मंडी कर्मचारियों ने प्रदेश व्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का किया ऐलान

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। सरकार द्वारा लागू किए जा रहे मॉडल एक्ट व मंडी निजीकरण के विरोध में संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर कृषि उपज मंडी गोंगलई में कर्मचारियों ने 25 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है । गुरुवार को मंडी कर्मचारियों सहित तुलावटी, हम्माल, हाथ ठेला-लोडिंग गाड़ी चालक मंडी कर्मचारी ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध किया आपको बताएं कि जिले मेंं 7 मंडी हैै जिनके 1 सैकड़ा से अधिक मंडी कर्मचारी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं वही प्रदेश स्तर पर मंडी कर्मचारी सहित पेंशनर को मिलाकर करीब 11,000 कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे ।जिसको लेकर आज गोंगलई मंडी के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की आवश्यक रूपरेखा तय की।
मॉडल एक्ट का लगातार हो रहा विरोध

केंद्र सरकार के द्वारा 1 मई को मध्यप्रदेश शासन द्वारा मॉडल एक्ट लागू करने का अध्यादेश जारी किया गया है जिसका लगातार विरोध कृषि मंडी समितियों के द्वारा किया जा रहा है इस अध्यादेश के जरिए मंडी के बाहर अनाज की खरीदी बिक्री की अनुमति देने के साथ टैक्स में छूट दी जा रही है इस तरह मंडी को कैंपस में ही सीमित कर दिया गया है जिसका लगातार विरोध हो रहा है।
अध्यादेश से 259 कृषि उपज मंडी होंगी प्रभावित
प्रदेश भर में 259 कृषि उपज मंडी है इन मंडियों का कार्यभार मंडी समितियों के द्वारा संभाला जाता है मंडी प्रांगण के अंदर आने वाले माल वाहको लाइसेंस धारियों से जो आय होती है उसी से मंडी समितियों में पदस्थ कर्मचारियों का वेतन बनता है यदि अध्यादेश लागू होता है तो मंडी के कर्मचारियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभाव पड़ेगा जिले में स्थित गोंगलई कृषि मंडी के कर्मचारियों का कहना है कि जब तक यह अध्यादेश वापस नहीं लिया जाता तब तक वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।
केंद्र सरकार अध्यादेश वापस ले- अंबु लाल तयकर
संयुक्त मोर्चा के जिला पदाधिकारी एवं मंडी सचिव अंबु लाल तयकर ने बताया कि केंद्र सरकार के द्वारा लाए गए अध्यादेश का संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है और हमारे द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत की गई है और कृषि मंडी को बंद कर लगातार विरोध किया जा रहा है उन्होंने कहा कि 3 सितंबर को भी सरकार के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था संयुक्त संघर्ष मोर्चा और जनप्रतिनिधियों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा हुई थी और 15 दिनों का समय मांगा गया था लेकिन यह 15 दिन पूरे हो चुके हैं इसके बावजूद भी सरकार के द्वारा हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया जिसके कारण एक बार फिर उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि केंद्र सरकार किसान विरोधी अध्यादेश को तत्काल वापस ले और मंडी के निजीकरण की प्रक्रिया को बंद करें यदि उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया तो यह आंदोलन लगातार चलता रहेगा और अधिकारी कर्मचारी काम नहीं करेंगे।

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