भारत से विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लाखों में है। इनके माता-पिता को डालर में उनका खर्च उठाना पड़ता है। डालर की मुद्रा का अवमूल्यन होने के कारण प्रति परिवार लगभग 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपए प्रति वर्ष ज्यादा खर्चा करने पड़ रहे हैं। जिसके कारण बच्चों की विदेशों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जो परिवार डालर मुद्रा की कीमत बढ़ने से अपने बच्चों को पैसा नहीं भेज पा रहे हैं। उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विदेश में उनके बच्चों की पढ़ाई और रहना खाना-पीना बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए की क़ीमत लगातार गिर रही है। जिसके कारण भारतीय परिवारों को अपने बच्चों को विदेशों की पढ़ाई जारी रख पाने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है, जो बच्चे विदेश में पढ़ाई के लिए गए हैं। उनके लिए अधिकांश माता-पिता ने बैंकों से लोन लिया है। डॉलर मुद्रा की कीमत बढ़ने के साथ ही अब माता-पिता बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। बैंकों ने ब्याज का रेट भी बढ़ा दिया है। जिसके कारण लाखों भारतीय परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं। वहीं विदेशों में उनके बच्चों का भविष्य भी अंधकार में हो रहा है।








































