पाक में एक मंच पर 11 विपक्षी पार्टियां, क्या आउट होगी इमरान सरकार?

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इस्लामाबाद : इमरान खान पाकिस्तान की तबाही और बर्बादी वाले दलदल में गले तक डूबे हुए हैं. जनता नाराज है. आगे के रास्ते पर विपक्ष के अंगारे हैं. कोई इमरान को नालायक वजीर-ए-आजम कह रहा है तो कोई उन्हें डरपोक इंसान बता रहा है जो हर बात पर आर्मी की वर्दी के पीछे छिप जाता है.

पाकिस्तान की 11 पार्टियों ने एक मंच पर आकर इमरान खान के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है. दो दिन के अंदर गुजरांवाला और कराची में बड़ी रैलियां की गईं. इन रैलियों में हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई, लेकिन पाकिस्तान के नेताओं की आपसी तू-तू मैं-मैं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र में आ गए.

दरअसल, लंदन में रह रहे नवाज शरीफ ने इस रैली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर पाकिस्तानी के आर्मी चीफ जनरल बाजवा पर बड़ा हमला कर दिया था. अब इस हमले से पाकिस्तानी सेना के ब्लू आईड ब्वॉय इमरान खान बौखला गए और नवाज शरीफ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा बोलने का आरोप लगा दिया. यानी नवाज शरीफ ने आर्मी चीफ की जो आलोचना की, उसकी भाषा और लहजा वैसा ही था जैसे पीएम मोदी का तब होता है- जब वो पाकिस्तान को आईना दिखाते हैं.

पाकिस्तान का सियासी मौसम एकदम तूफानी है. सड़कों पर उमड़े जनसैलाब की तस्वीरों ने यकीनन इमरान खान की रातों की नींद उड़ा दी है. भीड़ नारा लगा रही थी. कभी आटा चोर कह रही थी, कभी चीनी चोर, कभी बेरोजगारी तो कभी पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली पर इमरान खान को कोस रही थी. माहौल में पाकिस्तानी विपक्ष के अंगारे थे. विपक्ष की रैली का मुख्य आकर्षण थीं पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज. इस रैली में मरियम नवाज ने इमरान खान पर एक के बाद एक वार किए..

कराची की रैली में कश्मीर का ज़िक्र न आए, ऐसा कैसे हो सकता है. मरियम नवाज़ ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्ज़ती को इमरान खान का कारनामा बताया. सेना हो, विपक्ष हो या सरकार, पाकिस्तान में कश्मीर के फ्यूल से ही सियासत की गाड़ी आगे चलती है.

अब इस सियासी तूफान के केंद्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ गए हैं. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज़ शरीफ की बेटी मरियम नवाज़, एक दूसरे पर पीएम मोदी का करीबी होने का आरोप लगा रहे हैं और इस बहाने खुद को पाकिस्तान का सबसे बड़ा देशभक्त साबित करने पर तुले हैं. नवाज शरीफ ने इमरान खान पर सेना की कठपुतली होने का आरोप लगाया था. अब इमरान खान उन्हें आईना दिखा रहे हैं. मजेदार ये है कि दोनों ये साबित करने में लगे हैं कि कौन पाकिस्तानी सेना का कितना बड़ा मुरीद रहा है, किसने किसकी खुशामद की है.

इमरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने के मनसूबे लिए पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां एक मंच पर हैं. 11 पार्टियों की विपक्षी टीम मिलकर खेल रही है. पहले 16 अक्टूबर को गुजरांवाला और 18 अक्टूबर कराची के जिन्ना-बाग़ में रैली हुई, लेकिन विपक्ष का मन अभी नहीं भरा है. ऐसी 4 और रैलियां अभी होनी हैं.

राजनीति में आने से पहले इमरान खान 11 खिलाड़ियों वाली पाकिस्तानी टीम के अगुवा हुआ करते थे. लेकिन राजनीति की घुमावदार पिच पर उनका मुकाबला ग्यारह विपक्षी पार्टियों से है. जानना दिलचस्प होगा कि इमरान विपक्ष के बाउंसर का कैसे मुकाबला करते हैं. एक तरफ विपक्ष की संयुक्त ताकत है तो दूसरी तरफ माना जा रहा है कि इमरान खान को सेना का खुला समर्थन मिला हुआ है. लेकिन जनरल बाजवा कितने दिन इमरान के लिए फील्डिंग करेंगे ये कोई नहीं जानता.

इमरान खान वैसे तो बड़े बदलाव का नारा देकर सत्ता तक पहुंचे थे लेकिन अब पाकिस्तान में उनकी लोकप्रियता घटती जा रही है. इमरान को सत्ता में आए दो साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन वे कुछ खास करने में नाकाम रहे हैं. उनके कार्यकाल में पाकिस्तान कंगाल हो गया है.

हाल के दिनों में पाकिस्तानी लोगों पर महंगाई का भारी बोझ है. बाजार से आटा गायब है. खाने के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं. बाजार में एक-एक रोटी 20-20 रूपए की बिक रही है. पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली बद से बदतर होती जा रही है. अब तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हुए हैं. आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बार-बार बदनामी भी हुई है.

अबतक घरेलू परेशानी से बचने के लिए पाकिस्तान की सरकारें कश्मीर को बड़े मुद्दे की तरह पेश करती थीं…लेकिन अब उनकी कश्मीर पर दहशत फैलाकर समर्थन हासिल करने की रणनीति पर बड़ा झटका लगा है- अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद कश्मीर में पाकिस्तान की साजिश नाकाम हो रही है.

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