सोमवार को नगर परिषद कटंगी अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण हुई. भाजपा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार योगेन्द्र उर्फ बड्डु ठाकुर को कुल 15 मतों में 10 मत मिले वहीं कांग्रेस उम्मीदवार संजय चौकसे को मात्र 05 वोट ही मिल पाए. 15 वार्डो वाली नगर परिषद कटंगी में कांग्रेस समर्थित 07 पार्षदों ने जीत हासिल की थी जबकि भाजपा ने 06 और 02 निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली थी. इसके बावजूद भाजपा 10 मत लेकर अपनी पार्टी का अध्यक्ष बनाने में पूर्ण रुप से सफल हुई. भाजपा उम्मीदवार की जीत के बाद आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व सांसद के.डी.देशमुख, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन, सुरजीतसिंह ठाकुर ने योगेन्द्र ठाकुर को पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया. नगर परिषद के उपाध्यक्ष पद निर्दलीय भाजपा समर्थित पार्षद धर्मकला कामराज देशमुख ने जीत दर्ज की. परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जीत का जमकर जश्न मनाया और आतिशबाजी की. भाजपा की इस जीत के पीछे कांग्रेस पार्टी के पार्षदों की भी बड़ी भूमिका रही. भाजपा को जीत दिलाने के पीछे मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन, पूर्व सांसद के.डी.देशमुख की रणनीति काम आई। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के अधिक पार्षदों के जीतने के बाद भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. इसके पीछे का मुख्य कारण कांग्रेस पार्टी के द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की टीम द्वारा लिया गया वह निर्णय है. जिसमें अध्यक्ष पद का दावेदार संजय चौकसे को बनाया गया. जनचर्चा है कि संजय चौकसे को पार्टी के पार्षद ही अपना नेता मानने का तैयार नहीं थे. मगर, नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राटसिंह सरस्वार ने जिला पंचायत चुनाव के दौरान प्रशांत मेश्राम को एक वोट के बदले संजय चौकसे को नगर परिषद अध्यक्ष दावेदार बनाए जाने का वादा करवा लिया था और कांग्रेस के पर्यवेक्षकों को इस वादे के आगे झुकना पड़ा और आज हार का सामना करना पड़ा. चर्चा यह भी है कि कांग्रेस की पयवेक्षकों की टीम में शामिल क्षेत्रीय विधायक टामलाल सहारे, सुशील पालीवाल, अशोक सिंह सरस्वार, शैलेन्द्र चौकसे कांग्रेस पार्टी से संजय चौकसे को दावेदार बनाने के पक्ष में नहीं थे. जिस कारण पूरे चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अधिकांश नेताओं का उन्हें सहयोग नहीं मिला. संजय चौकसे को उन बाहरी लोगों से सहयोग मिल रहा था जिनका कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना ही नहीं था. यहीं वजह रही कि कांग्रेस अपना घर तक नहीं संभाल पाई जिस पार्टी को निर्दलीय कांग्रेस समर्थित पार्षद को जोडक़र अपनी संख्या 08 कर नगर में अपनी सरकार बना लेनी थी. उस कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को पार्टी के भी 02 मत नहीं मिल सकें और 05 वोट लेकर हार का सामना करना पड़ा। नगर परिषद कटंगी में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत के बाद कांग्रेस के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपनी ही पार्टी के पार्षदों और पदाधिकारियों की जमकर खिल्लियां उठा रहे है. कांग्रेस के पार्षदों को फुल छाप कांग्रेसी कहा जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ प्रशांत मेश्राम भी निशाने पर है. कांग्रेस की हार का ठीकरा उनके माथे भी फोड़ा जा रहा है. कांग्रेस पार्टी के कुछ स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी के वरिष्ट नेता आज प्रशांत मेश्राम जैसे बाहरी व्यक्ति के दबाव में आकर गलत निर्णय ले चुकी है जिसका खामियाजा आज नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ा है. ध्यान रहें कि नगर परिषद कटंगी के 07 वार्डों में जिन पार्षदों ने जीत हासिल की थी. वह जीत कांग्रेस की नहीं बल्कि प्रत्याशियों की जीत थी और आज अध्यक्ष पद कांग्रेस की हार प्रत्याशी की नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी की हार है. ठीक इसके विपरीत नगर में जीतकर आए भाजपा के सभी 06 पार्षदों की जीत भाजपा की जीत थी आज की जीत भी भाजपा पार्टी और इसके उन तमाम नेताओं की जीत है जो पार्टी का अध्यक्ष बनाने के लिए दिन-रात जुटे हुए थे।










































