नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दो व तीन फरवरी की रात में चीनोर क्षेत्र के सात गांवों में हुई ओलावृष्टि से फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए सर्वेदल मैदान में उतर गए हैं। प्रशासन ने नुकसान के सर्वे के लिए सात दलों का गठन किया है। इन दलों में राजस्व, कृषि विभाग व पंचायत के कर्मचारी हैं।
गुरुवार तक ओलावृष्टि प्रभावित गांवों के सात सौ से अधिक किसानों के खेतों हुए नुकसान का आंकलन ये दल कर चुके थे। यहां करीब 250 हैक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सर्वे दलों को तीन दिन में नुकसान के सर्वे की रिपोर्ट भू अभिलेख कार्यालय को देनी है।
यहां बता दें कि दो व तीन फरवरी को चीनोर तहसील के गांव चीनोर, कछौआ, बड़की सराय, सिकरौदा, भौरी, खुर्दपार्क, जुझारपुर सहित करीब एक दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई थी और खेत में खड़ी गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों में 90 प्रतिशत का नुकसान हुआ था।
ओलों की चादर बिछ गई थी
यहां बता दें कि चीनोर क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि के दौरान कछौआ, भौंरी जैसे गांवों में तो ओलों की तीन से चार इंच की चादर बिछ गई थी। हालांकि सात गांवों के अलावा अन्य गांवों में कम नुकसान की खबर हैं। ओलावृष्टि के बाद कलेक्टर सहित प्रशासन के अफसर मैदान में उतर गए थे और दल गठित कर नुकसान का सर्वे करने के आदेश दिए थे।
कृषि विभाग के मैदानी अफसरों की माने तो इन सात गांवों में चार से पांच सौ हैक्टेयर में खड़ी फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। दो दिन बाद सर्वे समाप्त होने के बाद ही पीडि़त किसानों व प्रभावित क्षेत्रफल सामने आ पाएगा।








































