धारा प्रवाह रामायण पाठ करने वाले फारूख खान का देहावसान

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एक मुस्लिम परिवार में जन्मे फारूख खान ने अपने आप को इस तरह से बदला व ढाला था कि लोग उन्हें फारूख खान के नाम से कम व फारूख रामायणी के नाम से अधिक जानने लगे थे। वह न केवल पांच वक्त के नमाजी थे, बल्कि रामायण पाठ भी धाराप्रवाह करते थे। वह बताते थे कि मैं रामायण पाठ पेशे के लिए नहीं करता, बल्कि लोगों को जो़डने के लिए करता हूं। रविवार को ऐस ही फकीकी मिजाज फारूख रामायणी का 62 वर्ष की उम्र में नरसिंहगढ़ में निधन हो गया।

नरसिंहगढ़ तहसील के गनियारी गांव के फारूख खान पिछले करीब 30-35 साल से अपने मुस्लिम धर्म को मानने व उसका पालन करने के साथ ही हिंदू धर्मग्रंथों का भी खूब अध्ययन करते थे। अध्यनन व लगन इस तरह की थी कि वह बेहतरीन रामायण पाठ करने के लिए पुरस्कृत तक हो चुके थे।

उन्होंने पहली बार रामायण पाठ पचोर में किया था। इसके बाद वह जिले के अलावा गुना जिला, महाराष्ट्र, राजस्थान, हाेशंगाबाद, जबलपुर व विदिशा, सीहोर सहित अधिकांश हिस्सों मेें वह रामायण पाठ कर चुके थे। वे बताते थे कि वह करीब 500 कथाएं कर चुके हैं। उन्हें रामायण के अलावा भागवत महापुराण, वेद उपनिषद, शिवपुराण, गीता, गायत्री पाठ, भगवान देवनारायण की कथा आदि का भी खासा ज्ञान रहा । गत वर्ष जबलपुर में उनके द्वारा वल्र्ड रामायण की थी। जबकि गत वर्ष ही उज्जैन में उन्हें ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित किया गया था।

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