खाद्यान्न पर्ची के लिये पड़ रहा भटकना,कितनी मौत के बाद जागेंगे जिम्मेदार

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इन दिनों चल रहे कोरोना काल में जहां रोजगार की कमर टूट गई है।वहीं इसका सबसे अधिक असर यात्री बसों सहित अन्य परिवहन के साधनों पर भी पड़ा है। परिवहन पर आधारित खासकर चालक परिचालकों की माली हालत बेहद नाजुक बनी हुई है वहीं कोरोनाकाल में इन लोगो को पर्ची पर खाद्यान्न भीनसीब नही हो पा रहा है।

बता दें कि एक ओर जहां कोरोना काल में बिगड़ी आर्थिक स्थिति और बदहाली तनाव के चलते 2 चालको में जहां एक ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली तो वहीं दूसरे चालक ने फांसी पर झूलकर अपनी जिंदगी को अलविदा कह दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि परिवार की बदहाली और रोजी रोटी के संकट के बीच जूझते इन चालको और परिचालको की दयनीय हालत

बस चालक परिचालक संगठन मंत्री ताहिर खान ने बताया कि चालक परिचालको के परिवार की कोरोना काल के चलते आर्थिक हालात बेहद दयनीय हो गई है। 2 लोगो ने तनाव के चलते मौत को गले भी लगा लिया है। पंजीयन के बावजूद तकनीकी खराबी और सत्यापन के अभाव में उन्हें खाद्यान्न पर्ची भी नसीब नही हो पाई है।

वह इस पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा ने बताया कि किन कारणो से अभी तक खाद्यान्न पर्ची नही बनी या सत्यापन नही हो पाया यह जांच का विषय है और घोर लापरवाही है, चालक परिचालको की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है यदि जिम्मेदार इनकी बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर नही है तो 28 अक्टूबर को आंदोलन में प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया जायेगा।

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