श्रम सुधार विधेयकों पर राहुल का तंज, गरीबों का शोषण, मित्रों का पोषण यही है बस मोदी जी का शासन

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नई दिल्ली : संसद के मॉनसून सत्र को कोरोना संकट के कारण वक्त से पहले ही खत्म कर दिया गया. कुछ ही दिन के लिए चली संसद में सरकार की ओर से कई बिल पेश किए गए और पास भी करवा लिए गए. श्रम सुधारों को लेकर जो बिल पास हुआ है उसको लेकर कई श्रम संगठनों में गुस्सा है. गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा और इन सुधारों पर सवाल खड़े कर दिए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा कि किसानों के बाद मज़दूरों पर वार, ग़रीबों का शोषण, ‘मित्रों’ का पोषण, यही है बस मोदी जी का शासन.

दरअसल, बुधवार को राज्यसभा में 3 प्रमुख श्रम सुधार विधेयक पास हुए हैं. सरकार के मुताबिक, नए श्रम कानूनों से देश के संगठित और असंगठित दोनों ही प्रकार के श्रमिकों को कई प्रकार की नई सुविधाएं मिलेंगी.
 
लेकिन इसी बिल के तहत अब जिन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या 300 से कम है, वे बिना सरकारी इजाजत के कर्मचारियों की छंटनी कर सकेंगी. अब तक ये नियम सिर्फ उन्हीं कंपनियों के लिए था, जिसमें 100 से कम कर्मचारी थे. इसी फैसले पर कई श्रम संगठन और राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं.

साथ ही अब कर्मचारी 60 दिन पहले नोटिस दिए बिना किसी तरह की हड़ताल पर भी नहीं जा सकते हैं. सरकार इन फैसलों को उद्योगों के लिए सही बता रही है तो वहीं विपक्ष का तर्क है कि ये मजदूर विरोधी फैसले हैं.

इनसे पहले ही कृषि बिल को लेकर सरकार और विपक्ष में जंग छिड़ी हुई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसको लेकर हमलावर हैं. शुक्रवार को विपक्षी पार्टियों और देश के कई किसान संगठनों ने बंद बुलाया और प्रदर्शन करने की बात कही है.

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