पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वीरांगना रानी अवंती बाई स्टेडियम में १ फरवरी को सकल हिंदू समाज के तत्वाधान में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीमद् जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य महाराज के सानिध्य में वीर रस के कवि सुमित ओरछा के मुख्य आतिथ्य, प्रांत प्रचार प्रमुख महाकौशल प्रांत विनोद दिनेश्वर ,मुख्य वक्ता श्रीमती प्रतिमा बिसेन प्रांत बौद्धिक प्रमुख राष्ट्रीय सेविका समिति प्रांत प्रचार प्रमुख महाकौशल प्रांत के विशिष्ट आतिथ्य सहित ४६ समाज प्रमुखो की उपस्थिति में प्रारंभ किया गया। जिसमें सर्वप्रथम उपस्थित जनों के द्वारा भारत माता एवं संत शिरोमणि रविदास महाराज के छायाचित्र के समस्त दीप प्रचलित कर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात गौ माता का पूजन कर नौ कन्या पूजन विधिविधान से कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। जिसमें हिन्दू जागरण की दिशा को नई ऊर्जा एवं चेतना प्रदान करने एवं सर्व हिन्दू समाज के द्वारा सनातन संस्कृति सनातन धर्म एवं सामाजिक एकता के विषय पर चिंतन किया गया। जिसमें भारत माता की आरती के साथ विराट हिंदू सम्मेलन का समापन कर सामूहिक भोज किया गया। इस अवसर पर भारी तादात में सकल हिंदू समाज मौजूद रहा।
श्रीराम मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा
विराट हिंदू सम्मेलन का प्रारंभ भव्य शोभायात्रा से किया गया। यह शोभायात्रा श्री राम मंदिर से प्रारंभ की गई जो नगर के गोलीबारी चौक ,अंाबेडकर चौक ,नेहरू चौक ,जय स्तंभ चौक ,बस स्टैंड सहित विभिन्न चौक चौराहा और गलियों का भ्रमण करते हुए वीरांगना रानी अवंती बाई स्टेडियम पहुंची। जहां मुख्य कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। यह शोभायात्रा नगर में काफी आकर्षक का केंद्र रही इसमें प्रमुख रूप से आकर्षण के केंद्र विभिन्न डीजे बैंड पर बज रहे भक्ति गीत, अश्व पर सवार महापुरुषों की जीवंत झांकी, रथ पर सवार राम दरबार, माता अहिल्याबाई होलकर, मां सरस्वती, भारत माता सहित ट्रैक्टर में विराजित अन्य जीवंत झांकियां सहित शोभायात्रा में लहराते भगवे ध्वज आकर्षण का केंद्र रहे।
मनमोहक प्रस्तुति का भव्य रूप से हुआ प्रदर्शन
विराट हिंदू सम्मेलन में सनातन समाज के चिंतन एवं समाज को जागरूक करने मंच पर विभिन्न नृत्य प्रस्तुति का भव्य रूप से आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से लोगों को आपसी व्यवहार में कटुता को दूर कर सामाजिक एकता के साथ रहने का संदेश दिया गया। जिसमें द्वापर सतयुग त्रेतायुग एवं कलयुग की झलकियां प्रस्तुत की गई। वहीं छत्रपति संभाजी महाराज पर नाट्य एवं नृत्य प्रस्तुति भी दी गई। इस दौरान बालक बालिकाओं के द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां देकर समाज को संदेश देने का कार्य किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के द्वारा मंत्र मुग्द होकर प्रस्तुति का आनंद लेकर सराहना भी की जाती रही। वहीं लोगों को एकता के सूत्र में बांधने के साथ राष्ट्र को मजबूत करने का चिंतन करते हुए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग ,उपभोग एवं विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने का संदेश दिया गया। इसमें स्वदेशी वस्तुओं के स्टाल भी लगाए गए जहां पर लोगों के द्वारा भ्रमण कर खरीदी की गई।
रुद्राक्ष का नि:शुल्क किया गया वितरण
कार्यक्रम में श्रीमद् जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य महाराज शामिल हुए। उनके द्वारा सनातन धर्म को जागरूक करने का कार्य किया गया। वहीं उनके द्वारा समस्त सनातनियों को नि:शुल्क रुद्राक्ष का वितरण किया गया। जिसमें बारी बारी से उपस्थित लोगों के द्वारा जगतगुरु महाराज का आशीर्वाद लिया गया। तो वहीं कार्यक्रम स्थल से रुद्राक्ष प्राप्त कर अपने घरों के लिए रवाना हुए। रुद्राक्ष वितरण के दौरान उपस्थित लोग काफ ी हर्षित नजर आए । जिसमें आयोजन समिति के द्वारा सभी को लाइन से रुद्राक्ष वितरण करवाया गया। वहीं प्रसादी के रूप में सभी सकल हिन्दू समाज ने भोजन ग्रहण भी किया।
जगह जगह भव्य शोभायात्रा का हुआ स्वागत
श्री राम मंदिर से विराट हिंदू सम्मेलन के लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो नगर के विभिन्न चौक चौराहा का भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल पहुंची। इस दौरान मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर उपस्थित लोगों के द्वारा पुष्प की पंखुडिय़ां की वर्षा कर भव्य शोभायात्रा का स्वागत किया गया। तो वहीं जगह.जगह नगर वासियों के द्वारा स्टार लगाकर शोभायात्रा में शामिल लोगों को पानी पुलाव एवं अन्य सामग्री का वितरण किया जाता रहा।
ग्रंथ कहते हैं नारी पूजनीय है पूजा होनी चाहिए-प्रतिमा बिसेन
श्रीमती प्रतिमा बिसेन ने कहां की हिंदू राष्ट्र जिस संस्कृति का निर्माण करता है उस संस्कृति की पहली कड़ी उसका परिवार और उसे परिवार की नीव और धुरी नारी है। यह नारी परिवार का निर्माण कर अपना सर्वस्व निछावर करती है वह ऐसे परिवार का निर्माण करें जो राष्ट्र के लिए हो सभी सुखी रहे। किसी घर में जब बेटी जन्म लेती है तो मां उसे सब सिखाती है और उसे बताती है कि उसकी भूमिका केवल अकेली नहीं परिवार समाज और राष्ट्र निर्माण की है। हमारे ग्रंथ भी कहते हैं कि नारी पूजनीय है उनकी पूजा इसलिए होनी चाहिए कि वह अपना सब देकर परिवार का निर्माण करती है। जब परिवार का निर्माण होता है तो उसके राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भी माँ सिखाती है और ऐसे इतिहास में कई उदाहरण आपको देखने को मिलेंगे।
७१२ में मुगल भारत आए और भारत को तहस नहस करने का षड्यंत्र रचा था – विनोद दिनेश्वर
विनोद दिनेश्वर ने कहा कि अतीत का गौरव रहा है कि खतरनाक आक्रांताओं को हमने यहीं खत्म करने का काम किया है। दुर्भाग्य से ७१२ में मुगल भारत आए वह भारत को तहस नहस करने का षड्यंत्र रचकर आए थे। यही सोचकर उन्होंने आक्रमण भी किया कि भारत के मान बिंदुओं को वह समाप्त कर देंगे। जिसके लिए उन्होंने मंदिर तोड़े गौ हत्या की माता बहनों की इज्जत लूटी और चारों तरफ नरसंहार किया। ऐसे मान बिंदु खत्म करने का उन्होंने प्रयास किया किंतु वह हमें और हमारी संस्कृति को हिला नहीं पाये। उस समय हम संघर्ष करते रहे जिससे हमारे अंदर कमी आई यह जो पर्दा प्रथा है वह हमारी नहीं है । बुंदेलखंड और बघेलखंड में आज भी घुंघट होता है वह केवल हमारी माता बहनों को बचाने के लिए लिया गया। इसी के साथ महिलाओं को घर में रखना बाल विवाह करने पेट विवाह तक करने जैसी कुरीतियों इन्हीं आक्रांताओं के कारण पैदा हुई।










































