पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए बालाघाट जिले के वारासिवनी क्षेत्र निवासी प्रसन्नजीत रंगारी की घर वापसी की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। लंबे समय बाद आज़ादी की सांस ले चुके प्रसन्नजीत को उनके घर लाने की दिशा में जिला प्रशासन और परिजनों द्वारा बराबर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रसन्नजीत को लेने के लिए उनके परिजन एवं बालाघाट जिला प्रशासन का एक दल 3 फरवरी की शाम लगभग 4 बजे कटंगी से अमृतसर के लिए रवाना हुआ था। अमृतसर पहुंचने के बाद दल ने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर प्रसन्नजीत को सुरक्षित रूप से रिसीव कर लिया है। सूत्रों की मानें तो सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रसन्नजीत के 7 फरवरी तक अपने गृह नगर वारासिवनी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। प्रसन्नजीत की रिहाई और घर लौटने की खबर से उनके परिवारजनों सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
31 जनवरी को पाकिस्तान की जेल से रिहा किए गए सात भारतीय नागरिकों में शामिल बालाघाट जिले के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी अब अपने घर लौटने वाले हैं। वर्षों के इंतजार, संघर्ष और पीड़ा के बाद वह क्षण अब बेहद करीब है, जब प्रसन्नजीत अपने परिवार से दोबारा मिल पाएंगे। प्रसन्नजीत की रिहाई के पीछे उनकी बहन संघमित्रा का अथक संघर्ष रहा। संघमित्रा ने अपने भाई की रिहाई के लिए जिला प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार तक लगातार आवेदन, निवेदन और प्रयास किए। आखिरकार 31 जनवरी को पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कैदियों की रिहाई के तहत प्रसन्नजीत को भी आज़ादी मिली। प्रारंभ में प्रसन्नजीत को ट्रेन के माध्यम से बालाघाट लाने की योजना थी, लेकिन रिजर्वेशन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद बालाघाट कलेक्टर श्री मीना के निर्देशन में प्रसन्नजीत को सुरक्षित रूप से घर लाने के लिए एक शासकीय वाहन की व्यवस्था की गई। इस वाहन में महकेपार पुलिस चौकी का एक पुलिसकर्मी , ग्राम मोहगांव का रोजगार सहायक, महकेपार का रोजगार सहायक तथा प्रसन्नजीत के जीजा राजेश खोबरागड़े शामिल थे। प्रशासनिक दल 3 फरवरी को शाम 4 बजे अमृतसर के लिए रवाना हुआ और 4 फरवरी की रात लगभग 9:30 बजे अमृतसर पहुंचा। आवश्यक औपचारिकताओं और लगभग एक घंटे की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक दल एवं परिजनों ने प्रसन्नजीत को सुरक्षित रूप से रिसीव किया। अमृतसर की स्थानीय पुलिस ने 4 फरवरी को उनके रुकने की संपूर्ण व्यवस्था की। 5 फरवरी को प्रसन्नजीत प्रशासनिक दल और परिजनों के साथ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और गुरुद्वारे पहुंचे, जहां उन्होंने माथा टेका और गुरुद्वारे में लंगर प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद 5 फरवरी की दोपहर सभी लोग प्रसन्नजीत के साथ बालाघाट के लिए रवाना हो गए। इस दौरान प्रसन्नजीत ने अपनी मां लक्ष्मीबाई से दूरभाष पर बात की और कहा, मैं ठीक हूं, घर आ रहा हूं, मां का ख्याल रखना। यह बातचीत सुनकर परिजन भावुक हो उठे। समाचार लिखे जाने तक प्रशासनिक दल प्रसन्नजीत को लेकर दिल्ली तक पहुंच चुका था। संभावना जताई जा रही है कि 7 फरवरी को प्रसन्नजीत अपने गृह ग्राम खैरलांजी पहुंच जाएंगे।
मां आज भी नहीं मानती कि बेटा पाकिस्तान की जेल में रहा
प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा बताती हैं कि उनकी मां लक्ष्मीबाई आज भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि उनका बेटा भूलवश और मानसिक स्थिति खराब होने के कारण पाकिस्तान पहुंच गया था और वहां जेल में रहा। लक्ष्मीबाई का आज भी यही विश्वास है कि उनका बेटा जबलपुर में पढ़ाई कर रहा है। कई बार लक्ष्मीबाई अपनी बेटी से कहती हैं कि उन्हें जबलपुर ले चलो, क्योंकि उनका बेटा वहीं पढ़ता है और वह उससे मिलना चाहती हैं। संघमित्रा का कहना है कि मां की पूरी दुनिया आज भी प्रसन्नजीत के इर्द-गिर्द ही घूमती है। उन्हें लगता है कि मां आज भी बेटे से उतना ही नहीं, बल्कि उससे भी अधिक प्यार करती हैं।









































