खैरलांजी पुलिस ने सुलझाई अंधे हत्या की गुत्थी

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वारासिवनी (पदमेश न्यूज)। खैरलांजी थाना के अंतर्गत ग्राम पंचायत नवेगांव ख में विगत ४ दिन पूर्व हुए अंधे हत्याकांड की गुत्थी को खैरलांजी पुलिस ने सुलझाने में सफ लता हासिल की है। पुलिस ने आरोपी पर धारा ३०२ आईपीसी का मामला दर्ज किया है। आरोपी ने हत्या कबूल करने के बाद शनिवार को पुलिस ने हत्या के आरोपी घासीराम बिरनवार को न्यायालय में प्रस्तुत कर उसे जेल भेज दिया गया है। मृतक के परिजनों द्वारा पुलिस को ९ सितम्बर को दी गई सूचना के अनुसार मृतक दुलीचंद ८ सितम्बर की शाम से गायब था जो कि आरोपी घासीराम के साथ खेत गया हुआ था। लेकिन रात भर और दूसरे दिन ९ सितम्बर को दिन भर परिजनो के ढूंढने के बाद उसका शव आरोपी के खेत में होना पाया गया । जिसे बगैर पुलिस को बताये परिजनों द्वारा शव को अपने घर ला लिया गया था। जिसकी सूचना पुलिस को रात्रि में ९ बजे दी गई थी। जिसके बाद १० सितम्बर को पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर पंचनामा और शव का पोस्ट मार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। ११ सितंबर को पुलिस ने अपने जांच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए घासीराम बिरनवार को नवेगांव के डोंगरिया मार्ग पर लगभग ४ बजे के दौरान शमसान घाट से पकड़कर पूछताछ की गई तो उसने कबूल किया कि उसने ही दुलीचंद की गला दबाकर उसके ही गमछे की सहायता से हत्या की है। गले की हड्डी टूट जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। जिसके पास से पुलिस ने मृतक का गमछा भी बरामद किया है। मृतक के पुत्रों ने आरोपी के धमकी के कारण पुलिस को गलत सूचना देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। जिसे पुलिस ने परिजनों के कथन और शारीरिक हावभाव के आधार पर जल्दी ही भांप लिया। इस बारे में मृतक के पुत्र से जब गहनता से पूछताछ की गई तो सारी सच्चाई पुलिस के सामने आ गई। मृतक के पुत्र सुनील ने बताया कि घासीराम बिरनवार ने ही उसके पिता की हत्या खेत मे फसल गिरने और की फ सल खराब हो जाने की बात को लेकर की गई । घासीराम जब उसे मारने लगा तो उसके पिता द्वारा इसका विरोध किया गया जिसके कारण वह आक्रोशित हो गया था। पिता के खेत से गांव की ओर भागने के बाद उसे पकड़कर मार डाला। जिसे खुद उसने अपनी आंखों से देखा। मगर आरोपी के डराने धमकाने के कारण वह और उसके परिजनो ने पुलिस को सच्चाई बताने से डरते रहे। खैरलांजी थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी ने बताया कि धान की फ सल का कुछ हिस्सा खराब होने को लेकर आरोपी मृतक के पुत्र सुनिल को मार रहा था। तभी उसका पिता आ गया और कहने लगा कि एक तो उसके पुत्र को बिना बताए खेत लेकर आ गया और अब उसको मामूली सी बात पर मारने भी लगा। जिसको लेकर दुलीचंद और घासीराम के बीच विवाद होने लगा और आरोपी द्वारा उसको मौत के घाट उतार दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में उक्त घटना क्रम को सुलझाने में थाना प्रभारी रामबाबु चौधरी,एएसआई सुभाष ठाकुर ,श्री पटले प्रधान आरक्षक, तिलक सोनेकर,आरक्षक धनराज बोमचर, हितेश देवडा,रामप्रसाद धुर्वे,संदीप ठवरे, महेंद्र तुरकर आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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