फर्जी मुठभेड़ मे΄मारे गये ग्रामीण को न्याय दिलाने आदिवासियो΄ ने भरी हु΄कार

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। गत ६ सितम्बर को जिले के गढ़ी थाना क्षेत्रान्तर्गत आने वाले बसपहरा के जंगल में हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गये झामसिंह धुर्वे नामक एक आदिवासी ग्रामीण की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समूचा आदिवासी समुदाय एवं इसके जनप्रतिनिधियों ने इस पुलिस-नक्सली मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए मामले की सीबीआई से जांच किये जाने की मांग की है। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार झामसिंह धुर्वें की मौत पुलिस की गोली लगने के कारण हुई है। इस मामले में कलेक्टर दीपक आर्य ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिये हैं। लिहाजा इस मामले में बैहर विधायक संजय उइके और आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम के नेतृत्व में आज १५ सितम्बर को जिला मुख्यालय में विशाल रैली निकाली गई। इस रैली में मंडला जिले की विधानसभा क्षेत्र बिछिया के विधायक नारायणसिंह पट्टा, सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक अर्जुनसिंह काकोडिय़ा, मंडला जिले के निवास विधानसभा क्षेत्र के विधायक अशोक मर्सकोले, परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक मधु भगत, शाहपुरा विधायक भूपेन्द्र मरावी, अनुसूचित जनजाति आयोग म.प्र. के अध्यक्ष गुलाबसिंह उइके, आदिवासी महिला नेत्री श्रीमती हीरासन बाई उइके, जनपद पंचायत परसवाड़ा की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला सरोते, ओबीसी महासभा के जिला अध्यक्ष सौरभ लोधी, जिला कांग्रेस प्रवक्ता विशाल बिसेन, श्रीमती सरिता मर्सकोले, दिनेश धुर्वे सहित आदिवासी समुदाय के जनप्रतिनिधीगण, पदाधिकारीगण और जिले भर से आये आदिवासी समाज के गणमान्य नागरिकों ने इस रैली में शामिल होकर अपना आक्रोश जाहिर किया और प्रतिनिधी मंडल ने कलेक्टर दीपक आर्य को एक ज्ञापन प्रेषित कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा प्रदान करने, मृतक के परिजन में किसी एक को शासकीय नौकरी प्रदान करने की मांग की है। इतना ही नहीं इसके लिए उन्होने प्रशासन को १५ दिनों का अल्टीमेटम भी दिया है। १५ दिनों में अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होती तो उन्होने पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है वहीं इस मामले में कलेक्टर दीपक आये ने कहा है कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच करवाई जा रही है जो करीब एक माह में पूरी हो जायेगी।ं
मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होना चाहिए – संजय उईके
बैहर विधायक संजय उईके ने पूरे घटनाक्रम और कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ की विस्तार से जानकारी दी और सीधे सीधे आरोप लगाया कि इस मामले की न्यायिक जांच की जानी चाहिए उसके पहले बालाघाट पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया जाना चाहिए जिसके बाद ही पूरी जांच सही तरीके से हो सकती है। इस घटना के चश्मदीद नेम सिंह द्वारा बताया गया है कि यह घटना कहीं और हुई है और उसे मध्य प्रदेश की सीमा में होना दिखाया गया है जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता तथा परिवार के व्यक्ति को शासकीय नौकरी और जो पुलिस दल वहां गया था उस पर अपराध दर्ज हो पुलिस अधीक्षक को हटाया जाए तथा ऐसी घटना दोबारा ना हो इसके लिए न्यायिक जांच कराया जाए।
शासन के बजट के लिए दिखाई जाती है फर्जी मुठभेड़ – अशोक मर्सकोले
मंडला जिले के निवास विधानसभा क्षेत्र के विधायक अशोक मर्सकोले ने सीधे-सीधे पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया कि बजट के लिए इतना पूरा घटनाक्रम किया गया है फर्जी मुठभेड़ हुई है और आदिवासियों को पूरा पूरा टारगेट किया जा रहा है। पुलिस द्वारा जिस प्रकार से नक्सलाइट मूवमेंट दिखाया जाता है वास्तव में इतना मूवमेंट तो नहीं दिखता है, कहीं गोली चलती है तो पता चलता है कि नक्सली है। नक्सली दिखाने के लिए और टारगेट पूरा करने के लिए ऐसी हत्या की जा रही है, अब लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है। श्री मस कोले ने आरोप लगाते हुए कहा कि टारगेट की पूर्ति होगी तो बजट आएगा यह बहुत बड़ा खेल है।
आदिवासी समाज अब बर्दाश्त नहीं करेगा – काकोडीया
सिवनी जिले की बरघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक अर्जुन सिंह काकौडिय़ा ने आरोप लगाया की जल जंगल जमीन की रक्षा करने वाले मूलनिवासी आदिवासियों को उनके स्थान से खदेडऩे के लिए नक्सली बनाकर मुठभेड़ का शिकार बनाया जा रहा है। आदिवासी समाज आप अपने अधिकारों को समझ रहा है और अब जाग रहा है अब यह समाज ऐसे कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगा।
अब राज्य स्तर पर उग्र आंदोलन होगा – नारायण सिंह पट्टा
मंडला जिले की बिछिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण सिंह पट्टा ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया और कह दिया कि 15 दिनों के भीतर यदि जांच नहीं हुई, दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा नहीं मिला तो राज्य स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। नक्सल उन्मूलन के नाम से बनाए गए सभी विंग शासकीय बजट का दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं आदिवासी नक्सलियों का कभी सहयोग नहीं करता है जंगल से वंचित करने आदिवासियों को टारगेट बनाया जा रहा है जो न्यायोचित नहीं है हम सभी लोग इसका विरोध करते हैं। पुलिस नक्सली हमले की बात कर जांच को इतिश्री करेगी, 15 दिन के अंदर जांच नहीं होती है तो राज्य स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।
मजिस्ट्रियल जांच से स्पष्ट होगा घटना का कारण – दीपक आर्य
रैली के बाद ज्ञापन लेने पहुंचे कलेक्टर दीपक आर्य ने बताया कि मृतक झामसिंह का अब तक नक्सलियों से कोई कनेक्शन नहीं मिल पाया है इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच करवाई जा रही है इसके लिए 1 महीने का समय दिया गया है। मृतक झामसिंह को एक बुलेट लगी थी उसी संबंध में मजिस्ट्रियल जांच बिठा दी गई है जांच में ही स्पष्ट होगा मृत्यु का क्या कारण है। क्षेत्र के ग्रामीण जनों और आदिवासी समाज को आपत्ति है उनका कहना है वह ग्रामीण नक्सली नहीं था जांच उपरांत ही सब क्लियर हो जाएगा, मृतक के परिवार के लिए अभी तक 1 लाख रुपए की राशि रेड क्रॉस से मंत्री जी के आदेश अनुसार दे दी गई है। यदि झामसिंह धुर्वे की मृत्यु किसी नक्सली के द्वारा किया जाना पाया जाता है तो उन्हें 8 लाख 25 हजार रुपए एट्रोसिटी के तहत दिए जाते हैं और शासकीय सेवा में नौकरी भी उनको दी जा सकती है। श्री आर्य ने कहा कि मजिस्ट्रियल जांच से लोग संतुष्ट ना हो तो न्यायिक जांच भी करवाई जा सकती है लेकिन सीधा पुलिस पर आरोप लगाना भी ठीक नहीं है यह पूरा मामला जांच का विषय है कैसे मृत्यु हुई।
पुलिस की रही तगड़ी सुरक्षा

आदिवासी समाज द्वारा किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी, वही इसको लेकर शुरू से लेकर ज्ञापन सौंपने तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नजर बनाए हुए थे। एसडीएम और सीएसपी तहसीलदार सहित पुलिस के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

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