नई तकनीक की एफआरएम-85 एफ मशीन से शोल्डर बलास्ट करने में रेलवे आत्मनिर्भर बनने की ओर उठा रहा सराहनीय कदम। आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाते हुए पश्चिम मध्य रेल भी नई तकनीक की मशीनों का उपयोग कर रहा है। रेल पटरी के गति एवं लोडिंग क्षमता में नए आयाम कायम करने के लिए भारतीय रेल ने अपने ट्रैक को सुदृढ़ बनाया है तथा उसके अनुरक्षण के लिए भी ट्रैकमैन के मेहनत के साथ, उच्च तकनीक के मशीनों का भी इस्तेमाल करके एक आधुनिक ट्रैक को उपलब्ध करा रहा है।
नए जरूरतों को देखते हुए रेलवे द्वारा अत्यधिक आधुनिक मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। इन अत्याधुनिक मशीन के द्वारा रेल ट्रैक के रखरखाव से संबंधित अनेक प्रकार के कार्य सुगमता से सरलता से किए जाते हैं। मशीन के द्वारा कार्य में लागत अत्यधिक कम आती है, और साथ-साथ में रेल ट्रैक की भारी संरचना के कार्य को भी सरल एवं सुरक्षित तरीके से कर देती है जिससे ट्रैक कर्मियों की सुरक्षा भी बनी रहती है। रेल ट्रैक पर अधिक यातायात ट्रेनों की आवर्ती एवं दिनोदिन बढ़ती गति को ध्यान में रखते हुए आज मशीन का महत्व अत्यधिक आवश्यक हो गया। विशेषकर ट्रैक पर तेज गति की यात्री गाड़िया एवं भारी माल वाहक मालगाड़ियां का परिचालन 24 घण्टे होता रहता है। ऐसे व्यस्त समय में मशीन कम समय के ब्लाक में ही मैनुअल कार्य के तुलना में अधिक कार्य एवं विश्वसनीय तथा उच्च गुणवत्तायुक्त और सुरक्षित किया जाता है।
तेजी से होता है काम : एफआरएम-85 एफ मशीन का प्रयोग शोल्डर बलास्ट की छनाई के लिए किया जाता है ताकि रेल पथ से पानी की निकासी को प्रभावी बनाया जा सके। एफआरएम मशीन में दो कटिंग चैन होती है यह चैन टर्फ में चलती है जिसकी चौड़ाई आवश्यकतानुसार 3320 एमएम से 4150 एमएम तक बढ़ाया जा सकता है। प्रत्येक चैन में 43 स्क्रैपर प्लेट होती है। रेल पथ के दोनों ओर की गिट्टी को छनाई के लिए स्क्रीनिंग यूनिट में चैन के माध्यम से ले जाया जाता है। इसमें मिट्टी को छान कर अलग कर दिया जाता है और साफ गिट्टी को पुनः डिस्ट्रीब्यूटर कन्वेयर बेल्ट के द्वारा रेल पथ के दोनों और बिछा दिया जाता है। इस मशीन की प्रोग्रेस 400 मीटर प्रति घंटा है। पमरे में एफआरएम मशीन से इस वर्ष नवंबर माह तक कुल 329 किमी का अनुरक्षण किया गया है।










































