पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत थानेगांव से कोस्ते को जोडऩे वाला मार्ग आज बदहाल हो गया हैं। यह कच्चा मार्ग वर्तमान में इस कदर जर्जर हो चुका है कि यहां से गुजरना किसी जोखिम भरे सफ र से कम नहीं है। शुरू से लेकर अंत तक अनगिनत छोटे.बड़े गड्ढों और ट्रैक्टर के टायरों से बनी गहरी रैंप ने इस रास्ते को पूरी तरह से छलनी कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि अभी बारिश का मौसम शुरू भी नहीं हुआ है, फि र भी मार्ग की स्थिति इतनी बत्तर है कि दोपहिया वाहन चलाना भी सर्कस दिखाने जैसा हो गया है। बारिश में यह मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है। जिससे पैदल चलना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है। ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया है। लेकिन आज तक धरातल पर कुछ नहीं बदला इस अनदेखी के कारण ग्रामीणों में शासन प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग का शीघ्र निर्माण या कम से कम सुधार कार्य कराया जाए।
बरसात के समय भारी समस्या होती है-विपिन चौहान
ग्रामीण विपिन चौहान ने बताया कि मेरा दूध का व्यापार था शहर जाकर करता था। परंतु पिछली जुलाई में जो रोड़ खराब हुई है उस कारण से हमने दूध बेचने जाना बंद कर दिया है। क्योंकि करीब ५०० मीटर की यह सडक़ है खराब इतनी है कि कभी गिर गए तो दूसरी समस्या लेने के देने पड़ जाएगी। अभी गांव के लोगों को ही हम दूध दे रहे हैं इसमें हमारा २० हजार रूपये का नुकसान है। इस मार्ग पर जो परिवार रहते हैं उनके घर कभी बरसात के समय डिलीवरी या कुछ हुआ तो १०८ अंदर नहीं आ सकती है इस प्रकार मार्ग की स्थिति है।
विद्यार्थी सहित सभी को आने जाने में हो रही परेशानी-प्रकाश बोपचे
प्रकाश बोपचे ने बताया कि यह बायपास मार्ग ४ वर्षों से बहुत ज्यादा खराब है दुर्घटनाएं होती रहती है। पंचायत का इधर कोई ध्यान नहीं है बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कतें होती है। किसान जब खेत में बैलगाडा लेकर जाते हैं तो ऐसा लगता है कि गाड़ी का चक्का फू ट जाएगा। ट्रैक्टर की रैंप बनी हुई है बहुत दिक्कत है हम चाहते हैं कि इस समस्या का जल्द समाधान हो।
यह मार्ग की समस्या कई वर्षो की समस्या है जिसका आज तक समाधान नही हुआ-युगलकिशोर सुलकिया
ग्रामीण युगलकिशोर सुलाकिया ने बताया कि यह सडक़ पूर्व सरपंच लिखनलाल बैस के द्वारा वर्ष २००५-६ में रोजगार गारंटी के तहत बनवाई गई थी जब वह नई योजना थी। यह १ किलोमीटर की सडक़ को दो पार्ट में ५००-५०० मीटर में बनाया गया था उसके बाद से अभी तक एक घमेला मुरुम यहां पर नहीं डाली गई है। आवागमन यहां पर बहुत तेज है ९० प्रतिशत लोगों की खेती इसी मार्ग पर है। बैलगाड़ी ट्रैक्टर आते जाते हैं महिला पुरुष भी यहां से आमाटोला कासपुर के लिए आवागमन होता है। यहाँ गाडियां अनियंत्रित होकर दुर्घटना भी होती है इसे किसी भी मद से बनवाया जाना चाहिए । अभी जो मनरेगा पर अटैक किया गया है कि मनरेगा की सडक़ को ग्रेवल नहीं देंगे तो इसे पुन: चालू करें।







































