बाढ़ पीडि़त मुआवजे की देख रहे राह , मुआवजा तो दूर की बात सर्वे भी अब तक नहीं हो सका पूर्ण

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। एक ओर प्रदेश के मुखिया जहां अपने आपको स्वयं किसान बताते हुए गरीबों मजदूरों और किसानों का उत्थान किए जाने की बात करते हैं तो वहीं दूसरी ओर अगस्त माह में जिले भर में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ से हुए नुकसान का सरकार द्वारा बाढ़ पीडि़तों को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है मुआवजा की बात तो दूर अब तक कई क्षेत्र में बाढ़ पीडि़तों के क्षतिग्रस्त हुए मकान और बर्बाद हुई उनकी फसलों का सर्वे तक नहीं कराया गया है जिसको लेकर बाढ़ पीडि़त लोग जहां बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर कई ऐसे परिवार हैं जो मकान क्षतिग्रस्त होने पर किराए के कमरे में जिंदगी गुजार रहे हैं।इन बाढ़ पीडि़तों ने कई बार बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करने और मुआवजा दिए जाने की गुहार लगाई है लेकिन अब तक बाढ़ पीडि़तों को शासन द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया है जिसको लेकर बाढ़ पीडि़तों में आक्रोश देखा जा रहा है और उनके द्वारा जल्द से जल्द मुआवजा दिए जाने की मांग की जा रही है आपको बताएं कि जिला मुख्यालय सहित अन्य ग्रामीण अंचलों में अगस्त माह में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ के पानी ने काफी तबाही मचाई थी जिसमें नदी किनारे बसे गांव के मकान और खेतों में लगी फसलें को बहुत अधिक नुकसान हुआ है। इन बाढ़ पीडि़तों को अब तक शासन द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया है जिसको लेकर बाढ़ पीड़ित काफी परेशान है और वे मुआवजे की आस में सरकार की तरफ आस भरी निगाहों से देख रहे हैं।

मुआवजा तो दूर की बात, अब तक सर्वे भी पूरा नहीं हो सका है

बात अगर बाढ़ पीडि़तों की करें तो बाढ़ पीडि़तों को मुआवजा दिए जाने की बात तो दूर बाढ़ से हुए नुकसान का अब तक सर्वे कार्य भी पूरा नहीं हो सका है जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर कुम्हारी गांव भी इनमें से एक है जहां के बाढ़ पीडि़तों को हुए नुकसान का ना तो शासन द्वारा अब तक सर्वे पूर्ण कराया गया है और ना ही उन्हें नुकसान का मुआवजा दिया गया है प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कुम्हारी में आई बाढ़ में लगभग 122 मकान डूब गए थे जिसमें से 35 मकान धराशाही हो चुके थे जबकि 89 मकानों में आंशिक क्षति हुई थी इसके अलावा प्राथमिक सर्वे में 290 किसानों की फसलें बर्बाद होने का आकलन किया गया था जिसमें से अब तक मात्र 110 किसानों का सर्वे कर उसकी ऑनलाइन एंट्री की गई है वही अब भी कई ऐसे किसान और गरीब मजदूर हैं जिनके क्षतिग्रस्त हुए मकानों और फसलों का अब तक सर्वे कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर ग्राम कुम्हारी में बाढ़ से हुए नुकसान का जब तक पूर्ण सर्वे नहीं कराया गया है तो फिर जिले के 67 से अधिक गांव में हुए नुकसान के सर्वे का क्या आलम होगा? आज बाढ़ पीडि़तों की जुबां पर सिर्फ एक ही सवाल है की अतिवृष्टि और बाढ़ के पानी से हुए नुकसान उन्हें शासन द्वारा कब और कितना मुआवजा दिया जाएगा या फिर शासन द्वारा अतिवृष्टि व बाढ़ से हुए इस नुकसान की भरपाई की जाएगी या नहीं ।इसी सवाल को लेकर बाढ़ पीडि़त काफी चिंतित हैं।
किसान,मजदूरों के माथे पर दिखाई दे रही चिंता की लकीरें
पिछले दिनों भारी बारिश और बाढ़ के कारण न सिर्फ लोगों के आशियाने क्षतिग्रस्त हुए हैं बल्कि इसमें अन्यदाता किसानों की फसलें भी बर्बाद हो गई जिला प्रशासन के द्वारा बर्बाद हुई फसलों का जायजा लेने के लिए संबंधित राजस्व विभाग के कर्मचारियों को बर्बाद हुई फसलों का मुआयना कर नुकसान का आकलन करने और मौके स्थल का पंचनामा बना कर पुन: जिला प्रशासन को जमा करने हेतु निर्देश जारी किए गए थे परंतु राजस्व विभाग के कर्मचारियों के द्वारा अब तक सर्वे का यह कार्य पूर्ण नहीं किया गया है जिसको लेकर अन्नदाता किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें एक बार फिर देखी जा रही है किसान बताते हैं कि उन्होंने धान, पोपट, तिल्ली सहित विभिन्न प्रकार की फसलें अपने खेतों में लगाई थी जिसे बाढ़ और बारिश के पानी ने बर्बाद कर दिया जिसका मुआवजा शासन द्वारा अब तक नहीं दिया गया है।

ऊंट के मुंह में जीरे के समान मिलता है मुआवजा
जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां बारिश के कारण फसल डूब जाने की वजह से कई एकड़ में लगी हुई धान की फसल नष्ट हो गई अन्नदाता किसान प्रशासनिक अमले से गुहार लगा रहा है कि जल्द से जल्द फसलों का मुआयना कर उसे नष्ट हुई फसलों का मुआवजा प्रदान किया जाए जिससे कि उसकी स्थिति मे थोड़ा सुधार आए। क्योंकि बारिश के पानी ने जो फसलें तबाह किया है उन फसलों पर आधारित किसान 1साल घर में रहकर अपना गुजर-बसर करता है ऐसे में फसले नष्ट होने पर प्रशासन से गुहार लगाने के अलावा किसान के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।ऐसे में किसान आशा भरी नजरों से जिला प्रशासन की ओर देख रहा है कि वह किसानों को विधिवत रूप से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा प्रदान करें ।लेकिन उन्हें मुआवजा मिलना तो दूर अब तक उनका प्रकरण तक नही बना है जिसको लेकर किसानों में मायूसी छाई हुई है। वहीं पिछले साल हुई अतिवृष्टि और बाढ़ में जिन लोगों के मकान और फसलें क्षतिग्रस्त हुई थी उन्हें सरकार द्वारा जो मुआवजा दिया गया है बाढ़ पीड़ित उस मुआवजे को ऊंट के मुंह में जीरे के समान मिलने वाला मुआवजा बता रहे हैं बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि 50 से 70 हजार रु का नुकसान होने पर भी उन्हें महज 15 से 20 हजार रु का मुआवजा सरकार द्वारा दिया गया है वही अन्य आश्वासनों को सरकार द्वारा अब तक पूरा नहीं किया गया है।
नुकसान का मुआवजा नहीं मिला-पूनम जंगिले
बाढ़ पीडि़त पूनम जंगिरे ने बताया कि पिछले साल की तरह इस साल भी आई बाढ़ में उनका मकान डूब गया था जिसका अब तक सर्वे नहीं हुआ है शपथ पत्र जमा करने को कहा गया था वहीं अधिकारियों द्वारा दूसरी जगह मकान बनाने के लिए भूमि देने की भी बात कही गई थी और राशन कार्ड के फॉर्म भरे गए थे लेकिन अभी तक कोई भी काम नहीं किया गया है और ना ही नुकसान का मुआवजा मिला है।
कागजात भी नहीं बचे- मंगल सिंह उईके
वही बाढ़ पीड़ित मंगल सिंह उईके ने बताया कि बाढ़ के चलते उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया सरपंच पटवारी कोटवार सहित अन्य लोग आए थे जो देख कर चले गए मकान गिरने से मकान में रखा सामान सहित तमाम दस्तावेज मकान में दब गए थे जो आज तक उन्हें नहीं मिले।
कोई सुनवाई नहीं हो रही है- फुलवंती रनगिरे
बाढ़ पीडि़त फुलवंती बाई रनगिरे ने बताया कि कुछ दिन पूर्व सर्वे के लिए एक मैडम आई थी जो लिखा पढ़ी करके गई है लेकिन मैडम ने हमसे कोई कागजात नहीं मांगी मकान क्षतिग्रस्त होने पर हम झोपड़ा बनाकर रह रहे हैं अधिकारी लोग बोल रहे थे कि यहां हर साल बाढ़ आती है तो आपको किसी अन्य जगह पर मकान बनाने के लिए भूमि देंगे लेकिन अब अधिकारी भी गांव नहीं आ रहे हैं और ना ही मकान बनाने के लिए दूसरी जमीन दे रहे हैं और ना ही मुआवजा दिया जा रहा है यदि सरकार हमें मुआवजा नहीं देती और मकान बनाने के लिए दूसरी जगह नहीं दी जाती तो हम उन्हें इसी जगह पर मकान बना कर यही रहेंगे।
किराए के कमरे में गुजार रहे जिंदगी-सुनीता बाई रोकेड़े

वही बाढ़ पीडि़तों सुनीताबाई रोकड़े ने बताया कि पिछले बार भी उनका मकान क्षतिग्रस्त हुआ था जहां शासन के द्वारा 50 किलो अनाज और 20 हजार रु का मुआवजा दिया गया था लेकिन इस वर्ष कुछ भी नहीं मिला सिर्फ सरकार द्वारा राशन दिया गया है मकान धराशाई होने के कारण हम हजार रु महीना के किराए के कमरे में जिंदगी गुजार रहे हैं क्षतिग्रस्त हुए मकान में घास उग आई हैं वहां साफ सफाई कर फिर से रहना शुरू करेंगे पंचायत में मुआवजे के लिए गए तो पंचायत वाले बोलते हैं कि तुम्हें मकान बनाने के लिए दूसरी जगह देंगे लेकिन वे जगह कहां दे रहे हैं इस बारे में भी कोई नहीं बता रहा है।
इस बार नहीं मिला मुआवजा-बाढ़ पीडि़त
वही बाढ़ पीडि़त लक्ष्मीबाई उईके और उमाशंकर भलावी ने बताया कि बाढ़ में हुए नुकसान का अब तक ना तो सर्वे किया गया है और ना ही मुआवजा दिया गया है बाढ में उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया जिसमें चावल गेहूं तेल सहित अन्य सामान व खाद्य सामग्री का नुकसान हो गया है अब तक किसी ने भी कोई मुआवजा दिए जाने की बात नहीं की है जबकि पिछले बार 10 से12 हजार रु का मुआवजा सरकार द्वारा दिया गया था।
कब मिलेगा मुआवजा कोई नहीं बता रहा -बाढ़ पीडि़त
वही बाढ़ पीडि़तों शिशुपाल भलावी और बसंत ने बताया कि बाढ़ के चलते उनके मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं जहां 50 हजार से अधिक रुपए का नुकसान हो गया है धान चावल अनाज सहित अन्य सामग्रियां भीग गई है जिसका अब तक शासन प्रशासन द्वारा सर्वे नहीं कराया गया है और ना ही मुआवजा दिया गया है पंचायत द्वारा मकान बनाने के लिए दूसरी जगह दिए जाने की बात कही जा रही है लेकिन अब तक जगह नहीं दी गई है यदि हमें जगह दी भी जाएगी तो हम इस जगह को छोड़कर नहीं जाएंगे उन्होंने बताया कि इस का मुआवजा कब मिलेगा इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं दे रहा है।
शासन प्रशासन से नहीं मिला कोई लाभ- धुरपति बाई
पीडि़त किसान धुरपति बाई ने बताया कि 4 एकड़ में उन्होंने धान तुवल तिल्ली सहित अन्य फसलें लगाई थी जो बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई जिससे 50 से60 हजार रु की धान का नुकसान हुआ है खेत में धान की फसल नष्ट हो गई है जिसका ना तो सर्वे हुआ है ना कोई मुआवजा मिला है इसके अलावा शासन प्रशासन से कोई लाभ नहीं मिला है।
अधिकारी लोग बोलते हैं सरकार के पास पैसा नहीं है -अनिल कुमार बिसाने
पीडि़त किसान अनिल कुमार बिताने ने बताया कि उन्होंने 1 एकड़ में फसल लगाई थी जो अतिवृष्टि और बाढ़ में नष्ट हो गई जिसका अब तक सर्वे नहीं हुआ है और मुआवजा भी नहीं मिला है अधिकारी लोग बोल रहे हैं कि सरकार के पास पैसे नहीं है मुआवजा मिलेगा बोलते हैं पर कब मिलेगा कितना मिलेगा इस बारे में कोई नहीं बता रहा है।
पता नहीं मुआवजा कब मिलेगा-शशि बाई बिसाने
वही पीडि़तों किसान शशि बाई बिसाने ने बताया कि उन्होंने 75 डिसमिल जगह में फसल लगाई थी बाढ़ के पानी से पूरा नुकसान हो गया पटवारी मैडम लिखा पढ़ी कर कर गई है कब और कितना मुआवजा मिलेगा नहीं बताएंगे ।
सर्वे का कार्य चालू है- संतोष बाविसताले
पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत कुम्हारी के सचिव संतोस बाविसताले ने बताया कि लगभग 330 किसानों की फसल क्षति हुई है जिसमें 290 किसानों का ऑनलाइन फॉर्म भेजे जा चुके हैं वही पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों का सर्वे हो चुका है आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए मकानों का सर्वे जारी है सभी मकानों और क्षतिग्रस्त हुई फसलों का सर्वे पूर्ण कर शासन को भेजा जाएगा जहां से बाढ़ पीडि़तों को मुआवजा की राशि प्राप्त होगी।

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