कैंसर पीड़ितों को मिलेगी राहत, 30 फीसद खर्च पर होगी कीमोथैरेपी

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कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए एक राहतभरी खबर है। दिल्ली में कार्यरत सेवाभावी संस्था उम्मीद विभिन्न समाजों के दानदाताओं के सहयोग से हाई डेफिनेशन डे केयर कीमोथैरिपी सेंटर इंदौर में बना रहा है। इसमें बाजार के मुकाबले 30 फीसद राशि पर मरीजों की कीमोथैरिपी की जाएगी। इसके साथ ही दवाई भी 70 फीसद कम राशि पर मिलेगी। संस्था द्वारा एक हजार वर्गफीट का 10 बेडवाला सेंटर अगले तीन महीने में बनाकर तैयार करने का लक्षय रखा है।

15 लाख रूपये की राशि से तैयार किए जा रहे इस सेंटर के लिए क्रिश्चियन समाज ने मिशन हास्पिटल छावनी में हाल, नर्सिंग स्टाफ और बिजली आदि निशुल्क उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही बोहरा, जैन, माहेश्वरी और अग्रवाल समाज के दानदाताओं के सहयोग से बेड, मल्टी पेरामानिटर, इन्फ्यूजन पंप के अलावा पंखे, एसी सहित अन्य संसाधान जुटाए जा रहे है। इसमें पांच सदस्यी स्टाफ और विशेषज्ञ डाक्टर अपनी सेवाएं देंगे। सेंटर का लाभ इंदौर के साथ ही देवास, उज्जैन, महू, देपालपुर, बुरहानपुर आदि आसपास के शहर के लोग भी उठा सकेंगे।

यहां पर मरीज और डाक्टरों के बीच सीधी चर्चा के लिए आडियो-वीडियो सिस्टम भी लगाया जाएगा। कैंसर सर्जन डॉ. गौरव खंडेलवाल का कहना है कि जिन लोगों को कैंसर होता है उनमें से 80 फीसद लोगों को किमो की जरूरत पड़ती है। संस्था द्वारा एेसे लोगों को बाजार के मुकाबले मात्र 30 फीसद में थैरेपी की जाएगी। दवाईयों के लिए भी कम्पनियों से टाइअप किया गया है। इसके चलते 70 फीसद कम राशि में मिलेगी। इस सेंटर को तैयार करने में जैन, बोहरा, माहेश्वरी, वैश्य समाज के दानदाताओं का सहयोग मिला है। संस्था द्वारा दिल्ली में आठ बेडवाले सेंटर का संचालन कैसंर पीडितों की सहायता के लिए किया जा रहा है।

सेवा प्रकल्प में सहभागी बनने का अवसर

अखिल भारतीय श्वेतांबर जैन महासंघ के सचिव योगेंद्र सांड ने बताया कि कैंसर पीड़ितों के लिए बनाए जा रहे सेंटर में जैन समाज की ओर से भी सहयोग किया जा रहा है। इसमें समाज के दानदाताओं द्वारा बेड प्रदान करने की योजना है। इस सेंटर के माध्यम से पीड़ितों का नाममात्र के खर्च पर डाक्टरी सलाह, कीमोथैरेपी और दवाईयां मिलेगी। शहर के मध्यक्षेत्र में होने से इसका लाभ अन्य शहरों के लोग भी सरलता से ले सकेंगे।

80 फीसद मरीजों को पढ़ती आवश्यकता

विशेषज्ञ बताते है कि कीमोथैरेपी अकेले, सर्जरी और रेडियशन के साथ इस्तमाल की जाती है। लगभग 70 से 80 फीसद कैंसर के मरीजों को अलग-अलग संख्या में इसकी आवश्यकता पढ़ती है। इसका उपयोग कैंसर की बची हुई कोशिकाओं को खत्म करने के लिए किया जाता है। कीमो से पहले मरीज को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होना पड़ता है। रक्तचाप, शरीर का तापमान, लीवर, किडनी आदि की जांच आदि की जाती है।

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