टूटी सड़क की आखिर मरम्मत करेगा कौन?

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बालाघाट जिले की लाइफ लाइन के जाने वाली लालबर्रा-बालाघाट- रजेगांव और नैनपुर-लामता-बालाघाट मार्ग की हालत सड़क की हालत किसी से छिपी नहीं है। जर्जर सड़क और इस पर हिचकोले खाते वाहन। पल-पल दुर्घटना का डर याद दिला रहे हैं लगभग 17 से 18 बरस पहले मध्य प्रदेश की तन डोले मन डोले खस्ताहाल सड़कों की।

कंजई से बालाघाट रजेगांव मार्ग दूरी लगभग 72 किलोमीटर इसी तरह बालाघाट से नैनपुर दूरी लगभग 77 किलोमीटर की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।

चलिए मुद्दे की बात पर आते हैं कि आखिरकार इन सड़कों की मरम्मत क्यों नहीं हो रही है।

इसी सवाल को लेकर हम एमपीआरडीसी कार्यालय पहुचे तो जिला अधिकारी दीपक आड़े ने बताया कि अब यह सड़क एनएचआई नेशनल हाईवे को हस्तांतरित हो चुकी है इसीलिए इस सड़क की मरम्मत और सारा देखरेख का काम उन्हीं की जिम्मेदारी है।

दूरभाष पर जब हमने कटनी कार्यालय में पदस्थ अधिकारी श्री बाझल और जबलपुर एनएचआई कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी श्री खंडेलवाल से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि सड़क तो हमें हस्तांतरित हो चुकी है इस सड़क के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार हो रहा है मतलब मैदानी स्तर पर काम शुरू हो चुका है लेकिन मरम्मत का काम अभी उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

मतलब साफ है कि इन दोनों सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी नाही एमपीआरडीसी विभाग की है और ना ही एनएचआई विभाग की है तो फिर किसकी है? क्या जब तक नई सड़क नहीं बनती कब तक जिलेवासियों को इसी खस्ताहाल जर्जर गड्ढे नुमा सड़क में चलना पड़ेगा।

यह तो बड़ा सवाल है क्योंकि इन दोनों सड़कों के प्रति शासन प्रशासन की भी लापरवाही स्पष्ट देखी जा सकती है, तभी तो खस्ताहाल सड़कों पर लगातार ध्यानाकर्षण किया जा रहा है। बावजूद इसके शासन प्रशासन खामोश बैठा है और जनता त्रस्त हो रही है।

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