मिलर्स एसोसिएशन के दबाव के आगे झुका शासन-प्रशासन

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वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। मध्यप्रदेश में बालाघाट जिला धान उत्पादन के लिए प्रसिध्द है और विभिन्न प्रजाति की धान की खेती की जाती है। सरकार से कस्टम मिलिंग के लिए ली गई धान के बदले में घटिया एवं गुणवत्ताहीन चांवल प्रदाय करने के मामले में वारासिवनी अनुविभाग सहित जिले की १८ राईस मिलों पर प्रशासन के द्वारा ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए गत दिवस सील किया गया था। जिसके बाद राईस मिलर्स एसोसिएशन संघ के द्वारा सरकार व प्रशासन पर दबाव बनाया गया कि अब कस्टम मिलिंग नही करेगें सहित अन्य दबाव बनाया उसके बाद शासन-प्रशासन मिलर्स एसोसिएशन के दबाव के सामने नतमस्तक यानि झुकते हुए सील की गई राईस मिल व गोदामों के ताले खोलने के निर्देश खाद्य विभाग प्रमुख सचिव द्वारा जिला कलेक्टर को दिया गया। कलेक्टर द्वारा बनाई गई ७ टीम द्वारा वारासिवनी अनुविभाग सहित जिले के राईस मिलों व गोदामों के ताले १० सितंबर से खोल दिये गये है जहां आज से पुन: मिलिंग कस्टम का कार्य शुरू हो जायेगा।
अमानक स्तर के चांवल के मामले में नहीं हुई बड़ी कार्यवाही
नगर में १० सितंबर को बीते दिनों सील की गई राईस मिलों को खोलने की कार्यवाही जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में की गई, जिसमें नगर की १३ राईस मिल गोदाम, वेयरहाउस को खोलने का काम किया गया। विदित हो कि बीते दिनों देश , प्रदेश स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को घटिया चा़़वल वितरण करने के मामले में खूब हल्ला चला। जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी संज्ञान लिया और मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय को कार्यवाही के संबंध में पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई थी जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय एक्शन में आया और तत्काल बालाघाट , मंडला सहित अन्य जिला कलेक्टर को तत्काल आदेश जारी कर राईस मिलर्स और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गये थे। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य द्वारा टीम गठित कर तत्काल संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज एवं वारासिवनी अनुविभाग की १३ एवं अन्य स्थानों की ५ इस तरह १८ राईस मिलों को सील किया गया था जिसके बाद यह मामला प्रदेश व केन्द्र स्तर तक पहुंच गया था और आगे बडी कार्यवाही व खुलासे होने के आसार नजर आ रहे थे।
गुणवत्ताहीन चांवल मामले की जांच होनी थी ईओडब्ल्यू से
घटिया व गुणवत्ताहीन चांवल के मामले में गत दिवस मुख्यमंत्री के निर्देश जारी होने के बाद वारासिवनी अनुविभाग क्षेत्र के १३ राईस मिलों को सील करने के साथ ही विद्युत कनेक्शन काटने के बाद शासन को घटिया चांवल प्रदाय करने के लिए राईस मिल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये गये थे। जिसके बाद शासन द्वारा ईओडब्ल्यू जांच एजेंसी बनाकर ५ सदस्यीय टीम को बालाघाट जिला भेजा गया था जिनके द्वारा जांच प्रारंभ कर दी गई थी और रिपोर्ट दर्ज करने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी के मार्गदर्शन में एसआईटी भी गठित की गई थी किंतु उक्त कार्यवाही मात्र एक हल्ला ही साबित हुई क्योंकि जिस घटिया चांवल को लेकर उक्त राईस मिलों को सील किया गया था और कार्यवाही कर जांच की जा रही थी जिसमें सभी को एक बड़ी कार्यवाही होने की आशंका थी क्योंकि उक्त मामले में पीएमओ और सीएमओ कार्यालय का संज्ञान था।
अमानक स्तर के चांवल को बदला जायेगा
जिला राईस एसोसिएशन के द्वारा गत दिनों प्रशासन के द्वारा जो राईस मिल व गोदामों को सील किया गया था उसका विरोध करते हुए शासन के सामने अपनी कुछ मांगे रखते हुए इस कार्यवाही का विरोध करते हुए कस्टम मिलिंग सदैव के लिए बंद करने की बात भी कही गई थी। जिस पर मध्यप्रदेश शासन के द्वारा राईस मिल एसोसिएशन की मांग को मानते हुए ८ सितंबर को खाद्य विभाग प्रमुख सचिव का पत्र जारी कर सील की गई राईस मिल ,ग,वेयर हाउस सभी को खोलने की अनुमति दी गई और एफ आई आर दर्ज न करने ,, जो घटिया चांवल शासकीय वेयरहाउस में आया है उसे दूसरे चांवल से एक्सचेंज करने की अनुमति दी गई। जिसके परिपालन में १० सितंबर को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया जिनके द्वारा अनुविभाग क्षेत्र की १३ राईस मिल और गोदाम में लगे ताले को खोलने की कार्यवाही की गई। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप सिंह, तहसीलदार राजेंद्र तेकाम सहित अन्य राजस्व अमला मौजूद रहा।
ऐसोसिएशन की हुई जीत – गंभीर संचेती
पदमेश से चर्चा में संचेती राईस मिल संचालक गंभीर संचेती ने बताया कि दिल्ली की टीम द्वारा गोदामों की जांच की गई थी जिसमें अमानक स्तर का चांवल पाने पर ्रश्वेता वेयर हाउस व जिले की १८ राईस मिलों को सील कर विद्युत कनेक्शन विच्छेद किया गया था जिसके बाद मिलर्स महासंघ द्वारा शासन के समक्ष अपनी मांगे रखी गई जिसके बाद प्रमुख सचिव खाद्य विभाग द्वारा ८ सितंबर को आदेश जारी कर कलेक्टर को निर्देशित किया गया था कि सील राईस मिल व गोदामों को खोले उसी के तहत गुरूवार को सील राईस मिल व गोदामों को खोलने की कार्यवाही की गई है। श्री संचेती ने बताया कि अनुबंध मे प्रशासन के द्वारा राईस मिल सील करने का उल्लेख नही है, कलेक्टर द्वारा जबरदस्ती सील कर विद्युत कनेक्शन विच्छेद किये गये थे, महासंघ द्वारा शासन-प्रशासन से मांग की गई थी कि अमानक स्तर के चांवल को बदलने का अवसर दिया जाये और चांवल में २५ प्रतिशत बु्रकोन से अधिक आता है तो वह अमानक स्तर का होता है लेकिन खाने योग्य रहता है, शासन स्तर से मिलिंग कस्टम का अनुबंध नही होता यह अनुबंध नागरिक आपूर्ति निगम, मार्केटिंग फेडरेशन के बीच होता है शासन किस तरह का चांवल लेना है उसका निर्देश देता है और मिलर्स महासंघ की जीत हुई है, राईस मिलर्स अमानक स्तर के चांवल को बदलकर देगें साथ ही शासन से मांग है कि धान की लेब टेस्ट करवाये।
इनका कहना है

शासन के निर्देशानुसार जिले के १८ राईस मिल व गोदाम, वेयरहाउस जिन्हे पूर्व में सील किया गया था उन्हे खोल दिया गया है एवं राईस मिलों के द्वारा अमानक स्तर के चांवल के बदले गुणवत्तापूर्ण चांवल दिया जायेगा।
दीपक आर्य
कलेक्टर, बालाघाट

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