निजीकरण का विरोध कर मनाया भारत बचाओ दिवस

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बालाघाट(पद्मेश न्यूज़)। सरकार की श्रमिक विरोधी नीति ,निजी करण और बेरोजगारी की प्रमुख समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय संगठन के आव्हान पर बुधवार को सीटू संगठन के द्वारा सांकेतिक हड़ताल कर विरोध जताया गया नगर के बस स्टैंड में सीटू संगठन के पदाधिकारी ने एकजुटता के साथ भारत बचाओ दिवस मनाया और अपनी आवाज बुलंद की वही अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति को लिखित ज्ञापन प्रेषित किया।
बस स्टैंड में संगठन पदाधिकारियों ने नारेबाजी कर जताया विरोध
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन के जिला समिति के पदाधिकारियों ने बस स्टैंड में एकत्रित होकर सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए निजी करण और श्रम विरोधी कानून को लेकर अपनी आवाज बुलंद की इस संदर्भ में संगठन के जिला अध्यक्ष वाय आर बिसेन ने बताया कि वर्तमान में सरकार के द्वारा श्रम कानून में बदलाव किया जा रहा है निजी करण कर काफी सरकारी सेक्टर को बेचने की तैयारी की जा रही है वहीं बेरोजगारी काफी हद तक बढ़ी है जिसके विरोध में आज राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल कर सरकार को चेताने का प्रयास किया गया उन्होंने बताया कि उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों के अखिल भारतीय संघर्ष के बैनर तले भारत बचाओ दिवस आज मनाया गया है उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा निजीकरण को बढ़ावा देते हुए हवाई अड्डे विभिन्न दूरसंचार कंपनियां रेलवे से संबंधित तमाम प्रक्रिया को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास किया जा रहा है और इस तरह देश को खोखला किया जा रहा है जिसके विरोध में हम खड़े हुए हैं उन्होंने कहा कि अभी वर्तमान में कोरोना संकट की आड़ में कारपोरेट की मांग पर उनके मुनाफे की वृद्धि के लिए श्रम कानूनों में श्रम विरोधी संशोधन कर श्रमिकों के अधिकारों का हनन किया गया है वही लॉकडाउन के दौरान भी श्रमिकों और मजदूरों को केवल सब्जबाग दिखाए गए हैं जबकि उनके हिस्से में केवल भुखमरी और बेरोजगारी ही हाथ आई है वही इस संदर्भ में ग्राम प्रधान शांतिलाल नागपुरे ने कहा कि आज किसान दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर है किसान फसलों के लिए जो लागत लगाता है वह लागत उसे नहीं मिल पाती फसलों को लगाने में यदि ढाई हजार रुपए लागत आती है तो उसे सरकार की और से समर्थन मूल्य 18 सौ रुपए मिल रहा है वहीं अगर फसल बर्बाद हो जाए तो सरकार के द्वारा मुआवजा को लेकर किए गए सर्वे के मापदंड अलग ही तरह के हैं जितनी लागत किसान लगाता है उसे मुआवजे के तौर पर उतनी लागत नहीं मिल पाती वहीं अगर फसलों में इल्ली लग जाती है तो यह मापदंड है कि पूरे क्षेत्र में फसल क्षति होनी चाहिए तभी मुआवजा बनेगा किसानों की धान की फसल 1200 रुपए में बिक रही है और माफिया फायदा ले रहे हैं इस और सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है यदि धान पकने के पहले सरकार किसानों को एडवांस राशि देनी चाहिए।
संगठन की यह है प्रमुख मांगे

संगठन के द्वारा विभिन्न अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के समक्ष मांगे पेश की गई है जिनमें श्रम कानूनों के तहत श्रम विरोधी संशोधन को तुरंत वापस लिया जाए कार्य दिवस को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे ना किया जाए श्रम कानूनों के उल्लंघन के लिए कड़े दंडात्मक उपाय किए जाएं जरूरतमंदों को 6 महीने तक प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया जाए मनरेगा में साल में 200 दिन का काम ?600 प्रतिदिन की दर से किया जाए बेरोजगारी भत्ता दिया जाए शहरी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए रोजगार सृजन के ठोस उपायों के माध्यम से बेरोजगारी को खत्म किया जाए सभी के लिए निशुल्क सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए सार्वजनिक उपक्रमों और सेवाओं का निजी करण ना हो बैंक बीमा रेलवे रक्षा कोयला इस्पात पेट्रोलियम आदि सहित केंद्रीय और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजी कारण रोका जाए कोयला खदानों की नीलामी का फैसला वापस लिया जाए विद्युत बिल वापस लिया जाए श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवर दिया जाए बोनस भविष्य निधि की पात्रता और भुगतान पर सभी सीमा को हटाते हुए ग्रेजुएटी की मात्रा में वृद्धि किया जाए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों को दिए और पेंशनरों का डीआर पर जो रोक लगाई गई है उसे वापस लिया जाए सहित अन्य मांगे हैं।

संगठन के द्वारा विभिन्न अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के समक्ष मांगे पेश की गई है जिनमें श्रम कानूनों के तहत श्रम विरोधी संशोधन को तुरंत वापस लिया जाए कार्य दिवस को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे ना किया जाए श्रम कानूनों के उल्लंघन के लिए कड़े दंडात्मक उपाय किए जाएं जरूरतमंदों को 6 महीने तक प्रतिमाह प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया जाए मनरेगा में साल में 200 दिन का काम ?600 प्रतिदिन की दर से किया जाए बेरोजगारी भत्ता दिया जाए शहरी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए रोजगार सृजन के ठोस उपायों के माध्यम से बेरोजगारी को खत्म किया जाए सभी के लिए निशुल्क सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए सार्वजनिक उपक्रमों और सेवाओं का निजी करण ना हो बैंक बीमा रेलवे रक्षा कोयला इस्पात पेट्रोलियम आदि सहित केंद्रीय और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजी कारण रोका जाए कोयला खदानों की नीलामी का फैसला वापस लिया जाए विद्युत बिल वापस लिया जाए श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवर दिया जाए बोनस भविष्य निधि की पात्रता और भुगतान पर सभी सीमा को हटाते हुए ग्रेजुएटी की मात्रा में वृद्धि किया जाए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों को दिए और पेंशनरों का डीआर पर जो रोक लगाई गई है उसे वापस लिया जाए सहित अन्य मांगे हैं।

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