नए कृषि कानून क्यों जरूरी, ऐसे खुलेगा किसानों की तरक्की का रास्ता

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यदि बाजार में गुड़ 350 रुपए किलो बिके तो शायद यह कीमत सुनकर आप चौंक जाएंगे। लेकिन ये सच है और फर्रुखाबाद के एक किसान को अपने द्वारा बनाए गए गुड़ की यह कीमत मिल भी रही है। दरअसल किसान सुंधाशु गंगवार द्वारा बनाया गया गुड़ ही ऐसा है कि एक बार यदि कोई इसे खा लेगा तो अच्छी सी अच्छी मिठाई को भी उसके सामने दरकिनार कर देगा। फर्रुखाबाद में सुधांशु गंगवार और हिमांशु गंगवार दो जुडवां भाई हैं और इस उच्च क्वॉलिटी के गुड़ का उत्पादन करते हैं। इन दोनों क्रिएटिव किसानों से यदि बात की जाए तो दोनों भाईयों का कहना है कि नए किसान कानून ही दरअसल किसान की आजादी का रास्ता खोलते हैं। हायर एजुकेशन प्राप्त कर चुके ये दोनों किसान भाई पढ़ाई के बाद आधुनिक तरीके से खेती करते हैं और साथ ही अपना कारखाना भी संभालते हैं। दोनों भाई रासायनिक खाद और कीटनाशक इस्तेमाल न करते हुए जैविक विधि से खेतों में तैयार गन्ने से गुड़ बनाते हैं। इसके अलग-अलग फ्लेवर हैं।

नए किसान कानून के इसलिए समर्थक है सुधांशु

सुधांशु कहते हैं कि कृषि बिल लागू होने से किसान अब अपना उत्पाद कहीं भी बेचने के लिए आजादा हैं। पहले उन्हें कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता था। मंडी से रसीद कटवानी पड़ती थी, नहीं तो मंडी शुल्क के नाम पर प्रताड़ित किया जाता था। मंडियों में व्यापारी सिंडीकेट बनाकर काम करते थे और किसान को कम दाम देते थे।

अभी रबी में गेहूं, आलू और खरीफ में धान व मक्का जैसी फसलों पर ही बातें होती हैं, इसलिए किसानों को भी अपनी खेती में विविधता लानी होगी। कांट्रैक्ट फार्मिंग से बड़ी कंपनियों के जरिए किसानों को नई तकनीक और नई सोच मिलेगी। कांट्रैक्ट फॉर्मिंग सह-फसली खेती करने पर लाभ मिल सकता है। कृषि बिल लाकर सरकार ने किसानों की समस्या समझी है।

दोनों भाईयों ने क्रिएटिव खेती की तो लाभ भी कमाया

150 रुपये प्रतिकिलो बिकता है सादा गुड़

-190 रुपये प्रतिकिलो में सोंठ युक्त गुड़ की बिक्री।

-250 रुपये प्रति किलोग्राम में तिल और अलसी वाला गुड़।

– 350 रुपये में एक किलो अखरोट-बादाम मिला गुड़।

– 500-500 ग्राम की आकर्षक पैकिंग में चॉकलेट और केक की तरह दिखता है अखरोट-बादाम मिला गुड़

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