चरमरा सकती है कोरोना स्वास्थ्य व्यवस्था

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज़)। कोरोना संक्रमण काल में सबसे महत्वपूर्ण महती भूमिका अदा करने वाले आयुष चिकित्सक व आयुष कर्मचारियों में अपनी लंबित मांगों को पूरा नहीं किए जाने को लेकर इन दिनों बहुत अधिक आक्रोश व्याप्त है। इस कारण उनके बीच में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन से हड़ताल पर जाने की सुगबुगाहट बड़ी तेजी से सुनाई दे रही है।
जल्द कर सकते हैं हड़ताल पर जाने की घोषणा
हड़ताल के लिए बकायदा आयुष कर्मचारियों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों के अपने साथियों से चर्चा कर कार्य योजना तैयार की गई है। हालांकि उन्होंने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और ना ही इस बात की सूचना अधिकृत रूप से अधिकारियों व मीडिया को दी है। लेकिन सूचना यहीं मिल रही है कि आगामी एक या 2 दिन के भीतर उनके द्वारा इस बात की घोषणा कर दी जाएगी कि वह हड़ताल पर जा रहे हैं।
प्रदेश भर में की गई थी आयुष चिकित्सकों की भर्तियां
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आयुष कर्मचारियों द्वारा हड़ताल किए जाने से कोविड को लेकर बनाई गई सारी व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा जाएगी। आपको बता दें कि प्रदेश शासन द्वारा चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की अधिक आवश्यकता को देखते हुए प्रदेशभर में भर्तियां की गई थी। इस दौरान बालाघाट जिले में भी लगभग 35 से 40 चिकित्सक नौकरी करने आए, हालांकि इनमें से कुछ चिकित्सक अपने निजी कारणों की वजह से नौकरी छोड़कर चले गए। इसी तरह आयुष का अन्य स्टाफ भी वर्तमान समय में कोरोना के लिए सेवाएं दे रहा है।
कोविड की जिम्मेदारी आयुष चिकित्सकों और कर्मचारियों के कंधों पर
बालाघाट जिले के भीतर ही आयुष चिकित्सक और कर्मचारियों की बात की जाए तो कोविड की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है। ऐसे में यदि आयुष चिकित्सक और कर्मचारी हड़ताल पर गए तो व्यवस्था बहुत बदतर हो जाएगी। बालाघाट जिले में वर्तमान में जिला अस्पताल के आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी क्वॉरेंटाइन में है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आयुष चिकित्सक अपनी कितनी बड़ी भूमिका अदा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि 2 अक्टूबर से क्या इनकी हड़ताल शुरू होती है या फिर क्या प्रदेश शासन उसके पहले इनकी मांगे पूरी कर लेता है।

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