केन-बेतवा लिंक परियोजना के समझौता ज्ञापन पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीएम ने किए हस्ताक्षर

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। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान का जो सपना देखा था, उसे सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक) के समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड का भाग्य बदलेगी। इससे प्यास भी बुझेगी और विकास भी होगा। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आज सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, बल्कि बुंदेलखंड की भाग्यरेखा को नया रंग-रूप दिया है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में जल शक्ति अभियान ‘कैच द रैन” की शुरुआत भी इस अवसर पर की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लाखों परिवारों के हित में जो सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए आज समझौता हुआ है। यदि आज कोरोना न होता तो झांसी या बुंदेलखंड में आकर कार्यक्रम करते और लाखों लोग आकर आशीर्वाद देते। दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों और सरकार ने इतना बड़ा काम किया है कि इसे हिंदुस्तान के पानी के उज्जवल भविष्य के लिए स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। यह मामूली काम नहीं है। सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इन्होंने बुंदेलखंड की भाग्यरेखा को नया रंग-रूप दिया है। बुंदेलखंड की भाग्य रेखा को बदलने का काम किया है। बुंदेलखंडवासियों की भी जिम्मेदारी है कि इस काम में इतना जुट जाएं ताकि यह काम हमारी आंखों के सामने पूरा हो जाए और खेत हरे-भरे दिखने लगें। परियोजना से लाखों लोगों को पानी तो मिलेगा ही, बिजली भी मिलेगी। प्यास भी बुझेगी और प्रगति भी होगी।

62 लाख लोगों को मिलेगा पानी

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज सुनहरा अध्याय लिखा गया है। पांच साल में नदी जोड़ने की दिशा में काम हुआ है। केन-बेतवा नदी को जोड़ने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सहमति दी है। इससे बरसों से प्यासी बुंदेलखंड की धरती के लाखों लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आने वाला है। 62 लाख लोग पीने के पानी के लिए तरसते थे। इन्हें प्रचुरता के साथ सतत रूप से पेयजल उपलब्ध रहेगा। दोनों राज्यों में 12 लाख हेक्टेयर भूमि में दो-तीन बार फसल ली जा सकेगी। इससे कई गुना आमदनी बढ़ेगी। यह योजना का श्रीगणेश ही नहीं बल्कि नए युग का सूत्रपात हो रहा है। कार्यक्रम में केन-बेतवा परियोजना को लेकर लघु फिल्म भी दिखाई गई।

मध्य प्रदेश के नौ जिलों को फायदा

मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले को परियोजना से सीधा फायदा होगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से कई जिले लाभान्वित होंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को इसका लाभ मिलेगा।

यह है परियोजना

इस परियोजना के तहत बेतवा और मप्र की केन नदी को लिंक किया जाना है। केन नदी जबलपुर के पास कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर 427 किमी उत्तर की ओर बहने के बाद उप्र के बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना नदी में मिलती है। बेतवा नदी मप्र के रायसेन जिले से निकलकर 576 किमी बहने के बाद उप्र के हमीरपुर जिले में यमुना में मिलती है। मप्र के छतरपुर जिले के दौधन गांव में दोनों नदियों को जोड़कर बांध बनाया जाएगा। यहां बिजली उत्पादन भी होगा। 78 मेगावाट बिजली मप्र को मिलेगी। लिंक परियोजना के जरिये केन नदी में 1074 एमसीएम पानी पहुंचाया जाएगा।

यह था विवाद

यह परियोजना वर्ष 2005 में मंजूर हुई थी। तब उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देना तय हुआ था। विवाद रबी फसल के लिए पानी देने को लेकर था। अप्रैल 2018 में उत्तर प्रदेश ने रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी की मांग रखी, जो बाद में 788 एमसीएम तक पहुंच गई। इस पर पूरी तरह से सहमति बनती, उससे पहले ही उत्तर प्रदेश ने जुलाई 2019 में 930 एमसीएम पानी का मांग पत्र भेज दिया। मध्य प्रदेश इतना पानी देने के लिए तैयार नहीं था। तब से पानी बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था।

परियोजना की लागत – 35,111 करोड़ रुपये

केंद्र सरकार देगी 90 फीसद राशि

राज्य सरकारें देंगी पांच-पांच फीसद राशि

प्रतिक्रिया –

आज का दिन मध्य प्रदेश और विशेषकर बुंदेलखंड के लिए स्वर्णिम है। अटल जी का सपना साकार हो रहा है। मोदी जी के संकल्प से पूरा किया गया है। परियोजना को लेकर मप्र और उप्र के बीच समझौता हो गया है। इससे बुंदेलखंड की तस्वीर और वहां के लोगों की तकदीर बदल जाएगी। बुंदेलखंड की जनता को बधाई और प्रधानमंत्री जी का आभार मानता हूं।

– शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मप्र

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में साकार हुआ है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने केन-बेतवा परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

– ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यसभा सदस्य

यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र को सूखा मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दूसरे अर्थों में यह बुंदेलखंड में प्रगति की नई सुबह लेकर आएगी। खजुराहो सांसद होने के नाते मेरे द्वारा नौ जुलाई 2019 को इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया गया और विभाग के मंत्रियों को भी इस संबंध में पत्र लिखे थे।

– विष्णुदत्त शर्मा, मप्र भाजपा अध्यक्ष

वर्षों से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का एमओयू हस्ताक्षर होना स्वागत योग्य। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास होगा लेकिन केंद्र सरकार के दबाव में शिवराज सरकार ने अनुबंध की शर्तों के विपरीत कई मुद्दों पर झुककर प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया है।

– कमल नाथ, पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

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