पुलिस आदिवासियों का फर्जी एनकाउंटर करना बंद करें-समरिते

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज़)। बालाघाट जिला पुलिस बल द्वारा 1 दिन पूर्व कान्हा राष्ट्रीय पार्क से लगे हुए जंगल में हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान एक नक्सली के मारे जाने की जानकारी दी गई थी। जिसका नाम झाम सिंह बताया गया है। जैसा कि पुलिस द्वारा पूर्व में एनकाउंटर के बाद इस बात का खुलासा किया जाता है कि अमुक नक्सली किस दल में सक्रिय था उस पर कितना इनाम था इस बार ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है जिसको लेकर अब तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं अब देखना यह है कि बालाघाट पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस के बीच इस एनकाउंटर की जांच का मतलब किस और जाता है क्या सही में झामसिंह नक्सली दलम से जुड़ा हुआ था नक्सली गतिविधियों में शामिल था या फिर केवल जंगल में मछली पकडऩे जाना ही उसके लिए गुनाह बन गया।मृतक झाम सिंह के परिजनों, आदिवासी समाज और लांजी के पूर्व विधायक किशोर समरिते ने इस मुठभेड़ पर सवाल खड़े किये है। जिसमें सभी नेे इस पूरी घटनाा को फर्जी मुठभेड़ बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्यवाही किए जाने की मांग की है ।
पदोन्नति के लालच में की है ग्रामीण की हत्या -पूर्व विधायक समरिते
एनकाउंटर वाले इस मामले में लांजी पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस पूरे घटनाक्रम को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं जिन्होंने इस घटना में एक ग्रामीण को नक्सली बताकर उसका फर्जी एनकाउंटर किए जाने का आरोप पुलिस प्रशासन पर लगाया है वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है मीडिया को जारी की गई प्रेस नोट में पूर्व विधायक किशोर समरीते ने बताया कि 7 सितंबर को पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर कर एक आदिवासी ग्रामीण की हत्या कर दी है उसे पुलिस द्वारा माओवादी बताकर फर्जी पदोन्नति के लालच में हत्या की गई है जो गंभीर जांच का विषय है इस मामले में धारा 302 का अपराध दर्ज कर दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए वही प्रदेश में फर्जी मुठभेड़ को बढ़ावा देने और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए प्रारंभ करने के लिए पुलिस महानिदेशक को निलंबित किया जाना चाहिए पूर्व विधायक समरिते ने आगे कहा कि फर्जी एनकाउंटर करने से यदि पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति मिलती है तो गरीब जनता को नहीं बल्कि मेरा एनकाउंटर कर दें और यदि हिम्मत नहीं है तो गरीब आदिवासियों का फर्जी एनकाउंटर में हत्या करना बंद करें मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पूर्व विधायक श्री समरीते ने बताया कि आदिवासी झाम सिंह की हत्या से मध्य प्रदेश सरकार की बदनामी हो रही है इसलिए इस मामले की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए उन्होंने बताया कि जिले में नक्सलवाद इस समय बड़ी समस्या नहीं है इस समय अवैध शराब की बिक्री, जुआ, सट्टा ,गांजा की बिक्री, सूखा नशा बड़ी समस्या है जिस पर पुलिस का नियंत्रण नहीं है ।
इसके पूर्व भी हुए हैं फर्जी एनकाउंटर, बंदूक गोली व अन्य सामग्रियों की फर्जी जब्ती दिखाना पुलिस की आदत है- समरिते
मीडिया को जारी की गई प्रेस नोट में पूर्व विधायक किशोर समरीते ने बताया कि7 सितंबर को झाम सिंह नाम के आदिवासी ग्रामीण को फर्जी एनकाउंटर में मार कर उसकी हत्या कर दी गई तथा हथियार एवं बंदूक व अन्य सामान जप्त कर लिया गया। उन्होंने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस के पास अवैध हथियार कहां से आते हैं अवैध हथियारों की पुलिस को कौन आपूर्ति करता है यह गंभीर जांच का विषय है पुलिस का कहना है कि दोनों ओर से फायरिंग हुई निहत्थे आदिवासी के पास हथियार एवं गोला बारूद कहां से आया तथा पुलिस ने बिना कारण इतनी अधिक गोलियां क्यों चलाई पुलिस लाइन से 2004 से 485 कारतूस लापता है इसके बावजूद फर्जी गोली चलाने से कारतूस की बर्बादी गंभीर जांच का विषय है। प्रेस नोट में उन्होंने आगे बताया कि बालाघाट पुलिस 1993 से हट्टा थाना से लापता आरक्षक नत्थूलाल वसोड को नहीं ढूंढ पाई ,उसके गुम इंसान मामले की जांच करने वाले सहायक निरीक्षक श्रीराम आसटकर को मारकर लटका दिया गया उस मामले में अब तक कोई आरोपी पकड़े नहीं गए । वही 40 लाख का इनामी माओवादी सूरज टेकाम आज तक नहीं पकड़ा गया। किंतु पुलिस ने 2018 में धनिया टोला एक गरीब आदिवासी हीरालाल टेकाम को नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या कर दी थी। वहीं पहले रूपझर पुलिस ने सुरेन्द्र पुर्राम कक्षा बारहवीं के छात्र जिसके पिता लांजी में डिप्टी रेंजर थे उसकी फर्जी मुठभेड़ में मार कर हत्या कर दी थी इसके पहले फर्जी टिफिन बनाकर छिपाकर रखना एवं रिकवर करना, फर्जी डम्प जमीन में गाड़कर उसे रिकवर करना, बालाघाट पुलिस ने अपनी आदत बना ली है ।

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