भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने अपने इंट्रानेजल (नाक से दी जानेवाली) कोविड वैक्सीन के बूस्टर डोज के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति मांगी है। आपको बता दें कि इंट्रानेजल टीका (Nasal vaccine) नाक में दिया जाने वाला टीका है, जो एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) पैदा कर वायरस को शरीर के अंदर प्रवेश करने से रोकता है। इसे कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीका ले चुके लोगों को भी बूस्टर डोज के तौर पर दिया जा सकता है। भारत बायोटेक ने दलील दी है कि इंट्रानेजल वैक्सीन कोरोना के ट्रांसमिशन को रोकने में ज्यादा कामयाब होगा। भारत बायोटेक के इन्ट्रानेजल टीका पहला नेजल टीका है जिसे परीक्षण के लिए नियामक की मंजूरी मिल गई है। यह इस तरह का पहला कोविड-19 टीका है, जिसका भारत में मनुष्यों पर क्लिनिकल परीक्षण हो रहा है।
पिछले महीने भारत बायोटेक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कृष्णा एल्ला ने नाक से दिए जाने वाले टीके (नेजल वैक्सीन) के महत्व पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि पूरा विश्व ऐसे टीके चाहता है और संक्रमण रोकने का यही एकमात्र तरीका है। उन्होंने बताया था, ‘हम नाक से देने वाला टीका ला रहे हैं…। यह रणनीतिक रूप से, वैज्ञानिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दूसरी खुराक को यदि आप नाक से देते हैं तो आप संक्रमण को फैलने से रोकते हैं.’
यह टीका बीबीवी154 है जिसकी प्रौद्योगिकी भारत बायोटेक ने सेंट लुईस स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से प्राप्त की थी। जैवप्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के बयान के मुताबिक पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में टीके की खुराकों को शरीर द्वारा अच्छी तरह स्वीकार किया गया और किसी गंभीर या प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी नहीं है। क्लिनिकल पूर्व अध्ययनों में भी टीका सुरक्षित पाया गया था।










































