहू के देश पर होनी चाहिए थी लेकिन ईरान ने ऐसा नहीं किया। उसने खाड़ी के इन तीन देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर ड्रोन और मिसाइलें दाग दीं। उसके हमले में दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड रास लफान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
रास लफान से 17 प्रतिशत गैस की आपूर्ति कम हुई
कतर का कहना है कि हमले के बाद दुनिया को इस संयंत्र से होने वाली 17 प्रतिशत गैस की आपूर्ति कम हो गई है और इस संयंत्र की मरम्मत में कम से कम पांच साल लगेंगे। सवाल है कि ईरान ने ‘बदले की कार्रवाई’ करते हुए आखिर इजराइल पर हमला क्यों नहीं किया? तो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि खाड़ी देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर ईरान ने हमले काफी सोच-विचारकर किए हैं। उसे पता है कि वह सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन से हमला करेगा तो इसमें से दो चार ही इजराइल पर गिरेंगी, बाकी उसके एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोन-मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर देंगे। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत वह 200 डॉलर तक पहुंचाना चाहता है।








































