राजधानी के जिस हमीदिया अस्पताल में सोमवार रात भीषण आगजनी का हादसा हुआ, उसके फायर कंट्रोल सिस्टम में पहले से जंग लगी है। इसका खुलासा खुद चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के सामने एक साल पहले हो चुका है। वे हमीदिया की नई ओपीडी बिल्डिंग में कोरोना मरीजों के लिए बनाए जा रहे 20 बिस्तर के वार्ड में सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे थे, तब उन्होंने फायर कंट्रोल सिस्टम को चालू करके दिखाने की बात कही थी। तब अधिकारी 30 मिनट तक फायर कंट्रोल सिस्टम में लगे ताले की चाबी उपलब्ध नहीं करा पाए थे। सिस्टम में बाहर से जंग लगी दिख रही थी। आखिरकार मंत्री इंतजार करते रहे और अधिकारी बगले झांकते रहे। चाबी के लिए काफी इंतजार के बाद मंत्री को वापस लौटना पड़ा था।
यह ओपीडी भवन नया है जिसमें बंद पड़े फायर कंट्रोल सिस्टम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्षों पुराने कमला नेहरू अस्पताल के भवन में स्थापित फायर कंट्रोल सिस्टम की क्या हालत होगी। इस भवन के तीसरे माले पर हमीदिया अस्पताल का पीडियाट्रिक वार्ड संचालित होता है, जिसमें सोमवार रात आग लगी थी।
बच्चों को खोने वाले परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल का फायर सिस्टम ध्वस्त था। जब सोमवार शाम करीब पौने आठ बजे धमका हुआ तो कोई सिस्टम काम नहीं कर रहा था। जब तक नगर निगम की फायर बिग्रेड नहीं पहुंची, तब तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका। फायर बिग्रेड को पहुंचने में ही पौन घंटे से अधिक का समय लग गया। परिजनों के आरोप है कि वे अकेले जूझते रहे। कुछ डाक्टर और नर्सेस ने जान जोखिम में डालकर उनकी मदद की और नवजातों को बचाने की हिम्मत जुटाई। बाकी का स्टाफ खुद की जान बचाकर भाग निकला था। दूर-दूर तक आग बुझाने वाले अस्पताल के कर्मचारी नजर नहीं आ रहे थे। वे और उनके बच्चे खुद मुश्किलों का सामना कर रहे थे। करीब एक घंटे बाद जब नगर निगम की फायर बिग्रेड आई, तब जाकर आग बुझाने का काम शुरू हो पाया। तब तक बच्चों का बुरा हाल हो चुका था।
मंत्री ने किए थे बार-बार दौरे
बीते साल मंत्री विश्वास सारंग ने हमीदिया अस्पताल की सेहत सुधारने के लिए एक के बाद एक दौरे किए थे। प्रत्येक व्यवस्थाओं का आडिट करने के दावे किए थे। वे अस्पताल में घंटो रहते थे। खुद अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान को व्यवस्था सुधारने के लिए कहा था। तब से लेकर अब तक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक बदल गए। गांधी मेडिकल कालेज के डीन भी बदल गए। अब आम नागरिकों का कहना है, जब व्यवस्था नहीं सुधरी तो मंत्री जी के बार-बार जाने का मतलब क्या है।










































