मोक्षधाम में कोविड पेशेंट के शव को लावारिस छोड़ गए कर्मचारी

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बालाघाट (पदमेश न्यूज)। देश सहित पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिससे बालाघाट जिला भी अछूता नहीं है जिले में भी कोरोना संक्रमण के मामलो में लगातार इजाफा हो रहा हैं जिसमें एक्टिव मरीजों की संख्या में रोजाना ही वृद्धि देखी जा रही है लगातार बढ़ते जा रहे इन्हीं मामलों के बीच बालाघाट जिले में अब तक 806से अधिक मरीज कोरोना पॉजीटिव्ह पाए गए है जिसमे लगभग 332 मरीज एक्टिव है जिनका उपचार कोविड सेंटर में जारी है। वही कोरोना से गंभीर रूप से पीडि़त 7 मरीजों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।जबकि कोरोना से अब तक 6 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए जहां एक ओर शासन प्रशासन द्वारा आए दिन नई नई गाइडलाइन जारी की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर जिले का स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी को लेकर गंभीर नहीं है और ना ही जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इन मामलों में गंभीरता दिखाई जा रही है शायद यही वजह है कि जिले में लगातार कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और रोजाना ही लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज की मौत होने पर उसके अंतिम संस्कार में भारी लापरवाही बरतने का एक ताजा मामला सामने आया है जिसे देख और सुनकर लोगों के होश उड़ गए मामला लांजी निवासी कोरोना पॉजीटिव्ह एक 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत से जुड़ा है जिसके अंतिम संस्कार के लिए शव को जागपुर मोक्षधाम लाया गया था जिसकी चिता को आग लगाने के बाद कर्मचारी चले गए जिनके जाने के बाद आग बुझ गई और शव बिना जले ही चिता पर पड़ा रहा।ऐसा एक बार नहीं बल्कि ऐसा दो बार हुआ जब कर्मचारी लाश जलाने के लिए मोक्षधाम पहुंचे,जहां उन्होंने बकायदा चिता पर लकडिय़ां सजा कर उस पर मिट्टी तेल और पेट्रोल का छिड़काव किया और आग लगाकर वापस चले गए और दोनों बार चिता नही जल सकी। इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए किसी अन्य व्यक्ति के अंतिम संस्कार में मोक्षधाम पहुंचे मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश सोनी ने स्वयं पैसे देकर कोविड पाजिटिव मरीज के शव का अंतिम संस्कार करवाया।इस घटना ने जहां एक ओर संबंधित विभाग की तमाम पोल खोलकर रख दी है तो वहीं दूसरी ओर लोगों में भय का वातावरण भी निर्माण कर दिया है निश्चित ही प्रशासन की ऐसी लापरवाही शहर वासियों के लिए किसी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।जिसपर संबंधित विभाग और जिला प्रशासन को बहुत अधिक मंथन करने की जरूरत है की इस लापरवाही को कैसे सुधारा जाए।
क्या कहता है नियम

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यदि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है तो अस्पताल के दक्ष कर्मचारी उस शव की सही तरह से सफाई और सैनिटाइज करने के बाद उसे पीपीई किट में अच्छी तरह से पैक करेंगे अस्पताल की एंबुलेंस से शव को शमशान या पहुंचाया जाएगा और परिजनों की मौजूदगी में नगरी प्रशासन के कर्मचारी बड़ी सुरक्षा के साथ उसका अंतिम संस्कार करेंगे । शव को छूने, नहलाने ,शव से लिपट कर रोने, उसे गले लगाने की इजाजत नहीं होगी साथ ही अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों को पीपीई किट पहनना अनिवार्य है वही अंतिम संस्कार से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 14 दिन के लिए कोरेंनटाइन किए जाने का नियम बनाया गया है लेकिन मंगलवार को मोक्ष धाम में इन सब नियमों को ताक पर रखा गया जहां पहले शव को जलाकर कर्मचारी उसे लावारिस अवस्था में छोड़कर भाग गए वह शिकायत होने पर जब शव को जलाने के लिए कर्मचारी आए तो दूसरी बार भी शव को आग लगाकर कर्मचारी चले गए जो कि नियम में नहीं है जब इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी वह मौजूद केमिस्ट एंड ड्रजिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश सोनी को लगी तो उन्होंने अंतिम संस्कार करने आए कर्मचारियों को स्वयं पैसे देकर पेट्रोल सहित अन्य सामग्रियां मंगाई और अंतिम संस्कार कराया।
आखिर जिम्मेदार कौन है?

सरकार की ओर से कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज की मौत होने पर गाइडलाइंस पूर्व में ही जारी की गई थी । गाइडलाइंस जारी करने के बाद भी नियमों की अवहेलना की जा रही है जिस पर अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारी अपनी गलती को मानने तैयार ही नहीं हैं उनका कहना है कि शव के अंतिम संस्कार में नियमों की जानकारी कर्मचारियों को दे दी गई है। शव के अंतिम संस्कार के लिए तमाम सामग्री उपलब्ध कराई गई है इतना बोल कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं तो वही दूसरी तरफ कर्मचारियों द्वारा इसका पालन नही किया जा रहा है मंगलवार को भी जागपुर घाट में कुछ ऐसा ही देखा गया जहां कर्मचारियों को दिए गए शव का बिना पीपीई किट पहने ही अंतिम संस्कार किया गया, जो कर्मचारी अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे थे उन कर्मचारियों के पास चिता को जलाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे सवाल यह है कि आखिर इस सब का जिम्मेदार कौन है और जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह क्यों नहीं कर रहा है।
कोरोना पॉजीटिव्ह मरीजों के शव का अन्य स्थान पर अंतिम संस्कार किए जाने की उठी मांग
कोरोना पॉजीटिव्ह एक मरीज की मौत होने पर उसके अंतिम संस्कार में बरती गई लापरवाही गई को देखते हुए एक बार फिर से कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज के शव का अन्य स्थान पर अंतिम संस्कार किए जाने की मांग उठ रही है मोक्ष धाम में पहुंचे सभी नागरिकों ने जहां कोरोना पॉजीटिव्ह मृतक की चिता जागपुर मोक्षधाम घाट पर ना करते हुए किसी अन्य स्थान पर उसका अंतिम संस्कार किए जाने की मांग की है तो वही मोक्ष धाम परिसर स्थित कॉलोनी वासी भी इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से अब तक इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है जिसको लेकर लोगों में जहां एक और भय का माहौल निर्माण हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर लोगों में जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
इससे संक्रमण का खतरा है -विकास सोनी
जागपुर मोक्ष धाम में किसी अन्य व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पहुंचे विकास सोनी ने बताया कि जब वे मोक्ष धाम पहुंचे तो दो कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव्ह व्यक्ति के शव को जला रहे थे लेकिन लकड़ी गीली होने के चलते चिता नहीं जल रही थी वहीं कर्मचारी चिता में आग लगाकर चले गए जबकि उनके जाने के बाद चिता की आग बुझ गई और शव नहीं जला इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है हमारी मांग है कि कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज की मौत होने पर उसका अंतिम संस्कार किसी अन्य स्थान पर किया जाना चाहिए ।
चिता को लावारिस छोड़ कर चले गए -अशोक दुबे
वही मोक्ष धाम पहुंचे अशोक दुबे ने बताया कि 2 कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज के शव को बिना जलाए ही लावारिस छोड़ कर चले गए हैं जो कि गलत है क्योंकि इससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है उन्होंने बताया कि कोरोना मरीज के लिए जब अलग अस्पताल बनाया गया है तो कोरोना पॉजीटिव्ह मरीज के शव को जलाने के लिए भी अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए यह कर्मचारी शव को जलाने आए थे जो उसमें आग लगा कर चले गए और कुछ देर बाद आग बुझ गई जबकि शव भी नही जला। उन्होंने बताया कि यहां संक्रमण हवा से फैल सकता है इसमें प्रशासन की गलती है कर्मचारी भी लापरवाही बरत रहे हैं शव जलाने के लिए उन्हें मिट्टी तेल पेट्रोल डीजल सहित अन्य व्यवस्थाएं पहले से करनी चाहिए।
अन्य राज्यों जैसी व्यवस्था होनी चाहिए- सुरेश सोनी
वही इस पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान बालाघाट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश सोनी ने बताया कि वे सुबह 7 बजे मोक्षधाम पहुंचे तो 2 कर्मचारी कोरोना पॉजीटिव्ह शव की चिता पर आग लगा रहे थे जो आग लगा कर चले गए जबकि उनके जाते ही वह आग बुझ गई और शव नहीं जला इसकी शिकायत करने पर पुन: कर्मचारी पेट्रोल और टायर लेकर आए जिन्होंने पुन: चिता में आग लगाई और चले गए जबकि शव पूरा जलने के बाद उन्हें यहां से जाना था। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति कोरोना पॉजीटिव्ह आता है या पॉजीटिव्ह के संपर्क में आ जाता है तो उसके घर को सील किया जाता है तो फिर इस बीमारी से मौत होने वाले व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के लिए भी अलग से इंतजाम किए जाने चाहिए क्योंकि इस स्थान पर विभिन्न जगह के लोग अंतिम संस्कार ,दहा संस्कार करने सहित अन्य कार्यों के लिए आते हैं राजनांदगांव सहित अन्य राज्यों में कोविड से मरने वाले व्यक्तियों के शव को जलाने की अलग से व्यवस्था की जाती है लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है जबकि कर्मचारी भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही शव को जला रहे थे जो कि गलत है।
सभी लोग दहशत में हैं-सरिता बिसेन
जागपुर मोक्ष धाम परिसर स्थित आवास टोली निवासी सरिता बिसेन ने बताया कि आवास टोली में करीब 70 मकान है सभी लोग मोक्षधाम से ही पानी भरते हैं गार्डन में काम करते हैं वहीं अन्य कार्यों के लिए रोजाना मोक्ष धाम आना जाना लगा रहता है कुछ देर पूर्व कोरोना से मरे हुए एक व्यक्ति की बॉडी दो कर्मचारियों द्वारा लाई गई थी जो पूर्ण रूप से जली भी नहीं की कि कर्मचारी उस बॉडी को छोड़ कर चले गए इससे सभी लोग भयभीत और दहशत में हैं क्योंकि आवास टोली के सभी लोग पानी भरने कपड़े धोने सही अन्य कार्य के लिए वहां आते जाते रहते हैं हमारी मांग है कि कोरोना से मौत होने वाले व्यक्तियों का दाह संस्कार मोक्ष धाम की जगह कटंग नाले या फिर अन्य स्थान पर किया जाना चाहिए इसकी शिकायत तहसीलदार से भी की जा चुकी है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
दाह संस्कार के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई थी -मनोज पांडेय
वहीं इस पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि अंतिम संस्कार के वक्त परिजनों को उपस्थित रहना चाहिए लेकिन उनके परिजन अंतिम संस्कार में नहीं आए ऐसी स्थिति में यदि विभाग द्वारा अंतिम संस्कार कराया जा रहा है और लकडिय़ा नहीं जल रही है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं हमारे द्वारा पेट्रोल सहित दाह संस्कार की संपूर्ण सामग्रियां कर्मचारियों को दी गई थी वही दाह संस्कार के तमाम इंतजाम किए गए थे यदि इस दौरान कोई मदद करता है तो यह अच्छी बात है लेकिन इस मामले में किसी को दोष देना गलत है।

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