गंगा स्नान कर श्रध्दालुओं ने लिया पोटियापाट बाबा का आशीर्वाद

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नगर मुख्यालय से लगभग ६ किमी. दूर ग्राम पंचायत बम्हनी-ददिया के आगे पावन सलिल वैनगंगा नदी स्थित पोटियापाट घाट में कार्तिक पूर्णिमा के दूसरे दिन से जारी १५ दिवसीय मेले में २० नवंबर को रविवार छुट्टी का दिन होने से वैनगंगा नदी में स्नान करने एवं भगवान भोलेनाथ व पोटियापाट बाबा की पूजा अर्चना करने क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने पहुंचकर अपनी आस्था प्रकट की। विदित हो कि नगर मुख्यालय से लगभग ६ किमी. दूर ग्राम पंचायत ददिया व बम्हनी की सीमा में समनापुर मार्ग पर स्थित वैनगंगा नदी के पोटियापाट घाट में कार्तिक पूर्णिमा से १५ दिवसीय ब्लॉक का सबसे बड़ा मेला लगता है, इस मेले में विकासखंड के अलावा अन्य दूर दराज के ग्रामों के लोग व श्रध्दालु बैलगाड़ी व अन्य साधनों से पहुंच कर स्नान कर मां गंगा मैया व बाबा पोटिया देव की पूजा अर्चना कर मेले का आनंद उठाते है और कुछ लोग मान्यता की कढ़ाई लेकर पहुंचते है जिनके द्वारा विभिन्न पकवान बनाकर पोटियापाट बाबा की पूजा अर्चना व भोग लगाकर आराधना की जाती है जिनकी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। २० नवंबर को सार्वजनिक वैनगंगा पोटियापाट बाबा (शिवधाम) मेला समिति बम्हनी-ददिया के संयुक्त तत्वाधान में दिन-रात के मेले के अवसर पर पोटियापाट धाम में रात ९ बजे से छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चर्चा में मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि यह मेला कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलता है और कार्तिक मेले के अवसर पर ग्रामीणजन बैलगाडिय़ों एवं अन्य वाहनों में सपरिवार पहुंचते हैं तथा गंगा स्नान कर प्रसादी के रूप में भोजन तैयार कर पूजा अर्चना कर गंगा मैया व पोटियापाट बाबा का आर्शिवाद प्राप्त करते है। पोटियापाट बाबा के इतिहास के संबंध में बुजुर्गों का कहना है कि वैनगंगा नदी के बीच में एक विशालकाय पत्थर की पिंडी बनी हुई है जिसे हम सभी लोग पूरातात्विक सांस्कृतिक आदिमकाल से पोटियापाट बाबा के नाम से जानते है और पूर्वजों द्वारा बताया गया है कि ग्राम ददिया के किसी व्यक्ति को स्वप्न में पोटियापाट बाबा ने कहा था कि आप मेरे स्थान पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन से १५ दिन का मेला लगाकर मेरी पूजा अर्चना करों मैं आपकी मनोकामना पूर्ण करूंगा तब से पोटियापाट बाबा की पूजा अर्चन कर १५ दिन का मेला लगना प्रारंभ हो गया है।

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