नारवांजपार में अभी भी बनी हुई है बाघ की आमद

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जनपद पंचायत अंर्तगत आने वाली नरोड़ी पंचायत के नारवांजपार में जंगली सूअर का शिकार करने के बाद भी बाघ की आमद इस ग्राम में बकायदा बनी हुई है। यह बात हम नहीं ग्रामवासी कह रहे है। जिन्होने २६ व २७ दिसंबर को पुन: बाघ को देखा है जिसकी सूचना भी उनके द्वारा वन विभाग को दी गई है। यहां यह बताना लाजमी है की बाघ ने बीते ३ दिवस पूर्व ही जंगली सूअर का शिकार किया था। यह घटना नारवांजपार  से सटे हुये जंगल की थी। इस घटना के बाद से ही ग्रामवासी काफी डरे सहमे है और शाम होते ही अपने अपने घरों में दुबक जाते है।

ग्राम में बाघ की उपस्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल व्याप्त है। उनके द्वारा लगातार बीते 2 दिनों से बाघ को ग्राम के पास लगे जंगल में देखने की बात कही जा रही है। जिसके कारण किसान खेती कार्य से परहेज करते नजर आ रहे हैं और अति आवश्यक खेती कार्य होने पर भी वहां 4 या 10 लोगों का झुंड बनाकर खेतों में जा रहे हैं और शाम होने से पहले घर आ जाते हैं। वही मवेशी चराने वाले भी समय से पहले घर आ जाते हैं और ग्राम में शाम से ही लोग घरों का दरवाजा लगा लेते हैं। इस प्रकार से नारवांजपार करियाटोला एवं अब्दुलटोला के ग्रामवासी अधिक दहशत में जीवन यापन कर रहे हैं।

लगातार बाघ की चहल कदमी – चन्द्रविजय

इस मामलें में पद्मेश को जानकारी देते हुये पूर्व सरपंच चंद्रविजय ठाकुर ने बताया की उनके ग्राम में बाघ लगातार चहलकदमी कर रहा है। जिसकी वजह से ग्रामवासी काफी डरे हुये है। हालांकि वन विभाग गस्ती करने जरूर आता है। मगर बाघ को पकडऩे के लिये फिलहाल कोई प्रयास नही किया जा रहा है। ग्रामीण काफी दहशत में अपनी राते काट रहे है। जिस मार्ग पर सूअर का शिकार हुआ था वहां इधर के ग्राम वासियों को सीधे रामपायली जाने के लिए सुविधा युक्त मार्ग है।

दिनभर के कार्य हो रहे प्रभावित – दीनदयाल

वही ग्रामीण दीनदयाल पढ़वार ने पद्मेश को बताया की बाघ की हलचल की वजह से हमारे दिनभर के कार्य प्रभावित हो रहे है। हॉल ही में बाघ ने प्रात:९ बजे के करीब एक जंगली सूअर का शिकार किया था। जिसका गारा करने के बाद वो इसी ग्राम में घूम रहा है। जिसकी वजह से हम लोगों में दहशत व्याप्त है।

वन्य ग्राम में शामिल है नारवांजपार – जाफर

इसी तरह जाफर अली ने पद्मेश को बताया की उनका ग्राम वन्य ग्राम में शामिल है। जहां जंगली सूअर व हिरण की तादाद काफी मात्रा में है। अब शेर भी हमारे ग्राम में आ गया है। जो बकायदा ग्राम के आसपास ही विचरण कर रहा है। ऐसे में वन विभाग को उसे पकड़कर अन्यत्र स्थान पर भेजना चाहिये।

मवेशी चराने व खेती कार्य में जाने पर लगता है डर – मुन्नालाल

मवेशी चराने वाले मुन्नालाल बघेले ने पद्मेश को बताया की वो छोटा मोटा किसान है। साथ ही मवेशी चराकर भी अपना पेट पालता है मगर बाघ की दहशत की वजह से वो लोग अब जंगल की तरफ नही जाते साथ ही गहानी कार्य भी बंद कर दिया है। जब तक ग्राम में बाघ रहेगा तब तक हम लोग किसी प्रकार का कोई कार्य नही कर सकते क्योंकि हम में डर व्याप्त है।

दूरभाष पर पद्मेश से चर्चा में परियोजना परीक्षेत्र अधिकारी शिवभान नागेश्वर ने बताया कि जंगली सूअर के शिकार के बाद से लगातार सघन गश्त क्षेत्र में की जा रही है और पटाखे फोड़ कर ग्राम से बाघ को दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। जिसकी सूचना पूर्व में उच्च अधिकारियों को दी गई थी जिनके द्वारा पेंच और कान्हा रिजर्व फॉरेस्ट को वन्य प्राणी बाघ का रेस्क्यू करने के लिए पत्राचार किया गया है।

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