निजीकरण के विरोध मे΄ उतरे विद्युत अधिकारी कर्मचारी

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा देश के तमाम विद्युत मंडल और उन विद्युत मंडल के अंतर्गत आने वाले विद्युत वितरण केंद्रों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया गया है जिसका विरोध विद्युत मंडल से जुड़े कर्मचारियों अधिकारियों और संविदा कर्मचारियों द्वारा पूरे देश में शुरू कर दिया गया है। जिसका असर सोमवार को बालाघाट में भी देखने को मिला जहां विद्युत मंडल से जुड़े समस्त संगठनों ने एक नया संगठन बनाकर निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की साथ ही उन्होंने विद्युत मंडल का निजीकरण न किए जाने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उन्होंने निजी करण से होने वाले नुकसान की जानकारी देते हुए विद्युत मंडल का निजीकरण किए जाने पर सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है मध्य प्रदेश विद्युत निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में कलेक्टर कार्यालय में सौपे गए इस ज्ञापन के दौरान कार्यपालन अभियंता लक्ष्मण सिंह ,पी के गेडाम, राजेश धुर्वे, श्रीमती गायत्री गेडाम,राजीव रंजन, चंद्रहास चंद्राकर, प्रांतीय सचिव आईडी पटले, सचिव सुभाष खरे, आर एस ठाकरे, उपाध्यक्ष वायके देशमुख, सचिव वंदना पवार, सदस्य श्रीमती पंचशीला खोबरागडे, सीएल बोरकर, अध्यक्ष आर एस सिंह और सहारूलाल मेश्राम सहित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल यूनाइटेड फोरम, मध्य प्रदेश विद्युत मंडल फेडरेशन ,संविदा, आउटसोर्स कर्मचारियों के संगठन सहित विद्युत मंडल के विभिन्न संगठनो के पदाधिकारी व सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
निजीकरण पूरी तरह से फेल है -लक्ष्मण सिंह

इस मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान कार्यपालन यंत्री लक्ष्मण सिंह ने बताया कि पहले भी मध्य प्रदेश के 3 जिलों सागर ,उज्जैन और ग्वालियर में विद्युतीकरण का निजीकरण किया गया था जो सक्सेस नहीं हो पाया वही देश में सबसे पहले उड़ीसा में निजी करण की शुरुआत की गई थी वह भी निजीकरण पूरी तरीके से फेल रहा बावजूद इसके भी केंद्र सरकार द्वारा विद्युत व्यवस्था का निजी करण कर रही है जो कि गलत है।
तो सड़क पर उतरकर करेंगे उग्र आंदोलन -आईडी पटले

वही मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश विद्युत मंडल फेडरेशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष आईडी पटले ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश के सभी विद्युत मंडल और उनके वितरण केंद्रों को निजी हाथों में देने का फैसला लिया है जिसे रोकने के लिए विद्युत मंडल से संबंधित सभी संगठनों को मिलाकर मध्य प्रदेश विद्युत निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया है जिसमें सभी संगठनों के अधिकारी, कर्मचारी, फोरम, सदस्य, संविदा कर्मचारी और आउटसोर्स के कर्मचारी मिलकर निजीकरण का विरोध कर रहे हैं विद्युत व्यवस्था का निजीकरण करने से देश का बहुत ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि निजीकरण करने से विद्युत की यह व्यवस्था सरकार के हाथों में नहीं रहेगी जिस तरह सरकार आज चाह कर भी मध्यप्रदेश में बस नहीं चला पा रही है वैसी ही स्थिति निजी करण होने पर विद्युत व्यवस्था की भी हो जाएगी लोगों को विद्युत व्यवस्था ठीक से नहीं मिलेगी उन्होंने आगे बताया कि विद्युत मंडल को बनाने में कई अधिकारी कर्मचारी शहीद हुए हैं बावजूद इसके भी केंद्र सरकार इस व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने का कार्य कर रही है वही जो लोग इस व्यवस्था को बनाने में लगे हैं उनकी सेवा शर्तें क्या होगी, सेवानिवृत्ति कर्मचारियों को कौन देगा, कैसे होगा इसकी कोई रूपरेखा नहीं बनाई गई है और ना ही इसको लेकर कोई दिशानिर्देश जारी किए गए हैं जिसके कारण समस्त अधिकारी कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं यदि सरकार हमारी मांग पूरी नहीं करती और विद्युतीकरण का निजीकरण कर दिया जाता है तो फिर हम सड़कों पर उतर कर उग्र आंदोलन करेंगे।

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