पदमेश न्यूज़,बालाघाट।भटेरा रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण को लेकर नए नए अड़ंगे सामने आ रहे हैं।जहां पहले तो स्थानीय लोगो में ओवरब्रिज निर्माण को लेकर किए गए नापजोख में काफी नाराजगी देखी गई। तो अब भू अर्जन को लेकर दिए जा रहे मुआवजे को लेकर भी लोग नाराज हैं। स्थानीयजनों का आरोप है कि नगर के वार्ड नंबर 10 को शहरी क्षेत्र बात कर शहरी क्षेत्र के हिसाब से मुआवजे का निर्धारण किया गया है, तो वही वार्ड नंबर 11 को ग्रामीण क्षेत्र बताकर ग्रामीण क्षेत्र के हिसाब से मुआवजे का निर्धारण किया जा रहा है वहीं दोनों वार्डवासियों को नियम के हिसाब से मुआवजा ना देकर काफी कम राशि का मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि दोनों ही वार्ड नगरपालिका के अंतर्गत शहरी क्षेत्र के वार्ड हैं।बावजूद इसके भी मुआवजा वितरण प्रणाली में इन्हें शहरी और ग्रामीण वार्ड बताकर अलग-अलग मुआवजे कि दर तय की जा रही है जिसका विरोध स्थानीय लोगो द्वारा गुरुवार को किया गया। जिन्होंने एक बैठक का आयोजन कर दरों का निर्धारण, व कम मुआवजा राशि पर अपनी नाराजगी जताते हुए इसका विरोध करने की योजना बनाई है। जिन्होंने इसके विरोध में जल्द ही ज्ञापन सौपकर चक्कजाम आंदोलन करने और वक्त पड़ने पर हाई कोर्ट का सहारा लिए जाने की भी चेतावनी दी है। आयोजित इस बैठक में डॉ. अरोड़ा, कन्हैया राउत, पिंकू गुरबेले, श्री दीयावार, सलीम खान, सकुन यादव, नईम कुरैशी, मोबिन कुरैशी, सरस्वती बाई, बेलाबाई सहित अन्य स्थानीय नागरिक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सभी को कर्मशियल हिसाब से मिले मुआवजा
स्थानीय लोगो ने मुआवजा दरों में भारी भिन्नता होने का आरोप लगाते हुए रेवेन्यू रिकॉर्ड के आधार पर दिए जा रहे मुआवजे को लेने से इंकार किया है।जिन्होंने उन्हें कमर्शियल के आधार पर मुआवजा देने और मुआवजा दरों के निर्धारण में एकरूप रवैया अपमाने की मांग की है। जहां उन्होंने अपनी इस मांग को लेकर गुरुवार को बैठक कर भूअर्जन अधिकारी पर निशाना साधते हुए, उन्हें तत्काल इस कार्य से मुक्त कर, नया भूअर्जन अधिकारी की नियुक्ति किए जाने की मांग की है। उन्होंने उन्हें हो रहे नुकसान से बचाने और कमर्शियल के आधार पर उनके निर्माण कार्यों का बढाकर मुआवजा दिए जाने की भी गुहार लगाई है।
एक ही शहर के 2 वार्ड, एक शहरी तो दूसरा ग्रामीण कैसे?
रहवासियों ने बताया कि भटेरा ओवरब्रिज निर्माण में आने वाली दुकान एवं मकानों को एक जैसी मुआवजा राशि वितरण नहीं की जा रही है इन राशियों में काफी पक्षपात किया जा रहा है एक वार्ड नंबर 11 काे ग्रामिण बता कर राशि लगभग 1100 रुपए निर्धारित की गई है वहीं दूसरे वार्ड 10 को शहरी बताकर 2200रु सकेयर फीट राशि निर्धारित की गई है यह कहां का न्याय है जबकि दोनों वार्ड लगे हुए हैं और दोनों ही नगर पालिका क्षेत्र में आते हैं और टैक्स भी नगर पालिका को ही देते हैं तो फिर एक वार्ड के वार्ड वासी कैसे ग्रामीण के हो गए।
अक्टूबर 2026 तक बनकर पूर्ण करना है रेलवे ओवरब्रिज
ज्ञात हो कि नगर में भटेरा मार्ग पर बनने वाले 38 करोड़ के रेलवे ओवरब्रिज का काम अक्टूबर 2026 तक पूर्ण किया जाना है।1313 मीटर लंबे और लगभग 8.4 मीटर चौड़े, इस रेलवे ओवरब्रिज पर रेलवे लाईन पर बनाए जाने वाले ब्रिज को छोड़कर, राज्य सरकार की सेतु एजेंसी को 38 करोड़ रूपए की लागत से 42 पिल्लर बनाना है, जिसमें अब तक केवल 8-10 पिल्लर ही बन पाए है। वहीं अन्य कार्य के लिए भी आए दिनों नए-नए अड़ंगे देखे जा रहे हैं।अब ओवरब्रिज के लंबाई क्षेत्र में आने वाले रेसिडेंटल और कमर्शियल भूमि वालो ने भू-अर्जन के तय किए गए मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है।आपको बताए कि भू-अर्जन के बाद कुल 206 लोगों को 24.34 करोड़ रूपए की राशि वितरित होना है, लेकिन मुआवजे पर उठते सवाल से समयावधि में भटेरा रेलवे ओवरब्रिज का काम पूरा हो पाएगा, यह संभव नजर नहीं आ रहा है।
मार्ग कमर्शिलय घोषित है तो फिर रेवेन्यु के आधार पर मुआवजा क्यो
चर्चा के दौरान स्थानीय रहवासियो ने बताया कि भटेरा रेलवे ओवरब्रिज के मार्ग पर रहवासी मकानों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठान है। बालाघाट विकास योजना में इस मार्ग को कमर्शिलय घोषित किया है तो फिर रेवेन्यु आधार पर मुआवजा क्यो?, कमर्शियल आधार पर मुआवजा प्रदान करना चाहिए।उन्होंने बताया कि रेसिडेंटल आधार पर रिक्त भूमि का 11, 400 रूपए वर्गफीट राशि तय की गई है। जबकि कमर्शियल में, रेट इससे ज्यादा है, जिसके कारण, हमें लगता है कि भू-अर्जन के बाद दिया जाने वाला मुआवजा काफी कम है।
मुआवजे में किया जा रहा भाई भतीजावाद
पहले तो ओवरब्रिज बनाने में देरी और अब ओवरब्रिज के मार्ग में आ रहे भवन और दुकानों के भू-अर्जन मुआवजा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रहवासियों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों ने मुआवजा राशि वितरण में भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया है।स्थानियजनो ने मुआवजा वितरण में प्रशासन पर मनमर्जी का आरोप लगाते हुए कहा कि सभी चिन्हित रहवासी और दुकान मालिकों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत न्यायालय के आदेशानुसार, मुआवजा बढ़ाकर मिलना चाहिए।
किसे किस हिसाब से कितना मुआवजा, का नोटिस ने नही किया गया उल्लेख
स्थानीय जनों ने बताया कि भूअर्जन अधिकारी द्वारा मुआवजे से सम्बधित जो ,नोटिस रह वासियों को दिया गया है उसमें यहां भी नहीं दर्शाया गया है कि किस चीज का कितना पैसा दिया जा रहा है कमर्शियल वाली जमीन की भी मुआवजा राशि,आवासीय के रूप में दि जा रही है,वही नजूल की जमीन वाले को अधिक तो मालिका हक वाले भूस्वामी को कम राशि का भुगतान किया जा रहा ह। जिसमें पूर्ण रूप से नियमों की अनदेखी की जा रही है।
भूअर्जन अधिकारी (एसडीएम) को हटाने की करी मांग
स्थानीय लोगो ने मुआवजे के निर्धारण में अनिमियता बरतने, नियमो के तहत मुआवजा राशि ना देने, किसी को कम किसी को ज्यादा राशि देने सहित एक ही नगर एक ही क्षेत्र को शहर व गांव में बांटकर अलग अलग दर से मुआवजे का निर्धारण करने का आरोप लगाते हुए, भूअर्जन अधिकारी (एसडीएम) को हटाकर किसी औऱ को भूअर्जन अधिकारी बनाने, दोबारा सर्वे कराकर, सभी को समान दर, व्यवसायिक क्षेत्र के हिसाब से भूमि और निर्माण कार्य का अलग से मुआवजा प्रकरण बनाकर, मुआवजा राशि दिए जाने की मांग की है।
आंदोलन कर हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी
स्थानीय लोगो ने भूअर्जन अधिकारी एसडीएम गोपाल सोनी को तुरंत हटाकर या नियमानुसार मुआवजा राशि वितरण किए जाने की मांग की है। जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के हिसाब से मुवअजा राशि वितरण करने और लगभग 262 दुकानदरों को वहां से हटाने से पहले उनके व्यवस्थापन की व्यवस्था इतवारी बाजार स्थित कॉम्प्लेक्स में करने की भी गुहार लगाई है। उन्होंने स्पष्ठ किया कि यदि जल्द ही निष्पक्ष रूप से राशियों का वितरण नहीं किया गया तो हम आंदोलन करेंगे और इसी मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएगे।
नए भूअर्जन अधिकारी की नियुक्ति कर पुनःकराया जाए सर्वे- राशीद
वार्ड नंबर 11 निवासी अधिवक्ता राशीद अहमद ने बताया कि भू-अर्जन अधिकारी द्वारा सभी भूमि मालिकों को एक पत्र दिया गया है, उस पत्र में कहीं पर भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि उन्हें किस दर से कितनी मुआवजे की राशि दी जा रही है जमीन का कितना और निर्माण का कितना मुआवजा दे रहे हैं। भटेरा रोड़ से रेलवे क्रॉसिंग और उससे आगे तक का हिस्सा पूरा कमर्शियल में है लेकिन अधिकारियों ने बंद कमरे में इसकी निम्न दर तय कर ली है, वार्ड नंबर 10 के लोगों को शहरी क्षेत्र बताते हुए 2200रु स्क्वायर फीट के हिसाब से, तो वहीं वार्ड नंबर 11 के लोगों को ग्रामीण क्षेत्र बताते हुए 11.500 रु स्क्वायर फीट के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है। उसमें भी केवल भूमि का मुआवजा मिल रहा है लेकिन उसे भूमि पर किए गए कमर्शियल निर्माण का मुआवजा नहीं जोड़ा गया है।ओवर ब्रिज के लिए जहां भू अर्जन होना है। वह दोनों ही वार्ड कमर्शियल क्षेत्र में आते हैं यहां के लोग कमर्शियल का टैक्स पटाते हैं बिजली मीटर भी कमर्शियल है लेकिन इसे आवासीय बताकर मुआवजा का पत्र दिया गया है, भू अर्जन अधिकारी या अन्य किसी अधिकारी ने आज तक वार्ड में जाकर लोगों से चर्चा नहीं की, कोई समन्वय नहीं बनाया।हमसे हमारी ही जमीन ली जा रही है और हमें ही अंधेरे में रखा जा रहा है। यह नहीं चलेगा,हमारी मांग है कि नए भूअर्जन अधिकारी की नियुक्ति कर दोबारा मुआवजे का सर्वे करना चाहिए और सभी को समान दर से कमर्शियल के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए।
भूअर्जन अधिनियम के तहत दिया जाए मुआवजा-प्रभु एस बुड्ढेकर
अधिवक्ता प्रभु एस एस बुड्ढेकर ने बताया कि भू अर्जन अधिनियम 2013 के तहत प्रावधान है कि जब भी जनहित के कार्य सरकार करती है और उसमें लोगों की जमीन अधिग्रहण की जाती है तो उसे भू अर्जन अधिनियम के तहत वर्तमान रेट से 4 गुना बढाकर मुआवजा मिलाना चाहिए। लेकिन यह लोग तो अलग ही दर का निर्धारण कर रहे हैं, नगर पालिका में जब सभी वार्ड हैं तो इसे ग्रामीण अंचल में कैसे माना जा रहा है, यहां पूरे अधिकारियों की मिली भगत है जिसकी नजूल की जमीन है उसे 35 लाख दे रहे हैं उसी के बाजू वाली उतनी ही मालिकाना हक की भूमि वाले को महज 2 लाख दे रहे हैं। यह सरकार दोगली नीति अपना रही है, भूमि अधिग्रहण के लिए 38 करोड रुपए का मुआवजा आया है।लेकिन यहां पर सभी को मिलाकर महत्व 23 करोड रुपए का मुआवजा वितरित किया जा रहा है। व्यावसायिक एरिया को ग्रामीण क्षेत्र बताकर कम दरों से मुआवजा का निर्धारण किया गया है जो कि गलत है। हम इसका विरोध करते हैं हमारी मांग है कि नया भूअर्जन अधिकारी नियुक्त कर,पुनः सर्वे कराकर नियमों के तहत कमर्शियल क्षेत्र के हिसाब से बढ़कर मुआवजा दिया जाए।









































