प्राचीन कोटेश्वर म΄दिर खतरे मे,नाले के कटाव को रोकने प्रोटेक्शन वॉल बनाने की मा΄ग

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लांजी (पद्मेश न्यूज)। पुरातत्व विभाग के अधीन एवं संरक्षित अति प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर के सामने से ओंम आकार में बहने वाला काशी नाला प्रकृति से हो रही छेड़छाड़ के चलते दिनों-दिन क्षतिग्रस्त होते जा रहा है। पुरातत्व विभाग एवं प्रशासन द्वारा इस नाले के हो रहे कटाव को रोकने के लिए प्रोटेक्शन वॉल नही बनाई गई तो आने वाले समय में कभी मंदिर परिसर को खतरा हो सकता है। वही दुर्घटना के बचाव के लिए क्षतिग्रस्त जगह पर बेरिकेटिंग किये जाने की मांग प्रबुद्धजनों ने पुरातत्व विभाग एवं नगर परिषद से की है। ज्ञात हो कि यहां वर्ष भर कोटेश्वर धाम में भगवान शिव को जल चढ़ाने श्रद्धालु भक्तों का मेला सा लगा रहता है। कुछ भक्तों के द्वारा यहां मंदिर के ठीक सामने श्रद्धालुओं के बैठने के लिए सीमेंट की कुॢसयां लगी हुई थी, जहां विगत वर्ष की तेज बारिश में नाले में तेज बहाव के चलते नाले के कुछ भाग में कटाव हो गया एवं नाले किनारे एक पुराना बड़ा सा पेड़ एवं सीमेंट की कुॢसयां नाले में जा धसी। यह नाले का क्षतिग्रस्त क्षेत्र अब आम लोगो के लिए खतरनाक लगने लगा है एवं इसकी सुरक्षा के लिए प्रशासन अथवा पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक कोई उपाय नही किये गये है, जिसके चलते वहां कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। मंदिर के सामने से बहने वाला काशी नाला जो कि पहाड़ व जंगल से निकला है, जिसके कारण बारिश के दिनों में इस नाले में पहाड़ी पानी आता है जो कि बारिश के पानी के साथ कूड़ा करकट एवं पेड़, झाडिय़ा बहाकर लाता है। जिसकी वजह से एवं नाले का रास्ता घुमावदार होने के चलते यहां लगातार कटाव हो रहा है। इस वर्ष भी कोटेश्वर मंदिर के सामने हो रहे इस कटाव को रोकने हेतु पुरातत्व विभाग अथवा नगर परिषद द्वारा कोई प्रयास नही किये गये तो यह कभी मंदिर को भी क्षति पहुंचा सकता है। चूंकि मंदिर पुरातत्व विभाग के अन्तर्गत होने के चलते पुरातत्व विभाग को इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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