डिपो में जलाऊ लकड़ी की कमी, ग्रामीणजन हो रहे परेशान

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वन विभाग के द्वारा जलाऊ लकड़ी व दाह संस्कार के लिए लकड़ी, बांस, बल्ली आदि लोगों को आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए लकड़ी डिपो की स्थापना की गई है। नगर मुख्यालय के तहसील कार्यालय के समीप स्थित वन विभाग के डिपों में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध नही होने के कारण क्षेत्रीयजनों को लकड़ी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और सबसे अधिक उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनके परिवार में वैवाहिक, तेहरवीं, दाह संस्कार व अन्य कार्यक्रम है जिन्हे जलाऊ लकड़ी अंत्यंत आवश्यकता है परन्तु वन विभाग के द्वारा जलाऊ लकड़ी की व्यवस्था नही की जा रही है जिसके कारण क्षेत्रीयजनों में आक्रोश व्याप्त है। विदित हो कि लालबर्रा मुख्यालय में स्थित डिपों में पिछले दो माह से जलाऊ लकड़ी नही पहुंचा है और रोजाना आधा दर्जन से अधिक लोग जलाऊ लकड़ी के लिए डीपों पहुंच रहे है और लकड़ी नही होने के कारण बैरंग वापस हो रहे है या फिर मजबूरी में मिलों से अधिक दाम में लकड़ी खरीद रहे है क्योंकि गैस के दाम बढ़ जाने से अब अधिकांश लोग पुरानी परंपरा लकड़ी की ओर लाने लगे है जिसके कारण लकड़ी की मांग बढऩे लगी है परन्तु वन विभाग जलाऊ लकड़ी ग्रामीणजनों को उपलब्ध नही करवा पा रही है। चर्चा में ग्रामीणजनों ने बताया कि डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध नही है और जब डिपो आते है तो कहा जाता है कि एक-दो दिन में लकड़ी आ जायेगी एवं आकर देखते है तो नही आती है और बिना लकड़ी लिये बैरंग वापस हो रहे है साथ ही यह भी बताया कि वैवाहिक कार्यक्रम, स्कूलों में मध्यान्ह भोजन, निर्माण व अन्य कार्यों में लकड़ी की अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि गैस के दाम बढऩे के लिए अब लोग लकड़ी का अधिक उपयोग करने लगे है इसलिए वन विभाग से मांग है कि जल्द डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध करवाये। वही डिपो स्थाई सुरक्षा कर्मी ने बताया कि डिपो में विगत दिनों से लकड़ी की कमी बनी हुई है एवं रोजाना कई लोग लकड़ी लेने के लिए डिपो पहुंच रहे हैं लेकिन लकड़ी नहीं होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है एवं वर्तमान में मात्र तीन से चार चट्टा लकड़ी ही बची हुई है लेकिन लकड़ी की मोटाई अधिक होने के कारण लोग इसका उपयोग जलाऊ व दाह संस्कार में भी नहीं कर सकते और मध्यान्ह भोजन, निर्माण व अन्य कार्यों के लिए भी लकड़ी की मांग बनी हुई है और एक-दो दिनों में जलाऊ लकड़ी आ जायेगें।

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