देश में कोरोना के मामले 66 लाख के पार, 24 घंटे में आए 61,267 नए मामले

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नई दिल्ली : कोरोना संक्रमण अब भी दुनिया में सबसे तेजी से भारत में ही फैल रहा है. हालांकि अच्छी बात ये है कि नए संक्रमण से ज्यादा ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. देश में पिछले 24 घंटों में 61,267 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए. हालांकि 884 मरीजों की जान भी चली गई.

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 66 लाख 85 हजार हो गई है. इनमें से एक लाख तीन हजार लोगों की मौत हो चुकी है. एक्टिव केस की संख्या घटकर 9 लाख 19 हजार हो गई और कुल 56 लाख 62 हजार लोग ठीक हो चुके हैं. संक्रमण के एक्टिव केस की संख्या की तुलना में स्वस्थ हुए लोगों की संख्या करीब छह गुना ज्यादा है.

ICMR के मुताबिक, 5 अक्टूबर तक कोरोना वायरस के कुल 8,10,71,797 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 10,89,403 सैंपल की टेस्टिंग कल की गई. पॉजिटिविटी रेट करीब सात फीसदी है.

देश में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. महाराष्ट्र लगातार कोरोना की सबसे बुरी मार झेलने वाला राज्य बना हुआ है. यहां अब तक 14 लाख मामले दर्ज हो चुके हैं. महाराष्ट्र में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 10,244 नए मामले सामने आए जिसके बाद राज्य में संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 14,53,653 हो गई. महाराष्ट्र में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 10,244 नए मामले सामने आए जिसके बाद राज्य में संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 14,53,653 हो गई.

महाराष्ट्र बाद आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश हैं. इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं. एक्टिव केस मामले में दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है. कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित देश है. मौत के मामले में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत का नंबर है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा है कि विश्व भर में प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है.

कोविड-19 पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में डॉ माइकल रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि “विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है.” विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि संक्रमण के जितने मामलों की संख्या बताई जा रही है वास्तव में उससे अधिक लोग संक्रमण का शिकार हैं.

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