कोरोना वायरस रोकथाम पर नीति आयोग की विशेष बैठक, विशेषज्ञों ने माना दूसरी लहर में ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत

0

देश में कोरोना वायरस के कारण चिंता का माहौल है। इसे रोकने के लिए सरकार से लेकर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं। आज (सोमवार) नीति आयोग ने डॉक्टरों को एक मंच पर लेकर आया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेषज्ञों ने कोविड से लड़ने अपने विचार बताएं। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की ज्यादा आवश्यकता पाई गई है। लोगों में सास की परेशानी ज्यादा देखी गई।

भार्गव ने कहा कि दोनों की वेव में मृत्यु दर में कोई अंतर नहीं देखा गया। दोनों की लहर में 70 प्रतिशत लोग 40 की उम्र के थे। उन्होंने कहा, ‘अगर लक्षणों को देखें तो कोविड19 सांस की तकलीफ झेल रहे मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।’ डॉ. बलराम ने कहा कि पिछली बार सूखी खांसी, जोड़ों में दर्द और सिरदर्द जैसे केस ज्यादा सामने आए थे। उन्होंने कहा, हमारे पास जो डेटा है, उसके मुताबिक कोरोना वायरस की पहली और दूसरी लहर में मौत फीसद में अंतर नहीं है। लेकिन अब ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है।

डॉ. बलराम भार्गव ने आगे बताया कि देश में कोविड19 का डबल म्यूटेंट वर्जन पाया गया है। हालांकि हायर ट्रांसमिशन स्थापित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, आरटी-पीसीआर एक गोल्ड स्टैंडर्ड की टेस्टिंग है। वहीं एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि एक ही दिन में दवाओं का कॉकटेल देना मरीजों के मौत का कारण बन सकता है। गुलेरिया ने कहा, रेमेडिसवीर जादू की गोली नहीं है, ना इसे मृत्यु दर रुकने वाली है। हल्के लक्षणों वाले मरीजों पर समय से पहले देने पर इसका कोई फायदा नहीं है।

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि रेमेडिसवीर उन मरीजों को देनी चाहिए जो अस्पताल में भर्ती है। जिनमें ऑक्सीजन लेवल कम हो गया है। उन्होंने कहा, ‘अगर जांच ठीक से नहीं लिया गया या समय से पहले कर ली गई है। जब तक संक्रमण अधिक नहीं फैला तो रिपोर्ट निगेटिव ही आएगी। इसलिए कोरोना जांच के लिए सीटी या छाती का एक्स-रे कराना जरूरी है। अगर पहली रिपोर्ट में संक्रमण नहीं निकला तो 24 घंटे बाद दोबारा टेस्ट करानी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here