डेढ़ साल से अनुपस्थित अधिकारी पर मध्‍य प्रदेश वन विभाग मेहरबान, पढ़‍िये कौन हैं ये महानुभाव

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करीब डेढ़ साल से कार्यस्थल से अनुपस्थित भारतीय वन सेवा के अधिकारी (मुख्य वनसंरक्षक) एम. कालीदुर्रई पर राज्य सरकार और वन विभाग मेहरबान हैं। डेढ़ साल में सरकार ने उनसे यह तक नहीं पूछा कि वे कहां हैं और कब लौटेंगे। हालांकि उद्यानिकी विभाग में हुए अनुदान घोटाले में उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

वन मुख्यालय स्थित समन्वय शाखा में पदस्थ कालीदुर्रई सितंबर 2020 से कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। शुरू के सात महीने तो वन अधिकारियों का उनसे दूरभाष पर भी संपर्क नहीं हुआ। यही कारण है कि उद्यानिकी विभाग में हुए अनुदान घोटाले में उनके खिलाफ जारी आरोप पत्र छह माह में उन्हें नहीं पहुंचाया जा सका।

आरोप पत्र 23 जनवरी 2021 को जारी हुआ था और वन विभाग को कालीदुर्रई तक पहुंचाना था। जब दबाव बढ़ा तो जुलाई 2021 में आरोप पत्र उन तक पहुंचाया गया। पत्राचार के दौरान सरकारी रिकार्ड में दर्ज कालीदुर्रई का स्थाई पता भी गलत निकला। इस मामले में तो जैसे-तैसे कार्यवाही शुरू हो गई, पर डेढ़ साल से अनुपस्थित रहने के मामले का अब तक संज्ञान नहीं लिया गया है।

विभाग के अधिकारी कहते हैं कि वे जब लौटेंगे, तब छुट्टियों का हिसाब कर लेंगे। उल्लेखनीय है कि कालीदुर्रई के उद्यानिकी संचालक रहते हुए शीतगृह निर्माण, एक कंपनी द्वारा पालीहाउस निर्माण और स्प्रिंकलर खरीदने के लिए किसानों को दिए गए अनुदान में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई थी। प्रारंभिक जांच में इस गड़बड़ी के लिए कालीदुर्रई को जिम्मेदार ठहराया गया है।

इनका कहना है

अनुदान घोटाला मामले में कालीदुर्रई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है। लगातार अनुपस्थित रहने के मामले में जब वे कार्यस्थल पर उपस्थित होंगे, तब छुट्टियों का हिसाब कर लेंगे।

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