लाखो΄ के नुकसान पर किसी को मिले ५० रू., ८०रू. किसी को १०४ रूपये तो किसी को कुछ भी नही΄ मिला

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बालाघाट (पद्मेश न्यूज)। मध्यप्रदेश शासन द्वारा किसानों को फसल बीमा के नाम पर दी जाने वाली राशि के रूप में बहुत बड़ा मजाक किया गया है। इस बात का जीता जागता उदाहरण जिले के सैकड़ों किसान है जिन्हें फसल नष्ट होने के नाम पर 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक दिया गया है। विदित हो कि गत दिवस आई बाढ़ आपदा के कारण जिले के बहुतायत क्षेत्रों में किसानों की फसल नष्ट हुई, वही फसल में कई प्रकार के बीमारियां भी लग गई जिसके कारण फसल को काफी नुकसान होना बताया जा रहा है। जिस प्रकार प्रशासन द्वारा फसलों का सर्वे कार्य किया गया था उससे किसानों को लगने लगा था कि शासन अवश्य कुछ राहत प्रदान करेगा लेकिन 80 रुपए और 100 रुपए की बीमा राशि देखकर किसान उसे बहुत बड़ा मजाक किया जाना कह रहे हैं। इस बीमा राशि को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है वहीं यह भी बताया जा रहा है कि कुछ गांव में किसानों को यह राशि मिली है वहीं कई गांव में किसानों के पास अभी तक यह राशि पहुंच भी नहीं पाई है। इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

डेढ़ लाख का नुकसान मुआवजा मिला 80 रुपए

ऐसे ही लगभग 3 दर्जन से अधिक किसानों से पद्मेश न्यूज़ ने चर्चा की तो उन्होंने अपनी परेशानी मीडिया के सामने रखी। किसानों ने बताया कि फसल बीमा के नाम पर उनके साथ बहुत बड़ा मजाक किया गया है 3 एकड़ में लगी फसल खराब हो गई इसके नाम पर 500 रुपए मुआवजा दिया गया है। सरकारी रेट के हिसाब से यदि 3 एकड़ की फसल से उन्हें हजारों रुपए मिल जाते हैं। 1 लाख से अधिक का नुकसान होने पर भी उन्हें 100 रुपए से भी कम का मुआवजा मिलना शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
करीब डेढ़ लाख का नुकसान हुआ – कमलेश
ग्राम गड़दा के किसान कमलेश गहगये ने बताया कि किसान को फसल बीमा की जो राशि मिली है किसी को 80 रुपए तो किसी को 104 रुपए मिले हैं, मुझे फसल बीमा राशि के रूप में 800 रुपए मिले हैं वह भी फसल बीमा के नाम पर जीवन में पहली बार। फसल में पोंगा की बीमारी और माहु भी हुआ है उससे 3 एकड़ में लगी फसल नष्ट हो गई। डेढ़ से 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ है, 1 एकड़ में 20 क्विंटल फसल आती थी एक बार 5 क्विंटल भी नहीं आएगी। जो फसल बीमा राशि मिली है उससे मजदूरी भी नहीं निकलेगी।
मजाक कर रही सरकार किसानों के साथ – भोजराज
ग्राम गड़दा के किसान भोजराज गहगहे ने बताया कि फसल बीमा के नाम पर मिलने वाली राशि को देखकर किसान बहुत अधिक आक्रोशित है यह कह रहे हैं कि उनकी स्थिति आज भिखारी से भी बदतर हो गई है सड़क चलते भिखारी को भी लोग ज्यादा पैसा दे देते है। इतनी फसल बर्बाद हुई उसका मुआवजा कितना कम मिला, ऊपर से वर्तमान समय में खेती में लगी बीमारी किसान के सामने आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति निर्मित हो गई है। ऐसा लग रहा है सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है।
कई गांव के किसानों को राशि नहीं मिली – भुवनलाल पारधी
ग्राम परासपानी के किसान भुवनलाल पारधी ने बताया कि एक ओर आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसान अल्प राशि मिलने का दुख मना रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ऐसे भी कई गांव है जहां पर फसल खराब होने पर सर्वे हुआ लेकिन अब तक किसानों के खाते में राशि जमा नहीं हुई। किसान अपने आप को और अधिक ठगा महसूस कर रहे हैं। फसल बीमा के पैसे कटते हैं लेकिन आज तक बीमा के रूप में राशि नहीं मिली, जो पैसा नहीं पटाता सोसाइटी में उसका पैसा माफ कर दिया जाता है किसानों के साथ बहुत भेदभाव हो रहा है।
हमें नहीं मिली फसल बीमा राशि – लक्ष्मी प्रसाद
ग्राम परासपानी के किसान लक्ष्मीप्रसाद पारधी ने बताया कि उन्हें बीमा राशि तो नहीं मिली, बीते चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टी द्वारा किया गया वादा किसान कर्ज माफी तक आज तक नहीं की गई इस बात को लेकर भी कृषक बहुत अधिक हैरान और परेशान है। वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस करते हैं कहते हैं सरकार है जो देना है दे नही देना है ना दे तो उसका कोई क्या कर सकता है।
खाते से हर साल कटती है फसल बीमा राशि -बिरसिंह लिल्हारे
सोसायटी के पूर्व संचालक बिरसिंह लिल्हारे ने बताया कि किसानों के सामने विडंबना यह है कि फसल बीमा के नाम से हर साल 3 से 4 हजार रुपए प्रति किसान खाते से काट लिया जाता है और मुआवजे के रूप में 84 और 85 रुपए दिया जाता है। किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है।
फाइनल सूची अभी तक नहीं पहुंची है – गौर
दूरभाष पर चर्चा के दौरान कृषि उपसंचालक सीआर गौड़ ने बताया कि सर्वे के आधार पर फसल बीमा की राशि स्वीकृत की जाती है वरिष्ठ स्तर से जो राशि स्वीकृत की गई है वहीं राशि किसानों को दी जाएगी। श्री गौर बताते हैं उनके पास अब तक बैंक द्वारा भेजी गई सूची नहीं पहुंची है। खाते में जो राशि गई उसकी फाइनल सूची अभी तक नहीं पहुंची है।
किसानों की सूची हो चुकी है उपलब्ध

यह विडंबना ही है कि विभाग द्वारा फाइनल सूची नहीं पहुंचना बताया जा रहा है जबकि हमारे पास किसानों की सूची और उनको दी जाने वाली राशि का पूरा ब्यौरा तक उपलब्ध हो चुका है। जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि 13043 किसानों को 37 लाख 44 हजार 263 रुपये दिए गए है।
किसान हितैषी बनने की हर पार्टी करती है बात
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान हर पार्टी किसानों का हितैषी बनने का दम भरती है लेकिन हकीकत क्या है यह आपके सामने है फसल मुआवजा के नाम पर 50 रुपए और 100 रुपए दिया जाता है।
ठगा महसूस कर रहा किसान

ऐसे में किसान स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। बीमा के नाम पर किसानों से खाते से जबरन पैसे कटा लिया जाना और फसल बीमा के नाम पर बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है, और किसानों को हर बार की तरह इस बार भी धोखा मिला। इस बात का दूध का दूध और पानी का पानी होता दिखाई दे रहा है।

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