शहीद अशफाक उल्ला खान के नाम से राजनीति,स्वर्ण जयंती वर्ष में शहीद अशफाक उल्ला गार्डन बनाने की की गई थी घोषणा

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देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले भारत मां के वीर सपूत आजादी के लाल शहीद अशफाक उल्ला खान के नाम पर शहर के भीतर केवल राजनीति हो रही है। इस बात की बांनगी वार्ड नंबर 8 में 20 वर्ष पहले स्वर्ण जयंती के अवसर पर गार्डन बनाने की घोषणा से शुरू हुई और आज 120 वीं जयंती पर भी यह गार्डन नहीं बन सका बल्कि कांग्रेस और भाजपा अपनी अपनी राजनीति चमकाने में लगी हुई है।

22 अक्टूबर को शहीद अशफाक उल्ला खान की 120 वीं जयंती के अवसर पर दोनों ही पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों को याद आई और वे पहुंच गए वार्ड नंबर 8 जब दिल से कुछ किया ही नहीं तो उसका परिणाम क्या होगा। वह आपके सामने है शहीद के नाम पर की गई गार्डन की घोषणा केवल कागजी घोड़ा थी वह धरातल पर दिखाई दी। फिर क्या था दोनों ही पार्टी के युवाओं ने शहीद को अपना बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शायद उन्हें नहीं मालूम हो कि उनकी पीछे उनके वरिष्ठ कितनी घोषणा कर गए हैं जो आज तक पूरी नहीं हुई या कहें कि किसी ने पूरी करने की अच्छे मन से कोशिश ही नहीं की।

22 अक्टूबर को शहीद अशफाक उल्ला खान की 120 वीं जयंती के अवसर पर दोनों ही पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों को याद आई और वे पहुंच गए वार्ड नंबर 8 जब दिल से कुछ किया ही नहीं तो उसका परिणाम क्या होगा। वह आपके सामने है शहीद के नाम पर की गई गार्डन की घोषणा केवल कागजी घोड़ा थी वह धरातल पर दिखाई दी। फिर क्या था दोनों ही पार्टी के युवाओं ने शहीद को अपना बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन शायद उन्हें नहीं मालूम हो कि उनकी पीछे उनके वरिष्ठ कितनी घोषणा कर गए हैं जो आज तक पूरी नहीं हुई या कहें कि किसी ने पूरी करने की अच्छे मन से कोशिश ही नहीं की।

इस बात पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और लोग भी कहते हैं कि उन्होंने कोशिश की और सफलता नहीं मिली चलिये सुनते हैं उन्हीं की जुबानी।

20 वर्ष बीत गए नगर पालिका ने केवल 1 बोर्ड लगाया और नाम दे दिया शहीद अशफाक उल्ला खान गार्डन मगर उसके नाम पर कुछ हुआ नहीं अब तो बोर्ड भी जर्जर हो चुका है और गवाही दे रहा है की जिम्मेदारों ने उसके लिए कुछ नहीं किया।

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