बालाघाट / लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतम सिह मरकाम की अदालत ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। विद्वान अदालत ने लांजी थाना क्षेत्र के आरोपी लक्ष्मीकांत उर्फ निकेश उमरे पिता ओमकारलाल लोधी 22 वर्ष को 20 वर्ष का सश्रम कारावास के अलावा 7 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किये।
अभियोजन के अनुसार, 16 मार्च 2024 को फरियादी ने थाना लांजी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी छोटी लड़की जिसकी उम्र13 वर्ष है वह परिवार के साथ पूजा कार्यक्रम में पड़ोसी के घर गई थी। 4 बजे परिवार के लोग घर वापस आ गये थे। लेकिन उसकी लड़की शाम तक वापस नहीं लौटी। तब पड़ोसी के घर जाकर देखे, लड़की वहा पर भी नही थी। परिजनों द्वारा खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। जांच के दौरान 23 फरवरी 2025 को नाबालिग पीड़िता को ग्राम कारंजा चौक से दस्तयाब किया गया। पीड़िता ने अपने कथनों में बताया कि आरोपी लक्ष्मीकांत उर्फ निकेश ने उसे बहला-फुसलाकर और जबरन भगा कर अपने साथ पूना ले गया और उसके साथ शादी करना बताया था। प्रकरण में धारा 366क 376, 376(2)(n), 376(3) भादवि एवं 5(L)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज निकेश उर्फ लक्ष्मीकांत को इस अपराध में गिरफ्तार किया गया। विवेचना उपरांत विद्वान अदालत में चालान प्रस्तुत किया गया था। हाल ही में यह मामला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतमसिह मरकाम की अदालत में चला।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर विद्वान अदालत ने आरोपी लक्ष्मीकांत उर्फ निकेश उमरे को दोषी करार देते हुये उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास, भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 7हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किये।इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती आरती कापले ने पैरवी की। यह कार्रवाई सहायक संचालक (अभियोजन) कपिल कुमार डहेरिया के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।










































