कंकर मुंजारे ने नक्सली एनकाउंटर पर फिर उठाए सवाल

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पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने एक बार फिर नक्सली एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। जिन्होंने 29 सितंबर को सोनगुड्डा चौकी के कोदापार में नक्सली कमलू के एनकाउंटर की तरह ही 14 दिसंबर को गढ़ी थाना क्षेत्र के खमकोदादर जंगल में मारे गए नक्सली चेतू के एनकाउंटर को फर्जी बताया है। उन्होंने पुलिस के बयान, घटनाक्रम की जानकारी, नक्सली के पास मिली बंदूक सहित अन्य बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए अन्य एनकाउंटर की तरह इस एनकाउंटर को भी फर्जी बताते हुए पुलिस पार्टी पर नक्सली की हत्या करने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने अब तक जिले में 20 फर्जी एनकाउंटर किए जाने का दावा करते हुए सभी एनकाउंटर की सीबीआई जांच कराने ,बालाघाट, मंडला और हार्कफोर्स के एसपी पर हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। जहां मांग पूरी ना होने पर उन्होंने इन सभी मामलों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर ,मामले की जांच न होने पर कोर्ट जाने की भी चेतावनी दी है। यह तमाम आरोप पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने सोमवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान लगाए हैं।

नक्सली की हत्या कर थमाई बंदूक ,फिर खिंची फोटो
आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए श्री मुंजारे ने बताया कि 14 दिसंबर की सुबह खमकोदादर में एक नक्सली को पुलिस ने मारना बताया है। जिसमें चेतू उर्फ हिड़मा का फर्जी एनकाउंटर किया गया है। पुलिस झूठी और मनगणत कहानी बना रही है। जबकि नक्सली चेतू को पकड़कर जंगल लेकर आए थे और उसकी हत्या की गई है। हमे जानकारी लगी है कि नक्सली चेतू एक बैगा आदिवासी के घर चार-पांच दिनों से रुका हुआ था। उसे पड़कर पूछताछ की गई है फिर जंगल ले गए और उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने जो फोटो जारी की है उसमें 315 वोट की एक बंदूक मिली है। यह बंदूक 60 से 70 वर्ष पूर्व चलन में थी। अभी उस बंदूक का उपयोग कोई भी नक्सली नहीं करते। यदि एनकाउंटर होता तो नक्सली के हाथ से बंदूक छूट जाती और दूर जाकर गिरती। लेकिन इन्होंने उसे पड़कर पास से गोली मारी है और बंदूक उसके हाथ में थाम कर उसकी फोटो खींची है ताकि वह वही प्रमोशन के साथ साथ मैडल भी लूट सके ।

इतनी ठंड में लोअर टीशर्ट में नक्सली कैसे घूम सकते हैं
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि 14 दिसंबर की सुबह के वक्त जंगल में हत्या की इस वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस द्वारा जो फोटो जारी की गई है उसमें नक्सली बंदूक थामे हुए हैं वही वह एक पतली सी शर्ट और लोअर में नजर आ रहा है। जबकि जिस जगह पर उसकी हत्या की गई है वहां काफी ठंड है, इतनी अधिक ठंड और कोहरे में कोई नक्सली लोअर और टीशर्ट में कैसे रह सकता है। इसीलिए यह एनकाउंटर फर्जी है। इनाम पाने के लिए, मेडल के लिए, प्रमोशन के लिए और अपनी वाहवही लूटने के लिए उसकी हत्या की गई है। इसके लिए बालाघाट एसपी समीर सौरभ, हार्कफोर्स कमांडेड रहमान और मंडल के एसपी रजत सकलेजा जिम्मेदार है।

सब पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए
श्री मुंजारे ने बताया कि यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि इसके पूर्व भी फर्जी एनकाउंटर करके मैडल औऱ वाहवही लूटी गई है। पुलिस बता रही है कि घटना के वक्त 10-15 नक्सलियों को पुलिस पार्टी ने घेर लिया था. नक्सलियों ने पहले फायरिंग की उसकी जवाबी कार्यवाही में नक्सली को मार गिराया गया है। जब वहां 10-15 नक्सली थे और उन्होंने पहले फायरिंग की तो किसी भी पुलिस को गोली क्यों नहीं लगी। वहीं जब पुलिस ने नक्सलियों को घेर लिया था, उन्हें सिलेंडर करने कहा था तो फिर नक्सली कैसे भाग गए और सिर्फ एक ही नक्सली कैसे मारा गया,बाकी सब नक्सली कैसे भाग गए। इन्होंने फर्जी एनकाउंटर किया है इन सब पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।

नक्सली और उसके पिता का कराया जाए डीएनए टेस्ट
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि नक्सली चेतू के शव को उसके परिजन लेने आए थे, उसमें पुलिस द्वारा जो फोटो जारी की गई है उसमें जिसे नक्सली चेतू का पिता बताया गया है। देखने पर ऐसा नहीं लगता कि वह उसका पिता हो, हमें लगता है जिसने शव लेकर गया है वह उसका पिता भी नहीं है।हमारी मांग है कि नक्सली और उसके कथित पिता का डीएनए टेस्ट करना चाहिए ताकि सच्चाई लोगों के सामने आए।

प्रमोशन, मेडल के लिए किया गया फर्जी एनकाउंटर
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि अन्य एनकाउंटर की तरह यह एनकाउंटर भी पूरी तरह से फर्जी है।यह एनकाउंटर भी प्रमोशन फ़ंड और मैडल के लिए किया गया है। उधर विधानसभा चुनाव होने के बाद 13 दिसंबर मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इधर 14 दिसंबर को एनकाउंटर हो गया। यह फर्जी एनकाउंटर भी प्रमोशन ,मैडल हासिल करने के लिए किया गया है जिसमें इस बार मंडला के एसपी को भी शामिल किया गया है।

5 वर्षों में किए गए फिर 20 फर्जी एनकाउंटर
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि केवल यह ही नहीं बल्कि बीते 5 वर्षों में पुलिस द्वारा 20 फर्जी एनकाउंटर किए गए हैं।नक्सली चेतू का जो एनकाउंटर बताया गया है वह भी फर्जी है। क्योंकि जिस जगह पर एनकाउंटर किया गया है वहां मंडला और बालाघाट दोनों पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की है जबकि जिस जगह पर एनकाउंटर हुआ है वहां से पुलिस चौकी महज 2 किलोमीटर दूर है और उस पुलिस चौकी में मालूम ही नहीं कि वहां एनकाउंटर हो गया।इसके पूर्व भी फर्जी एनकाउंटर किए गए है।सभी फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई से जांच करानी चाहिए।

महज 13 वर्ष की उम्र में कोई कैसे बन सकता है नक्सली
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि पुलिस ने जो प्रेस नोट जारी की है उसमें नक्सली चेतू को 25 वर्ष का बताया है। वही इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि नक्सली चेतू 12 वर्षों से नक्सली गतिविधि में शामिल था ।सवाल यह उठता है कि एक गांव का भोला भाला लड़का महज 13 वर्ष की उम्र में नक्सली कैसे बन गया ,और इतनी कम उम्र में वह नक्सली गतिविधियों सक्रिय कैसे हो गया। इसकी भी सीबीआई जांच करानी चाहिए। वही बालाघाट, मंडला एसपी औऱ हार्कफोर्स कमांडेंट पर हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। क्योंकि यहां एनकाउंटर भी अतिरिक्त फंड ,पैसे, इनाम, प्रमोशन और वहावाही के लिए किया गया है।

बात नहीं बनी तो जाएंगे कोर्ट
श्री मुंजारे ने आगे बताया कि लगातार पुलिस नक्सलियों को पड़कर उनके फर्जी एनकाउंटर कर रही है। उनकी हत्या करने के बाद उन्हें बंदूक थमाई जा रही है और बाद में फोटो खींच कर वाह वाही लूटी जा रही है। इसके पूर्व प्रकरण में भी प्रत्यक्ष दर्शियों पर दबाव बनाने का कार्य पुलिस द्वारा किया जा रहा है ।लगातार सबूत मिटाए जा रहे हैं। 5 वर्षों में 20 फर्जी एनकाउंटर कर दिए, हर बार झूठी कहानी बनाकर प्रमोशन और मेडल प्राप्त कर लिए। इन सभी मामलों की जांच होनी चाहिए। हम जल्द ही इन सभी मामलों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करेंगे और सीबीआई जांच की मांग करेंगे। यदि बात नहीं बनी तो फिर इस पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएंगे

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