मध्य प्रदेश की सरकारी लैब में पर्याप्त क्षमता फिर भी निजी में जांच, रोज सवा करोड़ खर्च

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 मध्य प्रदेश की विभिन्न सरकारी लैब में कोरोना के सैंपल जांचने की पर्याप्त क्षमता होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा अहमदाबाद की सुप्राटेक लैब में जांच के लिए रोज 6000 से 7000 सैंपल भेजकर जांच कराई जा रही है। राज्य सरकार प्रति सैंपल 1980 रुपये की दर से रोजाना करीब सवा करोड़ रुपये इस लैब को भुगतान कर रही है।

जांच किट, कर्मचारी, मशीनें सभी का खर्च मिला लें तो भी सरकारी अस्पताल में एक सैंपल की जांच का खर्च 900 से 1000 रुपये आता है। इसके बाद भी दोगुने खर्च पर निजी लैब से जांच कराने पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। राज्य और केंद्र सरकार की लैब और रैपिड एंटीजन टेस्ट को मिलाकर हर दिन 22,080 सैंपल जांचने की क्षमता है।

पूरे मप्र में कोरोना के इस महीने रोज औसत 23,315 सैंपलों की और अगस्त में 19,672 सैंपलों की जांच कराई गई है। इस लिहाज से सभी सैंपलों की जांच सरकारी लैब में हो सकती थी। जैसे-जैसे मरीज बढ़ रहे हैं, सरकारी लैब की जांच क्षमता भी लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा रैपिड एंटीजन टेस्ट की सुविधा शुरू होने से भी आरटी-पीसीआर जांच पर निर्भरता कम हो गई है।

निजी लैब से जांच कराने की जगह सरकार रैपिड टेस्ट की संख्या बढ़ा सकती है। इससे एक जांच 440 रुपये में पड़ती है। मौके पर ही 15 मिनट में जांच रिपोर्ट मिल जाती है। आइसीआर ने इस जांच को भी भरोसेमंद मानते हुए अनुमति दी है। किट सस्ती होने से कम हो गया जांच का खर्च कोरोना का एक सैंपल जांचने के लिए मार्च में किट 900 से 1200 रुपये में मिल रही थीं।

इसके बाद कई कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया तो किट की कीमत लगातार कम होती गई। मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाय कॉर्पोरेशन ने जून में सुप्राटेक लैब के साथ अनुबंध किया था, उस दौरान 750 रुपये में किट मिल रही थी। अब किट 250 रुपये से लेकर 400 तक में मिल रही है। किट सस्ती होने के बाद भी निजी लैब को 1980 रुपये प्रति सैंपल के लिहाज से भुगतान किया जा रहा है।

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