पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एलपीजी गैस की भारी किल्लत बनी हुई है। महीनों के लंबे इंतजार के बाद भी उपभोक्ताओं को रसोई गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस विकट स्थिति ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके चलते लोग अब एक बार फिर अपने पुराने परिवेश यानि मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गये हैं। चूल्हे जलाने की इस मजबूरी ने बाजार में जलाऊ लकड़ी की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है। वहीं गैस की किल्लत की चलते अब क्षेत्रीयजन लकड़ी पर निर्भर हो गये है और वर्तमान में वैवाहिक सहित अन्य कार्यक्रम संपन्न हो रहे है जिसके लिए जलाऊ लकड़ी की अति आवश्यक है । लालबर्रा वन विभाग के डिपो में गत दिवस से एक ट्रक जलाऊ लकड़ी एक दिन में आता है वह कुछ देर में ही खत्म हो जाता है क्योंकि आधार कार्ड के आधार पर लकड़ी के चठ्ठों का वितरण किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में एक ही परिवार में ५ से ७ सदस्य है और वे बदल-बदलकर आते है जिससे उन्ही परिवार में अधिकांश उन्हे मिल जाता है और शेष लोगों को नही मिल पा रहा है। इस तरह से डिपो में पर्याप्त जलाऊ लकड़ी नही होने से क्षेत्रीयजनों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और जलाऊ लकड़ी के चट्टे वितरण पर भी सवाल उठ रहे है। क्षेत्रीयजनों ने वन विभाग के जिम्मेदारों को राशन कार्ड एवं समग्र आईटी के आधार पर परिवार के एक व्यक् िको चठ्ठे वितरण करने की मांग की है ताकि सभी को जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे मिल सके।
डिपों में उमड़ी भीड़, कुछ ही घंटों में स्टॉक साफ
दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा के द्वारा क्षेत्रीय लोगों की सुविधा के लिए डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन मांग इतनी अधिक है कि डिपो में आने वाली लकडिय़ां महज कुछ ही घंटों में समाप्त हो रही हैं। सुबह से ही लोग डिपो के बाहर कतारों में खड़े नजर आते हैं। गैस सिलेंडर न मिलने की हताशा अब लकड़ी प्राप्त करने की आपाधापी में बदल गई है। डिपों में गत ४ अप्रैल से रोज एक ट्रक जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे आ रहे है लेकिन कुछ ही घंटों में खत्म हो जा रहा है। जिसके कारण कई लोगों को बिना लकड़ी के चठ्ठे लिये बैरंग वापस होना पड़ रहा है। साथ ही बाजार क्षेत्र से महंगे दामों में जलाऊ लकड़ी लेने मजबूर है जिन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
आधार कार्ड आधारित वितरण पर आपत्ति
लकड़ी वितरण की वर्तमान प्रक्रिया को लेकर स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। वर्तमान में वन विभाग आधार कार्ड को पहचान का आधार मानकर लकड़ी का वितरण कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही बड़े परिवार में कई सदस्य होते हैं और सबके पास अलग-अलग आधार कार्ड हैं। ऐसे में एक ही परिवार के लोग अलग-अलग कार्ड दिखाकर भारी मात्रा में लकड़ी ले जा रहे हैं। गैस सिलेंडर की किल्लत के चलते जलाऊ लकड़ी डिपों में पहुंचते ही जल्दी खत्म हो जाता है और जरूरतमंद परिवारों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की है कि लकड़ी का वितरण आधार कार्ड के बजाय परिवार समग्र आईडी के आधार पर किया जाना चाहिए। अगर समग्र आईडी के आधार पर वितरण होता है, तो एक परिवार को एक ही बार लकड़ी मिल पायेगी। इससे कालाबाजारी और स्टॉक की बर्बादी रूकेगी और क्षेत्र के हर घर तक जलाऊ लकड़ी पहुंच पायेगी।
दूरभाष पर चर्चा में दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा रेंजर श्रीमती सीता भलावी ने बताया कि जलाऊ लकडी की मांग बढ़ गई है और वितरण भी किया जा रहा है। साथ ही अधिक मात्रा में जलाऊ लकड़ी के चठ्ठे की मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेजे है, उपलब्ध होते ही अब समग्र आईडी के आधार पर जलाऊ लकड़ी के चठ्ठों का वितरण करने के निर्देश दिये गये है ताकि सभी परिवार को लकड़ी मिल सके।









































