- मोबाइल फोन ने हम सबकी जिंदगी आसान बना दी। हफ्तों महीनों में चिट्ठी, तार के जरिए मिलने वाली परिजनों की खबर अब मोबाइल का एक बटन दबाने से मिलने लगी। स्मार्टफोन ने तो वीडियो कॉल के जरिए दूर बैठे दोस्तों और परिजनों को साक्षात सामने लाकर रख दिया। लेकिन इसी मोबाइल फोन के जरिए दबे पांव एक बीमारी ने भी हमारे घरों में एंट्री ली। यह बीमारी कुछ और नहीं बल्कि मोबाइल फोन पर गेम्स खेलने की बीमारी है। मोबाइल पर कुछ बहुत ही खतरनाक गेम्स भी हैं, जो गेम खेलने वाले की जान लेने को उतारू हैं। ऐसे ही एक गेम की लत में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक 14 वर्षीय किशोर ने आत्महत्या कर ली। जानते हैं पूरा मामला क्या है?
- घटना भोपाल के पिपलानी इलाके की है। यहां 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र ने ऑनलाइन गेम की लत के चलते खुदकुशी कर ली। बड़ी बात है कि आत्महत्या करने वाला किशोर अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। जानकारी के मुताबिक किशोर मोबाइल गेम्स खेलने का आदी था। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।
- नहीं मिला सुसाइड नोट
- भोपाल के पिपलानी इलाके के श्रीराम कॉलोनी में रहने वाले 14 साल के अंश साहू ने अपने घर में आत्महत्या कर ली। हालांकि, इस मामले में पुलिस को किसी तरह का कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। लेकिन परिजनों के बयानों के अनुसार पुलिस की जांच ‘ब्लू व्हेल’ नाम एक घातक ऑनलाइन गेम की ओर मुड़ गई है।
- घर में अकेला था अंश
- अंश के माता-पिता एक प्राइवेट स्टूल में टीचर्स हैं और अंश उनका इकलौता बेटा था। जानकारी के अनुसार सोमवार 2 फरवरी को अंश के ननिहाल में उसके नाना की तेरहवीं का कार्यक्रम था। परिवार के सदस्य वहां गए हुए थे और अंश घर में अकेला था। दोपहर में परिजन अंश को लेने घर आए तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी खटखटाने के बावजूद जब दरवाजा नहीं खुला तो खिड़की से अंदर झांका गया। अंदर देखा तो अंश की आत्महत्या का पता चला।
- दरवाजा तोड़कर परिजन अंदर घुसे और तुरंत इंद्रपुरी स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने अंश को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पर पिपलानी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी। एसीपी अदिति बी सक्सेना ने मीडिया को बताया कि अंश का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। मोबाइल की सर्च हिस्ट्री और गेमिंग डेटा से ही आत्महत्या की असली वजह का पता चल पाएगा।
- दुनियाभर में सैकड़ों बच्चों ने की आत्महत्या
- परिजनों के अनुसार अंश पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन पर ‘ब्लू व्हेल’ गेम खेलने का आदी हो गया था। बता दें कि यह गेम अपने खतरनाक टास्क के लिए कुख्यात है। साल 2016-17 में देशभर में इस गेम के चलते कई बच्चों और युवाओं ने अपनी जान दे दी थी। दुनियाभर में सैकड़ों बच्चों ने इस गेम के टास्क पूरे करने के लिए आत्महत्या कर ली थी।
- ‘ब्लू व्हेल’ क्या है?
- यह इंटरनेट पर खेला जाने वाला एक गेम है, जो दुनियाभर के देशों में उपलब्ध है। इस गेम को खेलने वाले शख्स के सामने एडमिनिस्ट्रेटर कई तरह के चैलेंज रखता रहता है। सभी चैलेंज 50 दिन के अंदर पूरे करने होते हैं। इनमें आखिरी चैलेंज के रूप में आत्महत्या को रखा जाता है। समझा जाता है कि यह गेम बीच्ड व्हेल (आत्महत्या करने वाली व्हेल) से प्रेरित होकर बनाया गया था। गेम की शुरुआत रूस में साल 2013 में हुई थी और साल 2015 में इसके कारण पहली मौत हुई थी। साल 2016-17 में यह गेम बहुत अधिक लोकप्रिय हो गई थी।
- किसने बनाई ब्लू व्हेल गेम?
- ब्लू व्हेल नाम की इस गेम को साल 2013 में फिलिप बुडेकिन ने बनाया था। रूस में आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ने के बाद फिलिप बुडेकिन को गिरफ्तार किया गया और जेल की सजा भी हुई। फिलिप का दावा था कि यह गेम समाज में सफाई के लिए है। उसका कहना था कि खुदकुशी करने वाले बायोलॉजिकल वेस्ट होते हैं। फिलिप साइकोलॉजी का स्टूडेंट था और यूनिविर्सिटी ने उसे निकाल दिया था। मनोवैज्ञानिक इस तरह की गेम बनाने वाले को सिक पर्सनैलिटी करार देते हैं।








































