रिजर्व बैंक से पर्पस कोड की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची बाइंग फर्म, कोर्ट ने कहा- पहले RBI को दें आवेदन

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विदेशी भुगतान से जुड़े नियमों में आ रही दिक्कत को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची एक एक्सपोर्ट फर्म को फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता को पहले भारतीय रिजर्व बैंक के पास अपनी शिकायत रखनी चाहिए थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक पार्टनरशिप फर्म से जुड़ा है, जो 1991 से कपड़ों और अपैरल के एक्सपोर्ट से जुड़ा कारोबार करती है। फर्म बाइंग एजेंसी की तरह काम करती है। यानी यह विदेशी ग्राहकों से ऑर्डर लेकर भारत के निर्माताओं तक पहुंचाती है और भुगतान की प्रक्रिया संभालती है।

याचिका में बताया गया है कि 1991 से 2013 के बीच फर्म को नियमित रूप से विदेशी भुगतान मिलता रहा। यह भुगतान अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड में प्राप्त होता था।

EFIRC सिस्टम से शुरू हुई दिक्कत

फर्म ने अदालत को बताया कि नई इलेक्ट्रॉनिक FIRC यानी EFIRC प्रणाली के कारण समस्या खड़ी हुई है। इस सिस्टम में भुगतान के कारण को केवल तय पर्पस कोड के जरिए ही दर्ज किया जा सकता है, जबकि उनके बिजनेस मॉडल के लिए कोई उपयुक्त कोड उपलब्ध नहीं है।

महामारी के बाद दोबारा शुरू किया कारोबार

याचिका के मुताबिक, फर्म ने 2013 से 2020 के बीच निजी कारणों से अपना कारोबार बंद कर दिया था। कोविड के दौरान 2021 में घरेलू कारोबार को सहारा देने के लिए इसने फिर से बाइंग एजेंसी का काम शुरू किया। लेकिन नई डिजिटल प्रणाली के कारण उसे शुरू से ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

बैंक ने रोकी रकम, GR क्लोज नहीं

अगस्त 2023 में Axis Bank ने फर्म से दस्तावेज मांगे, लेकिन पर्पस कोड की कमी के कारण भुगतान अटक गया। न तो GR क्लोज नहीं हो पा रहा और न ही RBI और कस्टम की प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही। इससे फर्म को आर्थिक नुकसान का खतरा है।

याचिका में क्या मांग की गई?

याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि RBI को बाइंग एजेंसी के लिए पर्पस कोड तय करने का निर्देश दिया जाए। और यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

190 से ज्यादा कोड, फिर भी बाइंग एजेंसी शामिल नहीं

याचिका के मुताबिक RBI ने अलग अलग प्रकार के लेनदेन के लिए 190 से ज्यादा पर्पस कोड तय किए हैं। इसके बावजूद याचिकाकर्ता का दावा है कि बाइंग एजेंसी जैसे आम बिजनेस मॉडल के लिए कोई अलग कोड नहीं है। इस वजह से उनका पूरा व्यापारिक ढांचा प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया, जबकि पहले आरबीआई के पास जाना चाहिए था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर RBI के पास अपनी शिकायत रखे। और आरबीआई इस पर 6 हफ्ते के अंदर फैसला ले। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि RBI का फैसला याचिकाकर्ता के खिलाफ जाता है, तो वह संबंधित हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।

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