नक्सलियों का खौफ, टेंडर लेने से डर रहे ठेकेदार

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आज भी नक्सलियों का खौफ बरकरार है जिसके डर से कोई भी ठेकेदार निर्माण कार्यों का ठेका लेने को तैयार नहीं है क्षेत्रों में शासन-प्रशासन द्वारा जहां एक ओर सड़क पुलिया आदि निर्माण के लिए टेंडर पर टेंडर जारी किए जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर कोई भी ठेकेदार इस निर्माण कार्य को पूरा करनेेेे के लिए टेंडर नही ले रहा है जिसके पीछे असली वजह नक्सलियों का खौफ होना बताया जा रहा है।ताजा मामला अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र राशिमेटा का है जहां से पुल पुलिया निर्माण के लिए कोई भी ठेकेदार टेंडर लेने को तैयार नहीं है जिसके चलते क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मुख्यधारा से जुडऩे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । आपको बताएं कि अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के गांव को जोडने के आशय से सडक और पुलियों का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। जिससे अंधिकाश गांव का सम्पर्क एक दूसरे गांव से जुड रहा है। किंतु कुछ क्षेत्र ऐसे है जहां माओवादी नक्सलियों की धमकी की वजह से काम अधूरे पडे हुए है। जिनमें दक्षिण बैहर के बिरसा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दुल्हापुर के राशिमेटा से झकोरदा मार्ग शामिल है।
फरवरी 2013 में नक्सलियों ने किया था ठेकेदार को अगवा, मशीनरी में लगाई थी आग
नक्सली खौफ के चलते ही ठेकेदार इस मार्ग में निर्माण कार्यों का टेंडर नहीं ले रहे हैं आपको बताएं की वर्ष 2012-13 में आईएपी योजना से अडोरी से राशिमेटा और राशिमेटा से झकोरदा करीब 12 किलोमीटर के पैकेज का कार्य प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना से करवाया जा रहा है। जिसमें काफी मशक्कत के बाद अडोरी से मुरूम बटरंगा, दुल्हापुर और राशिमेटा तक सडक और पुल पुलियों का कार्य पूर्ण हुआ। इसी पैकेज के तहत राशिमेटा से झकोरदा दुरी लगभग 6 किलोमीटर का कार्य एम.एस पुगलिया कॉन्ट्रेक्शन कंपनी नागपुर के द्वारा करवाया जा रहा था। जिसमें अधिकांश पुलियों के स्ट्रक्चर का कार्य हो चुका है और कुछ अधूरे है। नक्सल दृष्टि से जिला का अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। कार्य के दौरान नक्सलियों के द्वारा ठेकेदार को धमकी भी दी गई थी, किंतु धमकी के बावजूद भी कार्य प्रारंभ था। तत्पश्चात फरवरी 2013 में निर्माण कार्य करवा रहे ठेकेदार को अगवा कर नक्सलियों ने उसके वाहन और निर्माण कार्य में लगी मशीनो को जला दिया था। तत्पश्चात ठेकेदार ने काम बंद कर दिया और उसी दिनांक से अब तक ंउस मार्ग का कार्य अधूरा पडा हुआ है। नतीजा यह मिल रहा है कि जितना कार्य उक्त ठेकेदार के द्वारा करवाया गया था वो स्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हो रहा है।
आईएपी योजना बंद, राशि भी हो गई लैप्स
विभागीय सुत्रो के अनुसार घटना के दो साल बाद पुन: निर्माण कार्य को लेकर विभाग के द्वारा निविदा आंमत्रित की गई थी किंतु नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से और उनकी दहशत के कारण कोई भी ठेकेदार काम करने को सामने नही आ रहा है। जिसकी वजह से वर्तमान में भारत सरकार की आईएपी योजना बंद होने से उक्त राशि भी लेप्स हो गई है। राशिमेटा से झकोरदा सडक का कार्य पूर्ण होने से दुल्हापुर, मुरूम, राशिमेटा आदि गांव के लोगो का सडक सम्पर्क डाबरी से करीब होगा। ग्रामीणो की मांग है कि उक्त अधूरी पडी और पुलियों का कार्य करवाया जाये, जिससे कि अतिदुर्गम और नक्सल प्रभावित गांव का उद्धार हो सकें। उल्लेखनीय है कि राशिमेटा से झकोरदा सडक की लागत करीब 3 करोड रूपयें है जिनमें अधिंकाश पुलियों का कार्य पूर्ण हो चुका है। उक्त सडक और पुल पुलियों का कार्य पूर्ण होने से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की पकड धीमी होगी। जबकि वर्तमान में राशिमेटा नक्सलियों का एक गढ बना हुआ है।
विभाग द्वारा काम कराया जाएगा तो गांव के लोग सहयोग करेंगे- ग्रामीण पंचू
इस पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान स्थानीय ग्रामीण पंचू पुष्पम ने बताया कि राशिमेटा से झकोरदा सडक का कार्य पूर्ण होने से उनके गांव वालो को आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी और विकास से भी जुडेगा। विभाग के द्वारा यदि कार्य करवाया जाता है तो गांव के लोग सहयोग करेंगेंं।
हमारा प्रयास जारी है,पुन: निविदा निकाली जाएगी- कलेक्टर दीपक आर्य
वहीं इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान कलेक्टर दीपक आर्य ने बताया कि आईएपी योंजना की राशि थी, जो लेप्स हो चुकी है। पूर्व में दो बार निविदा आमंत्रित की गई थी, किंतु किसी ठेकेदार ने निविदा नही भरी। हमारा प्रयास जारी है कि नवीन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद पुन: निविदा निकाली जायेगी।

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